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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आरक्षण का लाभ लेने के बाद जनरल सीट पर नहीं कर सकते दावा!

क्या ज्यादा अंक लाने पर भी आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार जनरल सीट पा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अंतिम फैसला सुनाते हुए नियमों की नई लकीर खींच दी है। चयन प्रक्रिया के किसी भी चरण में मिली छूट कैसे आपका करियर और कैडर बदल सकती है, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर।

By Pinki Negi

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आरक्षण का लाभ लेने के बाद जनरल सीट पर नहीं कर सकते दावा!
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी उम्मीदवार ने यूपीएससी परीक्षा के किसी भी चरण में आरक्षण (Reservation) का लाभ उठा लिया है, तो वह बाद में सामान्य श्रेणी (General Category) की सीट पर दावा नहीं कर सकता।

अदालत ने साफ किया कि भले ही आरक्षण का लाभ लेने वाले उम्मीदवार के अंक सामान्य श्रेणी के आखिरी चयनित उम्मीदवार से अधिक हों, फिर भी उसे रिजर्व कैटेगरी में ही माना जाएगा। केंद्र सरकार की अपील पर आया यह फैसला कर्नाटक हाईकोर्ट के पुराने आदेश को पलटता है और भविष्य की भर्तियों के लिए आरक्षण के नियमों को और अधिक स्पष्ट करता है।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने साफ कर दिया है कि यदि किसी उम्मीदवार ने प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के स्तर पर ही आरक्षण का लाभ ले लिया है, तो वह बाद में सामान्य श्रेणी (General Category) की खाली सीटों पर दावा नहीं कर सकता।

यह फैसला भारतीय वन सेवा (IFS) के एक मामले में आया, जिसमें अनुसूचित जाति के उम्मीदवार ने अधिक अंक होने के आधार पर अनारक्षित सीट मांगी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया के किसी भी चरण में रिजर्वेशन का फायदा लेने वाला अभ्यर्थी पूरी प्रक्रिया के लिए ‘आरक्षित’ ही माना जाएगा। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस पुराने फैसले को रद्द कर दिया जिसमें उम्मीदवार के पक्ष में आदेश दिया गया था।

‘अंकों’ से ज्यादा ‘नियमों’ को दी प्राथमिकता

कर्नाटक हाईकोर्ट ने पहले यह आदेश दिया था कि यदि किसी आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार की फाइनल रैंक सामान्य श्रेणी (General Category) के उम्मीदवार से बेहतर है, तो उसे अनारक्षित सीट पर नियुक्ति दी जानी चाहिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि उम्मीदवार ने चयन प्रक्रिया की शुरुआत (जैसे प्रीलिम्स परीक्षा) में ही आरक्षण का लाभ उठा लिया है, तो वह पूरी प्रक्रिया के दौरान ‘आरक्षित वर्ग’ का ही हिस्सा माना जाएगा। भले ही उसकी अंतिम रैंक कितनी भी ऊंची क्यों न हो, वह सामान्य श्रेणी की सीट पर दावा करने का कानूनी हक खो देता है।

बेहतर प्रदर्शन के बावजूद नहीं बदलेगी कैटेगरी

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तकनीकी बारीकियों को स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि किसी उम्मीदवार (जैसे इस मामले में जी किरण) ने मुख्य परीक्षा (Mains) में बैठने के लिए आरक्षित श्रेणी के लाभ का उपयोग कर लिया है, तो वह प्रक्रिया के बीच में अपनी श्रेणी नहीं बदल सकता।

अदालत ने साफ तौर पर कहा कि भले ही उम्मीदवार ने बाद के चरणों (इंटरव्यू या फाइनल स्कोर) में सामान्य श्रेणी के 34 उम्मीदवारों से भी बेहतर प्रदर्शन किया हो, लेकिन शुरुआत में लिया गया आरक्षण का लाभ उसे सामान्य सीट पर दावा करने से रोकता है। यह फैसला स्पष्ट करता है कि चयन प्रक्रिया के दौरान ‘आरक्षण’ का चुनाव एक स्थायी विकल्प है जिसे अंकों के आधार पर बाद में बदला नहीं जा सकता।

परीक्षा नियम 2013 और कैडर आवंटन की स्थिति

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने परीक्षा नियम 2013 के नियम 14(ii) का हवाला देते हुए स्थिति को और भी सटीक रूप से स्पष्ट किया है। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई उम्मीदवार चयन के किसी भी चरण में किसी भी प्रकार की ‘छूट’ (Relaxation) का लाभ लेता है, तो उसे ‘जनरल स्टैंडर्ड’ पर चुना गया उम्मीदवार नहीं माना जा सकता।

इसका सबसे बड़ा असर कैडर आवंटन (Cadre Allocation) पर पड़ता है। ऐसे उम्मीदवार अपने होम स्टेट (गृह राज्य) में ‘जनरल इनसाइडर’ वैकेंसी पर एक सामान्य उम्मीदवार के तौर पर दावा नहीं कर पाएंगे। सरल शब्दों में, आरक्षण का लाभ लेने के बाद उम्मीदवार की दावेदारी केवल उसकी आरक्षित श्रेणी की सीटों तक ही सीमित हो जाती है।

कट-ऑफ में मिली छूट और चयन का गणित

यह पूरा मामला साल 2013 की भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा से शुरू हुआ। विवाद का मुख्य कारण प्रारंभिक परीक्षा के दौरान मिली कट-ऑफ की छूट थी। इस मामले के दो मुख्य पक्ष थे, जिनकी स्थिति नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझी जा सकती है:

परीक्षा के आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण:

विवरणसामान्य श्रेणी (General)आरक्षित श्रेणी (SC)उम्मीदवार का प्रदर्शन
निर्धारित कट-ऑफ267 अंक233 अंक
जी. किरण (SC)लाभ लिया247.18 अंक (छूट के साथ पास)
एंटनी एस. मारियप्पा (Gen)जनरल स्टैंडर्ड270.68 अंक (सामान्य योग्यता)

मेरिट बनाम नियम

भारतीय वन सेवा परीक्षा के अंतिम परिणामों में एक दिलचस्प मोड़ आया। अंतिम मेरिट लिस्ट में आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार जी. किरण ने 19वीं रैंक हासिल की, जो सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार एंटनी (37वीं रैंक) से काफी बेहतर थी। बावजूद इसके, जब गृह राज्य (कर्नाटक) में नियुक्ति की बात आई, तो मामला नियमों में फंस गया:

कैडर आवंटन का गणित और विवाद

  • उपलब्ध सीटें: कर्नाटक में उस समय केवल एक ‘जनरल इनसाइडर’ सीट खाली थी और अनुसूचित जाति (SC) के लिए कोई इनसाइडर वैकेंसी नहीं थी।
  • केंद्र सरकार का निर्णय: सरकार ने वह इकलौती जनरल सीट 37वीं रैंक वाले एंटनी को दे दी।
  • तर्क: चूंकि जी. किरण ने प्रीलिम्स में आरक्षण का लाभ लिया था, इसलिए उन्हें ‘जनरल इनसाइडर’ सीट के योग्य नहीं माना गया।
  • परिणाम: बेहतर रैंक होने के बाद भी जी. किरण को उनके गृह राज्य कर्नाटक के बजाय तमिलनाडु कैडर आवंटित कर दिया गया।

अंतिम परिणाम

उम्मीदवारफाइनल रैंकप्रारंभिक परीक्षा का आधारआवंटित कैडर
जी. किरण19आरक्षित (छूट के साथ)तमिलनाडु (Outsider)
एंटनी एस. मारियप्पा37सामान्य (बिना छूट के)कर्नाटक (Home Cadre)
Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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