
अगर आपकी सुबह की शुरुआत एक प्याली कड़क चाय के बिना अधूरी है, तो इसके लिए हमें असम का आभारी होना चाहिए। असम को भारत की ‘चाय राजधानी’ कहा जाता है, क्योंकि दुनिया की बेहतरीन और सबसे ज्यादा चाय यहीं के खूबसूरत बागानों में उगाई जाती है। यहाँ के मीलों दूर तक फैले हरे-भरे चाय के मैदान न केवल सैलानियों का मन मोह लेते हैं, बल्कि देशभर के करोड़ों लोगों की थकान मिटाने का जरिया भी हैं। एक चाय प्रेमी के लिए असम की सैर किसी जन्नत से कम नहीं है, जहाँ वह प्रकृति की गोद में बैठकर असली चाय का स्वाद ले सकता है।
असम की चाय का जादू
भारत में चाय की दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश में इस्तेमाल होने वाली कुल चाय का 50% से भी ज़्यादा हिस्सा अकेले असम पैदा करता है। 800 से अधिक विशाल बागानों वाले इस राज्य की मिट्टी और ब्रह्मपुत्र नदी का पानी चाय की खेती के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
यही कारण है कि यहाँ की चाय का स्वाद बेहद कड़क और खास ‘माल्टी’ (Malty) सुगंध वाला होता है। अपने इसी ज़बरदस्त स्वाद की वजह से असम की चाय को दूध वाली भारतीय चाय के लिए दुनिया में सबसे बेहतरीन माना जाता है।
अंग्रेजों की खोज से ‘मसाला चाय’ के जन्म तक
असम में चाय का इतिहास बहुत पुराना नहीं है; 1820 के दशक से पहले यहाँ व्यवस्थित तरीके से चाय नहीं उगाई जाती थी। ब्रिटिश शासन के दौरान जब यहाँ जंगली चाय के पौधों की पहचान हुई, तब जाकर बड़े पैमाने पर बागान लगाने का काम शुरू हुआ। शुरुआत में भारतीयों को चाय का कड़वा स्वाद कुछ खास पसंद नहीं आया, लेकिन जब इसमें दूध, चीनी और अदरक-इलायची जैसे पारंपरिक मसाले मिलाए गए, तो हमारी पसंदीदा ‘मसाला चाय’ का जन्म हुआ। आज यही देसी अंदाज़ और असम की कड़क पत्ती पूरी दुनिया में भारत की पहचान बन चुकी है।
जोरहाट
असम के जोरहाट को आधिकारिक तौर पर ‘दुनिया की चाय राजधानी’ माना जाता है। यहाँ की यात्रा आपको इतिहास के पन्नों में ले जाती है, जहाँ आप अंग्रेजों के जमाने के आलीशान और पुराने ‘टी बंगलों’ (Tea Bungalows) में ठहरने का शाही अनुभव ले सकते हैं।
इन बागानों में घूमते हुए आप न केवल प्रकृति की सुंदरता देख सकते हैं, बल्कि यह भी करीब से जान सकते हैं कि कैसे कुशल कारीगर चाय की कोमल पत्तियों को चुनते हैं और उन्हें कारखानों में सुखाकर बेहतरीन चाय तैयार की जाती है। यह जगह उन लोगों के लिए जन्नत है जो अपनी पसंदीदा चाय के बनने की पूरी कहानी को करीब से देखना चाहते हैं।
भारत की ‘चाय राजधानी’ और कड़क स्वाद का घर
असम को दुनिया की ‘चाय राजधानी’ कहा जाता है क्योंकि भारत की कुल चाय का 50% से अधिक उत्पादन अकेले इसी राज्य में होता है। 1820 के दशक में अंग्रेजों द्वारा खोजे गए यहाँ के 800 से अधिक बागान अपनी ‘माल्टी’ (Malty) और कड़क स्वाद वाली चाय के लिए प्रसिद्ध हैं, जो दूध वाली चाय के लिए दुनिया में सबसे अच्छी मानी जाती है।
यहाँ की ‘ऑर्थोडॉक्स टी’ पूरी दुनिया में एक्सपोर्ट की जाती है। पर्यटक यहाँ अंग्रेजों के जमाने के पुराने टी-बंगलों में रुककर चाय की पत्तियों को तोड़ने और सुखाने की पूरी प्रक्रिया को करीब से देख सकते हैं।
काजीरंगा
काजीरंगा न केवल अपने एक सींग वाले गैंडों (Rhino) के लिए विश्व प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ की यात्रा आपको प्रकृति के दो अलग और खूबसूरत रूपों से मिलाती है। यहाँ आप रोमांचक वन्यजीव सफारी का आनंद लेने के साथ-साथ पास ही स्थित लहलहाते चाय के बागानों की सुकून भरी सैर भी कर सकते हैं। वन्यजीव और चाय का यह अनोखा संगम काजीरंगा को पर्यटकों के लिए एक यादगार मंजिल बनाता है।
कहाँ से और कैसे खरीदें सबसे ताज़ा और असली चाय
असम की यात्रा चाय की खरीदारी के बिना अधूरी है। अगर आप असली और कड़क स्वाद घर ले जाना चाहते हैं, तो गुवाहाटी के ‘फैंसी बाजार’ और ‘पल्टन बाजार’ सबसे बेहतरीन ठिकाने हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि बंद पैकेट वाली चाय के बजाय खुली चाय खरीदना बेहतर होता है क्योंकि वह अधिक ताज़ा और सुगंधित होती है। कीमत की बात करें तो एक किलो अच्छी क्वालिटी वाली चाय आपको ₹300 से ₹600 के बीच आसानी से मिल जाएगी, वहीं अगर आप सबसे बेहतरीन प्रीमियम या ऑर्थोडॉक्स चाय के शौकीन हैं, तो इसकी कीमत ₹1500 प्रति किलो तक भी जा सकती है।









