
केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारी और पेंशनभोगी अब अपने वेतन ढांचे को लेकर एक नए मोड़ पर खड़े हैं, जहां 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के चलते न्यूनतम बेसिक सैलरी, फिटमेंट फैक्टर, भत्तों और सेवा शर्तों में लगभग दशक का सबसे बड़ा बदलाव हो सकने की संभावना तैयार हो रही है। वर्तमान में यह सब अभी सिफारिशों, मांगों और अनुमानों के दायरे में है, मगर अगर इनमें से कुछ बड़ी मांगें मानी जाती हैं तो आने वाले वर्षों में ग्राउंड पर चर्चा, उम्मीदें और टैक्स बुझाने के गणित बदल जाएंगे।
अभी तक जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार 8वें वेतन आयोग की टीम ने अपनी रिपोर्ट का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और 30 अप्रैल 2026 की समयसीमा के अंदर अंतिम सिफारिशें सरकार को सौंपने वाली है। इस रिपोर्ट पर बाद में कैबिनेट और संसद की मंजूरी लगेगी; यानी अभी तय नहीं है कि कितना इजाफा और किस ढांचे में लागू होगा। फिर भी मीडिया और विश्लेषकों ने न्यूनतम बेसिक से लेकर HRA और भत्तों की संभावित रेंज तक की भविष्यवाणी शुरू कर दी है।
न्यूनतम बेसिक ₹18,000 से कहां तक जा सकता है?
7वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 महीने तय है, जो लेवल‑1 के दर्जे में आता है। इसी आधार पर वेतन पे‑मैट्रिक्स ऊपर बढ़ता है। अब अलग‑अलग कर्मचारी संगठनों ने नया टार्गेट बना दिया है। प्रगतिशील शिक्षक न्याय मंच (PSNM) ने लेवल‑1 के लिए न्यूनतम बेसिक को ₹50,000 से ₹60,000 तक बढ़ाने की मांग रखी है, जबकि कुछ अन्य यूनियन और स्टेकहोल्डर इसे और ऊपर, यानी ₹69,000 या ₹72,000 तक ले जाने की बात कर रहे हैं।
दरअसल, नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC‑JCM) के स्टाफ साइड ने एक 51‑पेज लंबा मेमोरेंडम आयोग के सामने रखा है, जिसमें फिटमेंट फैक्टर 3.83 तक बढ़ाने की मांग की गई है। अगर इस फैक्टर को माना जाता है, तो ₹18,000 की बेसिक के हिसाब से न्यूनतम नया बेसिक लगभग ₹69,000 के आसपास पहुंच सकता है, जबकि भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) जैसे संगठन ने और ज़्यादा आक्रामक होकर फिटमेंट फैक्टर 4 और न्यूनतम बेसिक ₹72,000 रखने की मांग की है। इस तरह “₹18,000 से सीधे ₹72,000” वाली बात अभी मांग और अनुमान है, न कि आधिकारिक घोषणा।
फिटमेंट फैक्टर, AR और DA में क्या बदलाव की उम्मीद?
फिटमेंट फैक्टर ही वह गुणक है जो पुरानी बेसिक पर लगाकर नई बेसिक निकालता है। 7वें वेतन आयोग के दौरान यह गुणक लगभग 2.57 के आसपास था, जबकि अब कई संगठनों का दावा है कि उन्हें कम से कम 2.6–2.9 तक मिलना चाहिए, और कुछ तो 3.5–3.8 के बीच भी बात कर रहे हैं। इसके अलावा, अनुरक्षण दर (AR) और सालाना इंक्रीमेंट को भी बढ़ाने की मांग उठ रही है। PSNM ने सालाना इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 6–7% करने की सिफारिश दी है, ताकि लंबे समय में वेतन में वास्तविक बढ़ोतरी दिखे।
डीए (महंगाई भत्ता) भी इस चर्चा का बड़ा हिस्सा है। अभी DA लगभग 50% के आसपास है, जिससे कर्मचारियों की कुल आय में बहुत बड़ा हिस्सा भत्ते‑रूप में आता है। PSNM और कई दूसरे संगठन उसे 50% पर बेसिक में मर्ज करने की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस भत्ते में आने वाली बढ़ोतरी वेतन‑आधारित भत्तों पर भी सीधा असर डाले। इससे HRA, TA और अन्य न्यूनतम‑आधारित भत्ते स्वतः बढ़ जाएंगे।
HRA, TA और अन्य भत्तों पर बड़े बदलाव की तैयारी
भत्तों के मोर्चे पर सबसे ज़्यादा चर्चा HRA (मकान किराया भत्ता) को लेकर हो रही है। वर्तमान में X, Y और Z कैटेगरी शहरों के लिए HRA दरें क्रमशः 27%, 18% और 9% हैं, जो पहले 24‑16‑8 के रेंज में थीं। अब कई संगठनों की मांग है कि इन्हें फिर से बढ़ाकर 18‑24‑36% या इससे भी ऊपर ले जाया जाए, ताकि तेज़ी से बढ़ती महंगाई और घरेलू खर्चों के बावजूद कर्मचारियों की वास्तविक खरीद शक्ति न घटे। अगर बेसिक ही ₹72,000 जैसे लेवल पर चली जाती है, तो HRA की दर वही रहे या थोड़ी बढ़े, दोनों ही स्थितियों में राशि काफी बढ़ जाएगी।
इसके अलावा, ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) को न्यूनतम ₹9,000 तक बढ़ाने, बच्चों की शिक्षा भत्ता को ₹7,000 प्रति माह प्रति बच्चे करने और उसके साथ‑साथ ₹2,000 प्रति माह का डिजिटल सपोर्ट अलाउंस देने की भी मांग की गई है। इन भत्तों का लक्ष्य यह है कि कर्मचारियों को न सिर्फ बेसिक में बढ़ोतरी मिले, बल्कि उनकी दैनिक जीवन‑लागत और बच्चों की शिक्षा जैसे बड़े खर्चों पर भी सीधा राहत मिल सके।
पेंशन, ग्रेच्युटी और रिटायरमेंट सुविधाओं की नई मांगें
8वें वेतन आयोग के दायरे में सिर्फ कर्मचारियों की नौकरजीवन तक ही नहीं, बल्कि उनके रिटायरमेंट के बाद की गारंटी भी शामिल है। कई संगठनों की मांग है कि रिटायरमेंट पर लीव एनकैशमेंट की सीमा 300 दिन से बढ़ाकर 400 दिन कर दी जाए, ताकि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को बड़ी रकम मिल सके। साथ ही, ग्रेच्युटी की ऊपरी सीमा ₹20 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख तक करने की बात उठ रही है, जिससे बड़े और लंबे अनुभव वाले अधिकारियों को रिटायरमेंट के समय बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिल सके।






