
दिल्ली सरकार अपनी नई EV पॉलिसी में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है, जिससे अब पुरानी पेट्रोल और डीजल कारों को कबाड़ (स्क्रैप) में भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नए नियम के तहत आप अपनी पुरानी गाड़ी में इलेक्ट्रिक किट (Retrofitting) लगवाकर उसे EV बना सकेंगे।
सरकार इस प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए पहली 1,000 गाड़ियों पर ₹50,000 की सब्सिडी देने की योजना बना रही है। इस क्रांतिकारी कदम से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि लाखों वाहन मालिकों को अपनी पुरानी और पसंदीदा गाड़ियों को सड़कों पर फिर से चलाने का मौका मिलेगा।
FOLKS MOTOR और ARAI ने तैयार किया पुरानी कारों को EV बनाने का फॉर्मूला
दिल्ली में पुरानी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक अवतार देने के लिए FOLKS MOTOR और ARAI (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया) ने हाथ मिलाया है। इन दोनों संस्थाओं ने मिलकर एक ऐसी आधुनिक तकनीक विकसित की है, जिससे पेट्रोल-डीजल कारों को रेट्रोफिटिंग (बदलाव) के जरिए नया जीवन मिलेगा। इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके बाद आपकी पुरानी गाड़ी दो अलग-अलग तरीकों (मोड्स) से सड़क पर फर्राटा भर सकेगी। यह तकनीकी विकास न केवल सुरक्षित है, बल्कि इसे भारतीय सड़कों और मौसम की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
बिना इंजन हटाए पुरानी कार बनेगी हाईटेक EV
फोक्स मोटर्स के सीईओ निखिल आनंद खुराना ने बताया कि इस नई तकनीक में आपकी गाड़ी का इंजन और गियरबॉक्स हटाया नहीं जाएगा। इसमें बस एक स्पेशल मोटर, गियरबॉक्स इंटरफेस और एक जनरेटर जोड़ा जाएगा। इसके बाद आप अपनी कार को दो मोड में चला सकेंगे: हाइब्रिड मोड (इंजन और मोटर दोनों के साथ) और फुल इलेक्ट्रिक मोड (सिर्फ बैटरी पर)। खास बात यह है कि इसका ‘रिक्यूपरेटिव जनरेटर’ गाड़ी चलते समय होने वाले मैकेनिकल लॉस को बिजली में बदलकर बैटरी चार्ज करेगा। EV मोड में गाड़ी 50 से 100 किमी तक चल सकेगी और बैटरी बैंक को कार की डिक्की (बूट स्पेस) में सुरक्षित तरीके से फिट किया जाएगा।
दिल्ली EV पॉलिसी 2.0
दिल्ली सरकार की नई EV ड्राफ्ट पॉलिसी 2.0 ने इस रेट्रोफिटिंग तकनीक को आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया है, जिससे पुरानी कारों को इलेक्ट्रिक बनाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। सरकार का लक्ष्य इस योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखकर सीधे आम जनता तक पहुँचाना है। इस पॉलिसी के तहत रेट्रोफिटिंग को बढ़ावा देने के लिए विशेष दिशा-निर्देश और रियायतें शामिल की गई हैं। यह कदम न केवल पर्यावरण की सुरक्षा करेगा, बल्कि दिल्ली के लाखों वाहन मालिकों के लिए अपनी पुरानी गाड़ियों को दोबारा सड़क पर उतारने का एक किफायती और कानूनी विकल्प भी पेश करेगा।
सुरक्षा और बीमा की चिंता खत्म
- हाई-टेक सेंसर नेटवर्क: गाड़ी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इंजन से लेकर ब्रेक तक 10-12 विशेष सेंसर लगाए जाएंगे।
- रियल-टाइम मॉनिटरिंग: ये सेंसर गाड़ी में होने वाली किसी भी छोटी तकनीकी गड़बड़ी को तुरंत पहचान लेंगे, जिससे दुर्घटना का खतरा कम होगा।
- प्रमाणित तकनीक: इस रेट्रोफिटिंग तकनीक का 2012 में ही पेटेंट करा लिया गया था, जो इसकी मौलिकता को दर्शाता है।
- कठोर परीक्षण: इसे ARAI (Automotive Research Association of India) के साथ मिलकर कई सालों के शोध और कड़े सुरक्षा टेस्ट के बाद तैयार किया गया है।
- वारंटी की सुविधा: रेट्रोफिटिंग कराने के बाद कंपनी ग्राहकों को किट और तकनीक पर वारंटी भी देगी।
- कानूनी मान्यता: प्रक्रिया ARAI से अप्रूव्ड होने के कारण गाड़ी के बीमा (Insurance) क्लेम और फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू कराने में कोई समस्या नहीं आएगी।
कितना समय लगेगा रेट्रोफिटिंग में?
- सर्विसिंग जितना कम समय: इस पूरी तकनीकी प्रक्रिया में केवल 4 से 6 घंटे का समय लगेगा। यानी जितनी देर में आपकी कार की सामान्य सर्विसिंग होती है, उतनी ही देर में आपकी पुरानी पेट्रोल/डीजल कार एक आधुनिक EV में बदल जाएगी।
- सोनीपत में ‘EV ऑटो पार्क’: दिल्ली सरकार की मंजूरी मिलने के बाद फोक्स मोटर हरियाणा के सोनीपत में 4 एकड़ का विशाल ‘EV ऑटो पार्क’ (The Blue IP) विकसित कर रही है।
- बड़ा वेयरहाउस और सेंटर: इस ऑटो पार्क में एक विशाल वेयरहाउस होगा, जहाँ बड़े पैमाने पर गाड़ियों का कन्वर्जन (बदलाव) किया जाएगा और EV पार्ट्स का स्टॉक रखा जाएगा।
- आसान उपलब्धता: इस हब के बनने से आम लोगों को न केवल इलेक्ट्रिक किट्स आसानी से मिलेंगी, बल्कि कन्वर्जन के लिए लंबा इंतजार भी नहीं करना होगा।
रेट्रोफिटिंग का खर्च
अपनी पुरानी पेट्रोल या डीजल कार को इलेक्ट्रिक (EV) में बदलने का अनुमानित खर्च ₹2 लाख प्लस GST तय किया गया है। हालांकि, यह लागत किट के प्रकार और बैटरी की क्षमता के आधार पर बदल सकती है, और रेट्रोफिट किट पर लगने वाला अंतिम GST स्लैब केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
राहत की बात यह है कि दिल्ली सरकार अपनी नई पॉलिसी के तहत पहले 1,000 वाहनों के लिए ₹50,000 की भारी सब्सिडी देने की योजना बना रही है, जिससे आम आदमी के लिए यह बदलाव काफी सस्ता हो जाएगा। दिल्ली का यह सफल मॉडल भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बनेगा, जिससे पूरे देश में पुरानी गाड़ियों को कबाड़ होने से बचाकर उन्हें दोबारा सड़कों पर दौड़ने लायक बनाया जा सकेगा।
किन पुरानी गाड़ियों को मिल सकेगा नया जीवन?
पुरानी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक (EV) में बदलने की योजना कोई नई नहीं है; भारत सरकार ने 23 जून 2016 को ही इसे सशर्त मंजूरी दे दी थी। सरकार के नियमों के अनुसार, केवल उन्हीं वाहनों को रेट्रोफिट किया जा सकता है जो BS-II (BS-2) या उसके बाद के मॉडल हैं।
इसके अलावा वाहन का कुल वजन 3,500 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए और गाड़ी में पहले से कोई अन्य रेट्रोफिटिंग (जैसे सीएनजी किट) नहीं होनी चाहिए। दिल्ली सरकार की नई पॉलिसी केंद्र के इन्हीं कड़े मानकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सड़क पर दौड़ने वाली हर रेट्रोफिटेड इलेक्ट्रिक गाड़ी पूरी तरह सुरक्षित और वैध हो।









