
वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू ने साल 2026 के लिए दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों की नई लिस्ट जारी की है, जिसमें अमेरिका एक बार फिर शीर्ष पर है, जबकि रूस और चीन दूसरे और तीसरे स्थान पर काबिज हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और चौथी सबसे ताकतवर सैन्य शक्ति होने के बावजूद भारत इस लिस्ट में 10वें स्थान के भीतर जगह नहीं बना पाया है। सबसे अधिक आबादी वाला देश होने और वैश्विक स्तर पर मजबूत पकड़ रखने के बाद भी भारत को इस रैंकिंग में 12वें स्थान पर रखा गया है, जो काफी चौंकाने वाला है।
कैसे तय होती है देशों की ताकत?
वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू ने दुनिया के देशों की रैंकिंग केवल सेना के दम पर नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण पहलुओं को परख कर तैयार की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, किसी देश की शक्ति उसकी आर्थिक क्षमता, सैन्य संसाधन, तकनीकी प्रगति और शासन की स्थिरता पर निर्भर करती है। देशों को मुख्य रूप से पाँच विशेषताओं—सैन्य और अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन, राजनीतिक एवं आर्थिक प्रभाव, और वैश्विक नेतृत्व—के आधार पर परखा गया है। जो देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय रहते हैं और इन सभी क्षेत्रों में लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हैं, उन्हें ही इस लिस्ट में उच्च स्थान और वैश्विक प्रतिष्ठा दी गई है।
दुनिया के 10 सबसे पावरफुल देशों की लिस्ट
- संयुक्त राज्य अमेरिका
- चीन
- रूस
- यूनाइटेड किंगडम
- जर्मनी
- दक्षिण कोरिया
- फ्रांस
- जापान
- सऊदी अरब
- इजराइल
क्या केवल सेना से तय होती है देश की ताकत?
वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों की पहचान करना एक बेहद पेचीदा काम है, क्योंकि ताकत का पैमाना केवल बंदूकों या मिसाइलों तक सीमित नहीं है। एक असली ‘सुपरपावर’ वह है जिसके पास मजबूत सेना के साथ-साथ ठोस आर्थिक आधार, गहरा राजनीतिक प्रभाव और दुनिया भर में फैली सांस्कृतिक पहचान हो। रिपोर्ट बताती है कि सबसे ताकतवर देशों का एक वैश्विक आर्थिक पैटर्न होता है और उनकी विदेश नीतियां इतनी प्रभावशाली होती हैं कि उनका असर पूरी दुनिया की व्यवस्था पर महसूस किया जाता है।
दुनिया की राय से तय होती है देशों की रैंकिंग
शक्तिशाली देशों की यह रैंकिंग केवल सरकारी आंकड़ों पर आधारित नहीं होती, बल्कि इसमें U.S. News and World Report के साथ BAV Group और व्हार्टन स्कूल की विशेषज्ञता भी शामिल है। इसे तैयार करने के लिए दुनिया भर के हज़ारों लोगों, व्यापारिक नेताओं और बुद्धिजीवियों के बीच एक व्यापक सर्वे किया जाता है। इस सर्वे में लोगों से अलग-अलग देशों के आर्थिक प्रभाव, अंतरराष्ट्रीय गठबंधन और राजनीतिक शक्ति जैसे खास बिंदुओं पर उनकी राय मांगी जाती है। जनता की इसी धारणा (Perception) और वास्तविक डेटा को मिलाकर यह तय किया जाता है कि वैश्विक पटल पर किस देश की प्रतिष्ठा और प्रभाव सबसे अधिक है।









