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Loan Rejection Secret: अच्छी सैलरी होने पर भी बैंक ने ठुकरा दिया लोन? कहीं आपका ‘सैलरी अकाउंट’ तो नहीं है वजह, जानें असल सच

अच्छी सैलरी होने पर भी बैंक लोन ठुकरा रहे हैं? सैलरी अकाउंट स्टेटमेंट ही आपकी वित्तीय कमजोरी उजागर कर रहा है। पुरानी EMI, क्रेडिट कार्ड बकाया, जॉब चेंज या कम बचत- ये छिपे कारण रिजेक्शन की जड़ हैं। 2-3 महीने पहले अकाउंट साफ करें, अप्रूवल 80% तक बढ़ेगा। बैंक को डिसिप्लिन चाहिए, न कि सिर्फ सैलरी।

By Pinki Negi

Loan Rejection Secret: अच्छी सैलरी होने पर भी बैंक ने ठुकरा दिया लोन? कहीं आपका 'सैलरी अकाउंट' तो नहीं है वजह, जानें असल सच

नौकरीपेशा लोगों के लिए बैंक से पर्सनल लोन, कार लोन या होम लोन लेना आजकल आम बात हो गई है। अच्छी सैलरी और स्थिर नौकरी होने पर लगता है कि लोन मिलना तय है, लेकिन कई बार बैंक सैलरी स्लिप और 3-6 महीने के सैलरी अकाउंट स्टेटमेंट चेक करने के बाद भी आवेदन ठुकरा देते हैं। आखिर ऐसा क्यों? क्या सिर्फ मासिक आय ही लोन अप्रूवल का आधार नहीं है? गहन विश्लेषण से पता चलता है कि सैलरी अकाउंट आपकी वास्तविक वित्तीय सेहत का आईना है, जो बैंक गहराई से परखते हैं।

सैलरी अकाउंट से रीपेमेंट क्षमता का आकलन

बैंक लोन देने से पहले सिर्फ कागजों की सैलरी नहीं, बल्कि आपकी रीपेमेंट क्षमता का पूरा आकलन करते हैं। सैलरी अकाउंट स्टेटमेंट में वे देखते हैं कि आपकी आय कितनी स्थिर है, कितने खर्चे हो रहे हैं और बची हुई रकम से नई ईएमआई का बोझ संभाला जा सकता है या नहीं। उदाहरण लें- राम और श्याम दोनों की मासिक सैलरी 60 हजार रुपये है। राम के अकाउंट में कोई पुरानी ईएमआई नहीं है, सिर्फ नियमित सैलरी क्रेडिट और मामूली खर्चे दिखते हैं। नतीजा?

बैंक राम को आसानी से 20-25 लाख का पर्सनल या कार लोन मंजूर कर सकता है। लेकिन श्याम के मामले में वही 60 हजार की सैलरी पर 25 हजार रुपये की होम लोन ईएमआई और 15 हजार की कार लोन ईएमआई चल रही है। सैलरी क्रेडिट के तुरंत बाद ये डेबिट हो जाते हैं, जिससे महीने के अंत में बैलेंस न के बराबर रह जाता है। बैंक इसे ‘हाई इनकम-टू-डेट रेश्यो’ मानते हैं और नया लोन देने से इनकार कर देते हैं, क्योंकि रीपेमेंट का जोखिम ज्यादा लगता है।

क्रेडिट कार्ड बिल का रखें खास ख्याल

यह समस्या सिर्फ पुरानी ईएमआई तक सीमित नहीं। क्रेडिट कार्ड का गलत इस्तेमाल भी सैलरी अकाउंट के जरिए बैंक को अलर्ट कर देता है। अगर आप क्रेडिट कार्ड बिल का सिर्फ मिनिमम अमाउंट पे करते हैं और बाकी रकम अगले महीने में रोलओवर हो जाती है, तो बैंक इसे ‘रिवॉल्विंग क्रेडिट’ के रूप में देखते हैं। कई बैंक इसे छिपी ईएमआई की तरह गिनते हैं, जो आपकी कुल एलिजिबिलिटी को 20-30 प्रतिशत तक घटा सकती है।

मान लीजिए आपकी सैलरी 1 लाख है और क्रेडिट कार्ड से 20 हजार का रिवॉल्विंग बैलेंस है- बैंक इसे 5-7 हजार की मासिक ‘स्यूडो-ईएमआई’ मानकर आपकी नई लोन कैपेसिटी काट लेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि क्रेडिट कार्ड बिल हमेशा फुल पेमेंट से क्लियर करें, ताकि सैलरी अकाउंट में साफ-सुथरा कैश फ्लो दिखे।

तेजी से नौकरी बदलने पर भी खतरा

नौकरी में अस्थिरता भी बड़ा खतरा है। अगर आपने हाल ही में जॉब स्विच की है और सैलरी अकाउंट में नई कंपनी से सिर्फ 1-2 महीने के क्रेडिट दिख रहे हैं, तो बैंक सतर्क हो जाते हैं। खासकर होम लोन जैसे बड़े लोन में वे कम से कम 6-12 महीने की जॉब स्टेबिलिटी चाहते हैं। तेजी से नौकरी बदलना इंक्रीमेंट तो दिला सकता है, लेकिन बैंक इसे रिस्क फैक्टर मानते हैं। एक सर्वे के मुताबिक, पिछले साल 35 प्रतिशत लोन रिजेक्शन के पीछे जॉब चेंज ही मुख्य कारण था। सैलरी अकाउंट में अनियमित क्रेडिट या ज्यादा कैश विदड्रॉल भी संदेह पैदा करते हैं, क्योंकि बैंक को लगता है कि आय की स्रोत पूरी तरह वैरिफाइड नहीं।

अन्य छिपे कारण और समाधान

इसके अलावा, सैलरी अकाउंट में कम बैलेंस या नेगेटिव क्लोजिंग बैलेंस भी लोन रिजेक्शन की बड़ी वजह बनता है। अच्छी सैलरी होने पर भी अगर महीने भर में बचत शून्य रहती है, तो बैंक समझते हैं कि आपका लाइफस्टाइल खर्चों पर निर्भर है। मल्टीपल लोन एप्लीकेशन भी नुकसान करती हैं- एक साथ 4-5 बैंकों में अप्लाई करने से क्रेडिट ब्यूरो में ‘हार्ड इंक्वायरी’ बढ़ जाती है, जो स्कोर 50-100 पॉइंट्स गिरा देती है। क्रेडिट स्कोर 750 से ऊपर रखना जरूरी है, लेकिन सैलरी अकाउंट की हेल्थ उसके बिना भी अप्रूवल तय करती है।

समाधान क्या है? लोन अप्लाई करने से 2-3 महीने पहले सैलरी अकाउंट को ‘साफ’ करें। पुरानी ईएमआई पहले चुकाएं, क्रेडिट कार्ड बिल फुल पे करें, अनावश्यक ट्रांसफर बंद करें और कम से कम 20-30 प्रतिशत सैलरी बचत के रूप में रखें। जॉब स्टेबल रखें और एक समय में सिर्फ 1-2 बैंक ट्राई करें। फाइनेंशियल एडवाइजर्स के अनुसार, इन स्टेप्स से अप्रूवल रेट 70-80 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। याद रखें, बैंक को आपकी सैलरी नहीं, आपकी वित्तीय डिसिप्लिन चाहिए। अगर सैलरी अकाउंट मजबूत है, तो कोई लोन रिजेक्ट नहीं होगा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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