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Privacy Alert: सावधान! फोन के नोटिफिकेशन से भी हो सकती है जासूसी; चुपचाप लीक हो रहा है आपका डेटा, आज ही बदलें ये सेटिंग

स्मार्टफोन के पुश नोटिफिकेशन आपकी प्राइवेसी पर बड़ा खतरा हैं। ये Apple-Google सर्वरों से गुजरते हुए OTP, मैसेज लीक कर देते हैं। अमर उजाला, ABP न्यूज की रिपोर्ट्स के मुताबिक, लॉकस्क्रीन छिपाएं, ऐप परमिशन हटाएं, माइक-कैमरा एक्सेस सीमित करें। 70% यूजर्स प्रभावित- आज ही सेटिंग्स चेंज कर जासूसी रोकें।

By Pinki Negi

how to stop data leakage via phone notifications safety tips

क्या आप जानते हैं कि आपका स्मार्टफोन हर उस पुश नोटिफिकेशन के जरिए आपकी जासूसी कर रहा है, जो आपके स्क्रीन पर पॉप अप होता है? अमर उजाला की हालिया रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिसमें बताया गया है कि ये नोटिफिकेशन सीधे ऐप से नहीं, बल्कि एप्पल या गूगल के क्लाउड सर्वरों से होकर गुजरते हैं। इस दौरान नोटिफिकेशन का पूरा कंटेंट- चाहे वो OTP हो, बैंक अलर्ट हो या पर्सनल मैसेज- रिकॉर्ड हो जाता है। खुफिया एजेंसियां या बड़ी टेक कंपनियां इसी डेटा का इस्तेमाल आपकी दैनिक गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए कर सकती हैं, बिना आपको कानों-कान खबर हुए।

समस्या की गहराई

यह समस्या कोई नई नहीं है। एबीपी न्यूज ने भी चेतावनी जारी की है कि लॉक स्क्रीन पर नोटिफिकेशन प्रीव्यू दिखने से कोई भी व्यक्ति- चाहे वो आपका दोस्त हो या अजनबी- आसानी से आपके संवेदनशील डेटा को पढ़ सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर आपको कोई बैंकिंग OTP मिलता है और आपका फोन लॉक मोड में है, तो स्क्रीन पर मैसेज की पूरी सामग्री दिख जाती है। इससे चोर या हैकर तुरंत इसे नोटिस कर सकते हैं।

ऊपर दी गई जानकारी के अनुसार, ये नोटिफिकेशन बैकग्राउंड में ऐप्स को भी एक्सेस देते हैं, जो आपके फोन की स्टोरेज में डेटा सेव करके रखते हैं। परिणामस्वरूप, आपकी लोकेशन, कॉन्टैक्ट्स और यहां तक कि बातचीत के पैटर्न लीक हो जाते हैं।

प्राइवेसी पर खतरा

प्राइवेसी एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह खतरा एंड्रॉयड और आईओएस दोनों डिवाइसेस पर बराबर है। जब आप कोई ऐप इंस्टॉल करते हैं, तो वो डिफॉल्ट रूप से नोटिफिकेशन परमिशन मांग लेता है। कई संदिग्ध ऐप्स इसी का फायदा उठाते हैं। टीवी9 भारतवर्ष की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कुछ ऐप्स नोटिफिकेशन एक्सेस के बहाने माइक्रोफोन और कैमरा का भी गलत इस्तेमाल करते हैं।

वे आपकी बातचीत सुनते रहते हैं और थर्ड-पार्टी सर्वर्स को डेटा भेजते हैं, जिससे आपकी प्राइवेसी पूरी तरह खतरे में पड़ जाती है। सोचिए, आपका फोन जेब में रखा है और वो चुपचाप आपकी हर हरकत रिपोर्ट कर रहा है- यह कोई सायंस फिक्शन नहीं, बल्कि आज की हकीकत है।

तुरंत करें ये जरूरी बदलाव

अपने फोन को जासूस बनाने से बचाने के लिए आज ही ये सेटिंग्स चेक करें और अपडेट कर लें। सबसे पहला कदम है लॉक स्क्रीन नोटिफिकेशन को छिपाना। एंड्रॉयड यूजर्स सेटिंग्स में जाकर ‘Notifications‘ सेक्शन में ‘Lock screen‘ ऑप्शन चुनें और ‘Hide sensitive content‘ या ‘Don’t show notifications at all’ पर स्विच करें। इससे लॉक स्क्रीन पर केवल ऐप का नाम दिखेगा, कंटेंट नहीं। आईफोन यूजर्स को सेटिंग्स > नोटिफिकेशंस > ‘Show Previews’ में जाकर ‘Never’ सिलेक्ट करना चाहिए। यह छोटा-सा बदलाव आपके OTP, पासवर्ड और पर्सनल मैसेज को सुरक्षित रखेगा।

ऐप परमिशन का सख्त ऑडिट

दूसरा, ऐप परमिशन का सख्ती से ऑडिट करें। सेटिंग्स > ऐप्स > परमिशन मैनेजर में जाकर देखें कि किन-किन ऐप्स को नोटिफिकेशन पढ़ने की अनुमति है। अमर उजाला की सलाह है कि गैर-जरूरी ऐप्स जैसे फ्री गेम्स या अनजान यूटिलिटी टूल्स से तुरंत ये परमिशन हटा दें। खासकर उन ऐप्स पर नजर रखें जो बैकग्राउंड में ज्यादा डेटा यूज करते हैं या फोन को गर्म कर देते हैं। एबीपी न्यूज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ‘Notification Access’ सर्च करके चेक करें- कई बार थर्ड-पार्टी ऐप्स आपके सभी नोटिफिकेशन को स्कैन कर लेते हैं, जो जासूसी का बड़ा जरिया बन जाता है।

माइक्रोफोन-कैमरा एक्सेस सीमित करें

तीसरा महत्वपूर्ण कदम है माइक्रोफोन और कैमरा एक्सेस को सीमित करना। टीवी9 की रिपोर्ट के मुताबिक, कई ऐप्स ‘Always Allow‘ पर सेट होने से आपकी प्राइवेट बातें रिकॉर्ड करते हैं। इसे सेटिंग्स > प्राइवेसी > माइक्रोफोन/कैमरा में जाकर ‘While using the app’ या ‘Ask every time‘ पर बदलें। साथ ही, गूगल पर ‘myactivity.google.com‘ पर लॉगिन करके ‘Web & App Activity‘ को बंद करें या ऑटो-डिलीट सेट करें। अगर आप बैंकिंग या चैट ऐप्स यूज करते हैं, तो सिग्नल जैसे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड ऐप्स चुनें और उनकी प्राइवेसी सेटिंग्स को कस्टमाइज करें।

एक्सपर्ट्स और आंकड़ों की राय

प्राइवेसी विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 में भारत में 70 प्रतिशत से ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स नोटिफिकेशन से जुड़े डेटा लीक का शिकार हो चुके हैं। बिग टेक कंपनियां इस डेटा को एड टारगेटिंग के लिए बेचती हैं, जबकि हैकर्स इसे रैनसमवेयर के लिए इस्तेमाल करते हैं। ऊपर दी गई जानकारी से साफ है कि यह समस्या वैश्विक है- बीबीसी हिंदी ने भी ऐप्स के डेटा चोरी पर रिपोर्ट जारी की है। बचाव का सबसे अच्छा तरीका है नियमित अपडेट्स इंस्टॉल करना, अनजान ऐप्स अवॉइड करना और VPN का इस्तेमाल। अगर फोन में अजीब बैटरी ड्रेन या अनचाहे नोटिफिकेशन आ रहे हैं, तो तुरंत फैक्ट्री रीसेट या एंटीवायरस स्कैन करवाएं।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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