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Bhutan Security: भूटान की सुरक्षा में क्यों तैनात रहती है भारतीय सेना? जानें इस देश से जुड़ी सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती

भारत-भूटान सीमा पर INDian Army की तैनाती क्यों? 699 किमी बॉर्डर, 1949 संधि से सुरक्षा गारंटी। चीन का 499 किमी खतरा, डोकलाम विवाद में हमने सड़क रोकी। सिलिगुड़ी चिकन नेक की रक्षा! भूटान के पास नेवी-एयरफोर्स नहीं, हमारी आर्मी ढाल बनी। मजबूत दोस्ती!

By Pinki Negi

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भूटान को देखकर लगता है ना कि ये हिमालय का छोटा सा राजा है, लेकिन इसके पीछे भारत का मजबूत कंधा हमेशा खड़ा रहता है। भारत दुनिया के 7 देशों से सटा हुआ है, और भूटान उनमें से एक खास दोस्त। पूर्वोत्तर में बसा ये देश असम, सिक्किम, अरुणाचल और पश्चिम बंगाल से लगा है – कुल 699 किमी की सीमा। हमारे रिश्ते इतने गहरे हैं कि इंडियन आर्मी वहां तैनात रहती है। आखिर क्यों? चलो खोलते हैं इस राज को।

भूटान की सुरक्षा में क्यों INDian Army?

भूटान के पास अपनी वायुसेना या नौसेना जैसी ताकतवर ताकत नहीं है, इसलिए वो भारत पर भरोसा करता है। वैश्विक खेल में ये छोटा देश भारत के लिए रणनीतिक सोने का खजाना है। 1949 की संधि से हमने वादा किया – एक-दूसरे की संप्रभुता और सुरक्षा का ख्याल रखेंगे। इसी के तहत आज भी हमारी आर्मी भूटान की ढाल बनी हुई है। सोचो, दोस्ती का ये लेवल!

चीन से सबसे बड़ा खतरा, डोकलाम का खेल

जैसे हमारे लिए पाकिस्तान, वैसे भूटान के लिए चीन – 499 किमी लंबी सीमा पर तनाव हमेशा बना रहता है। डोकलाम विवाद तो इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। वहां चीन ने सड़क बनाने की कोशिश की, लेकिन हमारी आर्मी ने 2017 में उसे रोक दिया। भूटान कहता है वो इलाका उनका है, चीन दावा करता है अपना। ये लड़ाई सीधी भारत से जुड़ जाती है।

सिलिगुड़ी कॉरिडोर की रक्षा

डोकलाम भारत के लिए जान का फर्क है। वो सिलिगुड़ी कॉरिडोर को जोड़ता है, जिसे चिकन नेक कहते हैं। अगर चीन ने कब्जा कर लिया तो नॉर्थ-ईस्ट अलग-थलग पड़ जाएगा। लाखों लोग, पूरा इलाका खतरे में। इसलिए इंडियन आर्मी की मौजूदगी भूटान में जरूरी है – ये सिर्फ उनकी नहीं, हमारी भी सुरक्षा है। गलत हाथों में पड़ गया तो बड़ा नुकसान!

1949 संधि से मजबूत दोस्ती की नींव

1949 में हुई संधि ने सब सेट किया। हम दोनों देश एक-दूसरे की पीठ थपथपाते हैं। भूटान की आर्मी को ट्रेनिंग हम देते हैं, जॉइंट एक्सरसाइज करते हैं। 2007 में संधि अपडेट हुई, लेकिन सुरक्षा का वादा वही मजबूत। आज भी हाई लेवल मीटिंग्स होती रहती हैं। ये रिश्ता खून-पसीने से नहीं, विश्वास से जुड़ा है।

भूटान-भारत हिमालय के दो भाई

भूटान छोटा लगता है, लेकिन इसका महत्व कम नहीं। हमारे पूर्वोत्तर की चेन को मजबूत रखता है। चीन की घुसपैठ रोकने में ये बफर जोन है। दलाई लामा का मुद्दा हो या बॉर्डर पेट्रोलिंग, सबमें हम साथ। भूटान के राजा हमसे सलाह लेते हैं। ये दोस्ती ना सिर्फ सीमा की, दिल की भी है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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