
जनगणना के दौरान हर नागरिक की यह जिम्मेदारी है कि वह अधिकारियों द्वारा पूछे गए सभी सवालों का बिल्कुल सही जवाब दे। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या जवाब देने से इनकार करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इसके साथ ही जनगणना के लिए घरों पर लगाए गए नंबरों या निशानों को मिटाना या नुकसान पहुँचाना भी अपराध की श्रेणी में आता है। यह नियम केवल जनता के लिए ही नहीं, बल्कि जनगणना स्टाफ पर भी लागू होते हैं; यदि कोई कर्मचारी गलत डेटा भरता है या अनुचित सवाल पूछता है, तो उसे भी सख्त कानूनी सजा का सामना करना होगा।
जनगणना 2026 की तैयारी
भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय ने जनगणना अधिनियम 1948 और संशोधित नियमों के तहत नई अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही इस साल से जनगणना के पहले चरण की शुरुआत होने जा रही है, जिसकी तैयारियां देशभर में जोर-शोर से चल रही हैं।
इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जनगणना स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और उन्हें नियमों व नई प्रश्नावली से अवगत कराया जाएगा। जल्द ही प्रश्नावली की आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी जाएगी, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस बार नागरिकों से कौन-कौन सी जानकारियाँ माँगी जाएंगी।
जनगणना के नियम
जनगणना प्रक्रिया के दौरान नागरिकों को सवालों के जवाब देना अनिवार्य है, लेकिन इसमें महिलाओं की निजता का विशेष ध्यान रखा गया है। नियमों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को अपने परिवार की महिला सदस्य का नाम बताने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
इसी तरह, कोई भी महिला अपने पति या दिवंगत पति का नाम बताने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं होगी। दूसरी ओर, जनगणना को सुचारू रूप से चलाने के लिए घर के मालिकों को जनगणना अधिकारियों को परिसर में प्रवेश देने और वहां जरूरी निशान या नंबर लगाने की अनुमति देना अनिवार्य होगा, ताकि डेटा जुटाने की प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
न कोई देख सकेगा रिकॉर्ड, न ही जबरन कर सकेगा प्रवेश
जनगणना की प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है, जिसके तहत किसी भी आम नागरिक को जनगणना अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए रजिस्टर या रिकॉर्ड की जांच करने की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई व्यक्ति जनगणना कार्यालय में बिना अनुमति के जबरन प्रवेश करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह जिम्मेदारी जनगणना स्टाफ पर भी समान रूप से लागू होती है; यदि कोई कर्मचारी दस्तावेजों को छिपाता है, उन्हें नष्ट करता है या डेटा में हेरफेर करने की कोशिश करता है, तो उसे सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा। इन कड़े नियमों का उद्देश्य जनगणना के परिणामों को पूरी तरह सटीक और सुरक्षित बनाए रखना है।









