
अप्रैल की शुरुआत में ही दिल्ली-NCR में पड़ रही भीषण गर्मी ने गिग वर्कर्स की जिंदगी को नर्क बना दिया है। दोपहर के समय सड़कों पर तपती धूप में बाइक दौड़ाते हुए जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट और जेप्टो जैसे प्लेटफॉर्म्स के लाखों डिलीवरी पार्टनर्स अपनी जान की बाजी लगा रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर सकता है, जिससे हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ गया है।
ऐसे में गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने दिल्ली सरकार को पत्र लिखकर दोपहर 12 से 3 बजे तक डिलीवरी सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाने की मांग की है।
भीषण गर्मी का कहर
यह मांग कोई नई नहीं है। पिछले साल 2024 में भी दिल्ली का तापमान 50 डिग्री के आसपास पहुंचा था, जब जोमैटो ने खुद ग्राहकों से दोपहर में अनावश्यक ऑर्डर न करने की अपील की थी। लेकिन इस बार वर्कर्स ने संगठित होकर सरकार से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। यूनियन के अनुसार, दिल्ली में तापमान 40-42 डिग्री के बीच रहने के बावजूद उमस भरी गर्मी से ‘फील्स लाइक’ तापमान 45 डिग्री से अधिक हो जाता है।
सड़कों पर घंटों बाइक चलाने वाले ये वर्कर्स बिना पर्याप्त छाया, पानी या आराम के काम करने को मजबूर हैं। परिणामस्वरूप, हीट एक्सॉर्शन जैसी जानलेवा बीमारियां आम हो रही हैं। एक वर्कर ने बताया, “रोज 12-14 घंटे काम करते हैं, लेकिन दोपहर की धूप में ऑर्डर पूरा करने का दबाव जान ले लेता है।”
यूनियन की मुख्य मांगें
GIPSWU के पत्र में विस्तार से वर्कर्स की दुर्दशा का जिक्र है। यूनियन ने मांग की है कि पीक हीट घंटों (12 से 3 बजे) में ऐप-बेस्ड डिलीवरी और कैब सेवाओं को स्थगित किया जाए। इसके साथ ही शहर भर में छायादार रेस्ट एरिया, पीने का साफ पानी, ग्लूकोज पाउच, जूस और इमरजेंसी मेडिकल किट्स की व्यवस्था हो। दिल्ली बजट में घोषित रेस्ट फैसिलिटी और अटल कैंटीन जैसी योजनाओं को तत्काल लागू करने पर भी जोर दिया गया है।
यूनियन ने कंपनियों पर भी दबाव बनाने की बात कही है- वे वर्कर्स को मुफ्त कॉटन जैकेट्स, हीट-रिस्टेंट कैप्स, सनस्क्रीन और हाइड्रेशन किट दें। महिला वर्कर्स के लिए अलग से साफ-सुथरे सैनिटेशन, पीने के पानी और इमरजेंसी हेल्पलाइन की मांग भी उठी है।
गिग इकोनॉमी की व्यापक समस्याएं
यह मुद्दा गिग इकोनॉमी की व्यापक समस्याओं को उजागर करता है। 2025-26 में गिग वर्कर्स ने कई हड़तालें कीं—31 दिसंबर 2025 को कम वेतन और असुरक्षा के खिलाफ, और फरवरी 2026 में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन। जनवरी 2026 में श्रम मंत्रालय ने 10-मिनट डिलीवरी नियम समाप्त कर दिया, जो वर्कर्स पर दबाव बढ़ा रहा था।
AAP सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में भी गिग वर्कर्स के लिए बीमा, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षित माहौल की मांग की। स्विगी-जोमैटो ने हड़तालों के दौरान इंसेंटिव बढ़ाए (पीक ऑवर्स में 120-150 रुपये प्रति ऑर्डर), लेकिन वर्कर्स फिक्स सैलरी और मौसमी छूट चाहते हैं। 2024 में कंपनियों ने 250 शहरों में 450+ रेस्ट जोन्स बनाए थे, जहां पानी-ग्लूकोज मिलता था, लेकिन दिल्ली में ये अपर्याप्त हैं।
आगे की राह
वर्कर्स का कहना है कि शहर की सर्विस इकोनॉमी इन्हीं पर टिकी है, लेकिन ये सबसे ज्यादा जोखिम उठाते हैं। अगर मांगें मानी गईं, तो दोपहर के ऑर्डर प्रभावित होंगे, लेकिन वर्कर्स की जिंदगियां बचेंगी। ग्राहक सुबह-शाम ऑर्डर या लोकल विकल्पों पर निर्भर हो सकते हैं। सरकार और कंपनियों से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद है, वरना गर्मी का मौसम और तनावपूर्ण हो सकता है। यह गिग वर्कर्स के अधिकारों की बड़ी लड़ाई का हिस्सा है, जो पूरे देश में गूंज रही है।









