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भारत में एक नहीं, बल्कि 2 जयपुर हैं! राजस्थान के अलावा दूसरा ‘पिंक सिटी’ कहाँ है? नाम जानकर रह जाएंगे दंग

राजस्थान का जयपुर 'पिंक सिटी' के नाम से विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन ओडिशा के कोरापुट में दूसरा जयपुर (जेरपोरे) आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का खजाना है। दोनों की अलग कहानियां - एक शाही वैभव, दूसरा ट्राइबल हेरिटेज। 'ट्विन सिटी टूर' का नया दौर शुरू हो सकता है!

By Pinki Negi

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राजस्थान की राजधानी जयपुर अपनी गुलाबी इमारतों, भव्य किलों और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की पहचान के लिए दुनिया भर में मशहूर है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में सिर्फ एक नहीं, बल्कि दो जयपुर हैं? राजस्थान के अलावा ओडिशा के कोरापुट जिले में भी एक जयपुर बसा है, जिसे ऐतिहासिक रूप से जेरपोरे (Jeypore) के नाम से जाना जाता है।

यह तथ्य सामान्य ज्ञान के सवालों से लेकर सोशल मीडिया पोस्ट तक चर्चा का विषय बना हुआ है। हमारी गहन पड़ताल में सामने आया कि दोनों शहरों की अपनी-अपनी अनोखी कहानी और सांस्कृतिक विरासत है।

राजस्थान का प्रसिद्ध जयपुर

जयपुर का नाम सुनते ही राजस्थान का चित्र उभरता है- हवा महल, आमेर किला, जंतर मंतर और गुलाबी गलियां। इस शहर की स्थापना 18 नवंबर 1727 को कछवाहा राजपूत शासक महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने की थी। आमेर से स्थानांतरित होकर बने इस शहर को 1876 में प्रिंस ऑफ वेल्स के स्वागत के लिए महाराजा राम सिंह ने गुलाबी रंग से रंगा, जो आज ‘पिंक सिटी’ की पहचान है। 2019 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। पर्यटकों की भारी भीड़, ज्वेलरी मार्केट और राजपूताना वैभव इसे भारत का एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बनाते हैं। लेकिन लोकप्रिय धारणा के उलट, यह एकमात्र जयपुर नहीं।

ओडिशा का दूसरा जयपुर

ओडिशा का जयपुर (जेरपोरे) पूर्वी घाट की पहाड़ियों में बसा एक छोटा लेकिन समृद्ध शहर है। कोरापुट जिले का यह हिस्सा ब्रिटिश काल में जेपुर रियासत की राजधानी था। 19वीं सदी तक यह एक स्वतंत्र रियासत के रूप में फली-फूली, जब रामचंद्र देव और नीलमाधव देव जैसे राजाओं ने शासन किया। स्वतंत्रता के बाद यह ओडिशा में विलय हो गया।

यहां की खासियत आदिवासी संस्कृति है – बोंडा, डांगरीया कोंधा जैसे जनजातियां रंग-बिरंगे परिधानों और उत्सवों के लिए प्रसिद्ध हैं। हर साल नव रात्रि में होने वाला ‘जेरपोरे पर्व’ हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। प्राकृतिक सौंदर्य के मामले में यह दूधसागर झरने, तादिम्बा गुफाओं और घने जंगलों से घिरा है।

दोनों जयपुरों की तुलना

दोनों जयपुरों में समानता नाम की है, लेकिन व्यक्तित्व बिलकुल अलग। राजस्थान का जयपुर शाही वैभव, संगमरमर महल और रेगिस्तानी संस्कृति का प्रतीक है, जबकि ओडिशा का जयपुर आदिवासी जीवनशैली, जैव विविधता और पूर्वी भारत की लोक परंपराओं का केंद्र। पहले का क्षेत्रफल 484 वर्ग किमी है, जनसंख्या 40 लाख से अधिक, वहीं दूसरे का महज 249 वर्ग किमी में 80 हजार से कम लोग बसते हैं। राजस्थान वाला वैश्विक पर्यटन हब है, ओडिशा वाला इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक उत्सवों के लिए जाना जाता।

ऐतिहासिक संयोग और भ्रम

यह दोहरा नामकरण ऐतिहासिक संयोग का नतीजा लगता है। ओडिशा के जेरपोरे का नाम संभवतः जयपुर राज्य के संस्थापक से प्रेरित हो। लेकिन भ्रम की स्थिति बनी रहती है – स्कूलों के जीके सवालों से लेकर वायरल पोस्ट तक लोग हैरान होते हैं। पर्यटन विभाग को ऐसे अनोखे तथ्यों को प्रमोट करना चाहिए। ओडिशा टूरिज्म पहले से ही ‘ट्राइबल टूरिज्म’ को बढ़ावा दे रहा है, जबकि राजस्थान का जयपुर करोड़ों सैलानियों का स्वागत करता रहता।

पर्यटन के नए आयाम

क्या ये दो जयपुर एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं? क्यों न एक ‘ट्विन सिटी टूर’ पैकेज बने? ओडिशा सरकार ने हाल ही में कोरापुट को हेरिटेज सर्किट में शामिल किया है। आने वाले समय में यह दूसरा जयपुर भी नई ऊंचाइयों को छू सकता है। कुल मिलाकर, भारत की विविधता इन नामों में झलकती है – एक गुलाबी शाही नगरी, दूसरा हरा-भरा आदिवासी गढ़। अगली बार ‘जयपुर घूमने’ का प्लान बनाएं, तो राज्य जरूर चेक करें!

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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