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इंटरव्यू के दौरान भूलकर भी न बताएं ये 4 बातें! रिक्रूटर को ये ‘सीक्रेट’ पता चला तो हाथ से निकल जाएगी नौकरी

इंटरव्यू में लंबे समय से बेरोजगार होना, कई कंपनियों में एक साथ ट्राई करना, निजी‑वित्तीय ज़रूरतें या पिछली कंपनी/बॉस की बुराई जैसी बातें भूलकर भी सीधे‑सीधे न उगलें। रिक्रूटर इन्हें रिस्क, अस्थिरता या अनडिसिप्लिन का संकेत मानकर ऑफर से पहले ही रिजेक्ट कर सकते हैं। इनकी जगह स्किल्स, ग्रोथ और फ्यूचर फिटनेस पर फोकस कर खुद को स्मार्ट और वैल्यू‑ओरिएंटेड उम्मीदवार के रूप में पेश करें।

By Pinki Negi

इंटरव्यू के दौरान भूलकर भी न बताएं ये 4 बातें! रिक्रूटर को ये 'सीक्रेट' पता चला तो हाथ से निकल जाएगी नौकरी

नौकरी का इंटरव्यू अब सिर्फ सच बताने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि खुद को समझदारी से “मार्केट” करने का मौका है। एक वायरल पोस्ट में एक रिक्रूटर ने यही सवाल खड़ा किया है कि क्या “100% ईमानदारी” इंटरव्यू का नियम होना चाहिए, या उम्मीदवार को खुद को एक स्मार्ट, वैल्यू‑ओरिएंटेड प्रोडक्ट की तरह पेश करना चाहिए। इसी बहस के बीच वह चार बातों को बता रहे हैं, जिनमें “पूरी सच्चाई” उगलने से नौकरी का मौका खो हो जाता है।

इंटरव्यू: नेगोशिएशन बनाम परीक्षा

पारंपरिक नज़रिए से इंटरव्यू एक तरह की परीक्षा जैसी प्रक्रिया मानी जाती है, जहां “सही जवाब” देना ज़रूरी होता है। लेकिन रिक्रूटर का तर्क है कि आज यह ज़्यादा नेगोशिएशन जैसा दिखता है जहां कंपनी स्किल्स और एक्सपीरियंस खरीद रही होती है, और उम्मीदवार उस कीमत और यूजफुलनेस को साफ तरीके से दिखाने की कोशिश करता है।

इसी रूप में उम्मीदवार को अपने अचीवमेंट्स, रिज़ल्ट्स और भविष्य की ग्रोथ को ऐसे शेयर करना चाहिए कि इंटरव्यूअर यह महसूस करे कि इस उम्मीदवार को जॉइन कराने से उस भूमिका में वैल्यू बढ़ेगी, सिर्फ फॉर्मली “क़ाबिल” दिखने के लिए नहीं। यही वजह है कि लंबे समय से नौकरी खोजना, या कई जगह आवेदन करने जैसी बातें सीधे‑सीधे बताने की ज़रूरत नहीं; इन्हें सोच‑समझकर, न्यूट्रल और पॉज़िटिव भाषा में बदलकर पेश करना आजकल स्मार्ट रणनीति माना जा रहा है।

बेरोजगारी की खुलकर बात न करें

कई रिक्रूटर इस बात पर ज़ोर देते हैं कि अगर कोई उम्मीदवार लंबे समय से नौकरी की तलाश में रहा है, तो इसे सीधे‑सीधे इंटरव्यू में ज़हर की तरह न उगाले। ऐसा करने से इंटरव्यूअर के दिमाग में धारणा बन सकती है कि इस व्यक्ति को लगातार रिजेक्शन मिले होंगे, या इसकी “मार्केट फिटनेस” में कोई कमी है।

इसकी जगह उम्मीदवार खुद को चुनिंदा अवसरों की तलाश करने वाले, स्किल बिल्डिंग में व्यस्त रहने वाले या लंबे टर्म ग्रोथ के लिए देखने वाले व्यक्ति के रूप में पेश कर सकता है। जैसे वह बताए कि जिस दौरान वह बेरोजगार रहा, उसने कोर्स, फ्रीलांसिंग, स्टडी या प्रोजेक्ट्स पर फोकस किया। इससे बेरोजगारी की जगह “ग्रोथ और तैयारी” का इम्प्रेशन बनता है, जो रिक्रूटर्स को ज़्यादा सुरक्षित और भविष्य‑फोकस्ड लगता है।

कई कंपनियों में एक साथ ट्राई करने की बात न फैलाएँ

अगर कोई उम्मीदवार एक ही समय में कई कंपनियों में ट्राई कर रहा है, तो इसे खुलकर “मैं बहुत जगह आवेदन कर रहा हूँ” की तरह नहीं बताना चाहिए। रिक्रूटर का मानना है कि ऐसा करने से यह इम्प्रेशन बन सकता है कि उम्मीदवार किसी भी जॉब के लिए तैयार है, भले ही वह उसकी स्किल्स और करियर गोल्स से ठीक मैच न करे।

इसके बजाय बेहतर रहता है कि उम्मीदवार यह बताए कि वह केवल उन्हीं रोल्स पर ध्यान दे रहा है जो उसके एक्सपीरियंस, स्किल सेट और लंबे टर्म करियर लक्ष्यों से जुड़े हैं। इससे इंटरव्यूअर को लगता है कि यह व्यक्ति प्लान बनाकर आया है, बस भागम‑भाग जॉब तलाशने वाला उम्रेदवार नहीं है।

निजी, वित्तीय और इमोशनल ज़रूरतों को ऑफर से जोड़ें नहीं

कई युवा इंटरव्यू में ज़ोर देते हैं कि “मुझे जल्दी सैलरी चाहिए, घर चलाना मुश्किल हो रहा है” या “परिवार की ज़िम्मेदारी है, इसलिए यह जॉब ज़रूरी है”。 रिक्रूटर इसे गलत समझते हैं क्योंकि यह आपकी जगह “प्रेशर या निर्भरता” का इम्प्रेशन बनाता है, जिससे लगता है कि आप कमजोर पोजीशन में नेगोशिएशन कर रहे हैं।

इसके बजाय बेहतर तरीका यह है कि आप स्थिरता, ग्रोथ और लंबे समय तक कंपनी के साथ जुड़े रहने की बात करें। जैसे आप कह सकते हैं कि आप ऐसी जॉब चाहते हैं जहां आपकी स्किल्स और हार्ड वर्क को दिखाने का मौका मिले, और आप कंपनी के साथ लंबी यात्रा तय करने वाले हैं। इससे इमोशनल डिपेंडेंसी की जगह प्रोफेशनल और लॉयल इमेज बनती है।

पिछली कंपनी/बॉस की बुराई से बचें

इंटरव्यू में पिछली कंपनी, बॉस या हेड की ज़ोर शिकायतें करना देख रहे लोगों के लिए रेड फ्लैग बन जाता है। इससे लगता है कि आप टीम वर्क और प्रोफेशनल डिसिप्लिन में कमजोर हैं, या आप समस्याओं को दूसरों के सिर मढ़ने में विश्वास रखते हैं।

इसकी जगह यह बेहतर है कि आप “लेसन लर्न्ड” और “फ्यूचर फिट” को फोकस करें। जैसे आप बता सकते हैं कि आपने पिछली जगह से बहुत कुछ सीखा, लेकिन अब एक नई चुनौती और बेहतर वर्क‑कल्चर चाहते हैं। इस तरह आप नकारात्मकता की जगह ग्रोथ और एडैप्टेबिलिटी का इम्प्रेशन देते हैं।

इंटरव्यू से पहले कंपनी और रोल पर रिसर्च ज़रूरी

रिक्रूटर यह भी कहते हैं कि जो उम्मीदवार बिना तैयारी के इंटरव्यू में जाता है, उसे अक्सर लापरवाह और गैर‑गंभीर माना जाता है। इसलिए ज़रूरी है कि आवेदन करने से पहले ही आप कंपनी, उसकी इंडस्ट्री, उसके वैल्यूज़ और जिस रोल के लिए आप जा रहे हैं, उसकी जिम्मेदारियाँ और टास्क्स को अच्छी तरह समझ लें।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।