
उत्तर प्रदेश सरकार ने कन्या भ्रूण हत्या जैसे गंभीर अपराध को रोकने के लिए ‘मुखबिर योजना’ के तहत 2 लाख रुपये तक के इनाम की घोषणा की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन लोगों या क्लीनिकों का पर्दाफाश करना है जो अवैध रूप से लिंग जांच और भ्रूण हत्या में शामिल हैं। इसके लिए सरकार द्वारा गठित विशेष टीमें छापेमारी करेंगी और जो भी व्यक्ति ऐसे अपराधियों को पकड़वाने में सटीक जानकारी देकर मदद करेगा, उसे सरकार द्वारा प्रोत्साहित और पुरस्कृत किया जाएगा।
कैसे काम करती है मुखबिर टीम?
भ्रूण हत्या के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सरकार एक विशेष तीन सदस्यीय टीम का गठन करती है। इस टीम में एक मुख्य मुखबिर (इनफॉर्मर) के साथ दो अन्य लोग शामिल होते हैं, जिनमें से एक गर्भवती महिला होती है जो डिकॉय ऑपरेशन (फर्जी ग्राहक) के रूप में मदद करती है। टीम के तीसरे सदस्य के रूप में एक सरकारी सहायक की नियुक्ति की जाती है। यह पूरी टीम मिलकर उन केंद्रों का पता लगाती है जहाँ गैर-कानूनी तरीके से लिंग जांच की जा रही है, ताकि दोषियों को रंगे हाथों पकड़ा जा सके।
स्टिंग ऑपरेशन से पकड़वाएं अपराधी
अगर आप मुखबिर योजना के जरिए समाज सेवा करना चाहते हैं और सरकार से इनाम पाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको अपने जिले के स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करना होगा। इस योजना का हिस्सा बनने के बाद, आपका मुख्य काम उन लोगों या क्लीनिकों का स्टिंग ऑपरेशन करना होगा जो अवैध रूप से भ्रूण हत्या या लिंग जांच में शामिल हैं। ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल किए गए पैसों को सबूत के तौर पर स्वास्थ्य केंद्र में जमा करना होता है, जिसे बाद में पुलिस जब्त कर आरोपियों के खिलाफ पुख्ता कार्रवाई करती है और उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार करती है।
मुखबिर, महिला और सहायिका के बीच कैसे बंटते हैं ₹2 लाख?
दोषियों के पकड़े जाने के बाद सरकार की ओर से टीम के सदस्यों को कुल 2 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाती है। यह इनाम प्रत्येक सफल केस के आधार पर वितरित किया जाता है, जिसमें सटीक सूचना देने वाले मुखबिर को 60 हजार रुपये, ऑपरेशन में सहयोग करने वाली गर्भवती महिला को 1 लाख रुपये और टीम की सहायिका को 40 हजार रुपये दिए जाते हैं। यह आर्थिक प्रोत्साहन न केवल भ्रूण हत्या रोकने में मदद करता है, बल्कि सामाजिक बुराई के खिलाफ लड़ने वालों का मनोबल भी बढ़ाता है।
मुखबिर योजना के तहत पैसों के भुगतान का पूरा शेड्यूल
मुखबिर योजना के तहत इनाम की 2 लाख रुपये की राशि एक साथ नहीं, बल्कि चरणों में दी जाती है। जैसे ही आरोपियों को पकड़ा जाता है, पहले चरण में गर्भवती महिला को 30 हजार, मुखबिर को 20 हजार और सहायिका को 10 हजार रुपये मिलते हैं। इसके बाद की किस्तें अदालती कार्यवाही के दौरान दी जाती हैं। दूसरी और तीसरी किस्त तब मिलती है जब मामला कोर्ट में पेश होता है, और अंतिम भुगतान केस के अंतिम फैसले के बाद किया जाता है, ताकि टीम के सदस्य गवाही और कानूनी प्रक्रिया में सक्रिय रहें।









