
हर महीने बिजली का बिल हमें बताता है कि हमने कितनी यूनिट खर्च की हैं, लेकिन कभी-कभी कम खपत के बावजूद बिल हजारों में आ जाता है। ऐसे में कई लोग इसे अपनी गलती मानकर चुपचाप बिल भर देते हैं, जबकि असल में यह बिजली मीटर या सॉफ्टवेयर की तकनीकी खराबी हो सकती है।
अगर आपके घर का बिल अचानक उम्मीद से बहुत ज्यादा आने लगे, तो परेशान होने के बजाय इसकी शिकायत करना जरूरी है। आप विभाग में मीटर चेक करने या बिल सुधारने के लिए आवेदन कर सकते हैं। बिजली उपभोक्ताओं को यह अधिकार है कि वे गलत बिल को चुनौती दें और सुधार करवाएं।
क्यों आता है जरूरत से ज्यादा बिजली बिल?
अक्सर बिजली बिल में गड़बड़ी की सबसे बड़ी वजह मीटर रीडिंग में होने वाली मानवीय चूक होती है। कई बार मीटर रीडर गलत यूनिट दर्ज कर देता है या फिर ऑफिस में बैठे-बैठे केवल ‘अनुमान’ के आधार पर बिल बना दिया जाता है। इसके अलावा, अगर आपका मीटर पुराना या खराब है, तो वह भी तेज भाग सकता है जिससे खपत ज्यादा दिखने लगती है।
कभी-कभी बिल में पुराने बकाया पैसे (Arrears) जुड़कर आ जाते हैं या ऑनलाइन सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण स्लैब रेट गलत लग जाता है। इसलिए, शिकायत करने से पहले अपने पुराने बिलों की तुलना वर्तमान बिल से करें और खुद मीटर की करंट रीडिंग जरूर चेक करें ताकि आपको गड़बड़ी का सही पता चल सके।
ऑनलाइन और ऑफलाइन शिकायत दर्ज करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका
अगर आपका बिजली बिल गलत आ गया है, तो इसे ठीक करवाना बहुत आसान है। सबसे तेज तरीका है बिजली कंपनी की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जाकर ‘ऑनलाइन कंप्लेंट’ दर्ज करना। वहां आपको अपना कंज्यूमर नंबर, वर्तमान मीटर रीडिंग और बिल नंबर जैसी जानकारी देनी होगी।
अगर ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध न हो, तो आप अपने नजदीकी बिजली कार्यालय (सब-डिवीजन) जाकर एक लिखित आवेदन दे सकते हैं। आजकल कई राज्यों में टोल-फ्री नंबर और व्हाट्सऐप के जरिए भी शिकायतें ली जाती हैं। शिकायत दर्ज करने के बाद अपना कंप्लेंट नंबर जरूर लें, ताकि आप जान सकें कि आपके बिल पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
कैसे वापस मिलता है बिजली बिल का ज्यादा पैसा
एक बार जब आप गलत बिल की शिकायत दर्ज कर देते हैं, तो बिजली विभाग आपके मीटर और पुराने बिलों की गहन जांच करता है। यदि समस्या मीटर में लगती है, तो विभाग दोबारा रीडिंग लेता है या मीटर को लैब में टेस्टिंग के लिए भेजता है। जांच में गलती साबित होने पर विभाग नया और सही बिल जारी करता है। सबसे राहत की बात यह है कि यदि आपने अनजाने में पहले ही ज्यादा बिल का भुगतान कर दिया है, तो वह पैसा डूबता नहीं है; विभाग उस अतिरिक्त राशि को आपके अगले महीनों के बिलों में एडजस्ट (समायोजित) कर देता है। इस प्रक्रिया से उपभोक्ता को आर्थिक नुकसान से सुरक्षा मिलती है।









