
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन के बीच हाल ही में हुए 20 बिलियन AED (लगभग 2 बिलियन बहरीनी दीनार) के करेंसी स्वैप समझौते ने खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई दी है। यह पांच साल की अवधि वाला ऐतिहासिक समझौता UAE सेंट्रल बैंक के गवर्नर खालिद मोहम्मद बलामा और बहरीन सेंट्रल बैंक के गवर्नर खालिद हुमैदान ने वर्चुअल समारोह में हस्ताक्षरित किया।
विशेषज्ञ इसे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा देने वाला बड़ा कदम बता रहे हैं। स्थानीय मुद्रा के उपयोग को प्रोत्साहन देकर डॉलर पर निर्भरता कम करना इसका मुख्य उद्देश्य है, जो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में खासतौर पर महत्वपूर्ण है।
करेंसी स्वैप की मूल परिभाषा और उद्देश्य
करेंसी स्वैप मूल रूप से दो देशों या केंद्रीय बैंकों के बीच एक वित्तीय समझौता है, जिसमें वे एक निश्चित विनिमय दर पर अपनी मुद्राओं का आदान-प्रदान करते हैं। यह तय अवधि के लिए होता है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे को ब्याज भुगतान करते हैं और अंत में मूल राशि वापस एक्सचेंज कर ली जाती है।
साधारण शब्दों में समझें तो यह विदेश यात्रा से पहले एयरपोर्ट पर करेंसी बदलने जैसा है, लेकिन बड़े पैमाने पर सरकारें और केंद्रीय बैंक इसे विदेशी मुद्रा संकट से निपटने, बाजार दरों से सस्ती फंडिंग सुनिश्चित करने और मुद्रा जोखिम से बचाव के लिए इस्तेमाल करते हैं। UAE-बहरीन डील में UAE अपने दिरहम (AED) देगा और बदले में बहरीन अपने दीनार (BHD) लेगा, जिससे दोनों देशों के वित्तीय सिस्टम मजबूत होंगे।
स्वैप समझौते की कार्यप्रणाली
इस समझौते का कार्यप्रणाली सरल लेकिन प्रभावी है। शुरुआत में दोनों पक्ष तय दर पर मुद्राएं स्वैप करते हैं। उसके बाद निर्धारित समय तक वे एक-दूसरे की मुद्रा पर ब्याज चुकाते हैं, जो पहले से तय ब्याज दरों पर आधारित होता है। अंत में, मूल राशि वापस लौटा दी जाती है। इससे एक्सचेंज रेट के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता, जो वैश्विक बाजारों की अस्थिरता में बड़ा लाभ है।
अधिकारियों के अनुसार, यह डील व्यापार को आसान बनाएगी, क्योंकि बहरीन UAE के साथ अपने बढ़ते व्यापार (2025 में 50 बिलियन AED से अधिक) के लिए स्थानीय मुद्रा पर निर्भर हो सकेगा। साथ ही, यह वित्तीय स्थिरता बढ़ाकर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करेगी।
देश करेंसी स्वैप क्यों अपनाते हैं?
देश करेंसी स्वैप क्यों करते हैं? इसका प्रमुख कारण विदेशी मुद्रा जोखिम को कम करना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से डॉलर या अन्य हार्ड करेंसी उधार लेना महंगा पड़ता है, जहां ब्याज दरें 8-10 प्रतिशत तक पहुंच सकती हैं। स्वैप से सस्ती दरों पर फंडिंग मिलती है, जो करोड़ों-अरबों डॉलर की बचत करता है। इसके अलावा, यह बिजनेस को सुगम बनाता है, आर्थिक संबंध मजबूत करता है और मुद्रा भंडार को स्थिर रखता है।
भारत-श्रीलंका का उदाहरण लें तो 2022 के आर्थिक संकट में भारत ने RBI के जरिए श्रीलंका को 400 मिलियन डॉलर (करीब 3,300 करोड़ रुपये) की स्वैप सुविधा दी। इससे श्रीलंका ने महंगे बाजार उधार से बचा और अपना विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत किया। भारत को भी बदले में श्रीलंकाई रुपये मिले, जिससे रुपये पर सट्टा दबाव कम हुआ। कुल मिलाकर, यह डील श्रीलंका को त्वरित राहत दे सकी, बिना IMF जैसे सशर्त लोन के बोझ के।
कंपनियों और बैंकों के लिए प्रमुख फायदे
कंपनियों और बैंकों के लिए स्वैप के फायदे और भी स्पष्ट हैं। सबसे बड़ा लाभ हेजिंग है, यानी मुद्रा उतार-चढ़ाव से बचाव। उदाहरणस्वरूप, कोई भारतीय कंपनी श्रीलंका में व्यापार कर रही हो तो स्वैप से उसे सस्ते रुपये मिल सकते हैं। कम लागत पर लोन मिलना दूसरा फायदा है, क्योंकि स्वैप दरें बाजार से सस्ती होती हैं। विदेशी बाजारों तक पहुंच आसान हो जाती है, बिना विदेशी बैंकों पर निर्भर हुए।
साथ ही, फाइनेंशियल मैनेजमेंट बेहतर होता है, जहां एसेट और लायबिलिटी बैलेंस रहती हैं। UAE-बहरीन डील से बहरीनी कंपनियां UAE में निवेश आसानी से कर सकेंगी, खासकर एनर्जी, रियल एस्टेट और फिनटेक क्षेत्रों में।
स्वैप के संभावित जोखिम
हालांकि, हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। स्वैप में काउंटरपार्टी जोखिम प्रमुख है, यानी अगर दूसरा पक्ष भुगतान न करे तो नुकसान हो सकता है। एक्सचेंज रेट या ब्याज दरों में अप्रत्याशित बदलाव भी चुनौती पैदा कर सकते हैं, हालांकि तय दरें इसे कम करती हैं। फिर भी, वैश्विक घटनाएं जैसे तेल मूल्य उतार या भू-राजनीतिक तनाव जोखिम बढ़ा सकती हैं।
अन्य स्वैप से करेंसी स्वैप की विशिष्टता
अन्य स्वैप से करेंसी स्वैप अलग है। फॉरेक्स स्वैप शॉर्ट-टर्म (रात भर) होता है, जबकि यह लंबी अवधि (5 साल) का है। ब्याज दर स्वैप एक ही मुद्रा में होता है, लेकिन यहां दो अलग मुद्राएं और प्रिंसिपल एक्सचेंज शामिल है। भारत ने जापान के साथ 75 बिलियन डॉलर का स्वैप किया, जो ऐसे ही लंबे समय का था।






