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EV Parking Rights: सोसाइटी की पार्किंग में इलेक्ट्रिक चार्जर लगवाने से कोई नहीं रोक पाएगा! कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से लें सबक

सुप्रीम कोर्ट ने EV मालिकों को राहत दी- सोसाइटी अब पार्किंग स्लॉट में चार्जर लगाने से नहीं रोक सकती। रचित कत्याल की PIL और रक्षित सोमानी की 2.5 साल की जीत से स्पष्ट: 2024 गाइडलाइंस के तहत BIS-सर्टिफाइड इंस्टॉलेशन पर पूरा अधिकार। पब्लिक चार्जिंग (₹3.5-4/km) से घरेलू (₹1.5/km) बचत। EV क्रांति अब घर-घर पहुंचेगी!

By Pinki Negi

EV Parking Rights: सोसाइटी की पार्किंग में इलेक्ट्रिक चार्जर लगवाने से कोई नहीं रोक पाएगा! कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से लें सबक

इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। लोग पर्यावरण के अनुकूल और किफायती गाड़ियां खरीदना पसंद कर रहे हैं, लेकिन एक बड़ा सवाल हर EV मालिक के मन में कौंधता है- क्या अपनी हाउसिंग सोसाइटी की पार्किंग में चार्जर लगवा सकेंगे? लंबे समय से चली आ रही इस दुविधा पर अब सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। ग्रेटर नोएडा के निवासी रचित कत्याल की PIL पर फरवरी 2026 में जारी नोटिस ने पूरे देश के लाखों EV मालिकों को राहत की सांस दी है। पावर मिनिस्ट्री की 2024 गाइडलाइंस के तहत अब कोई सोसाइटी निवासी को उसके आवंटित पार्किंग स्लॉट में प्राइवेट चार्जर लगाने से नहीं रोक सकती।

यह मामला न सिर्फ कानूनी लड़ाई का प्रतीक है, बल्कि EV क्रांति को गति देने वाला मील का पत्थर साबित हो सकता है। रचित कत्याल ने अपनी सोसाइटी से चार्जर लगाने की इजाजत मांगी, लेकिन मैनेजमेंट ने सुरक्षा और ग्रिड लोड का हवाला देकर साफ इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां चीफ जस्टिस की बेंच ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और सोसाइटी प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। मामला अब 13 अप्रैल को फिर सूचीबद्ध है, लेकिन इसकी गूंज पूरे देश में फैल चुकी है।

रक्षित सोमानी का केस: 2.5 साल की कड़ी जद्दोजहद

इस संदर्भ में पुणे के रक्षित सोमानी का केस खासा प्रेरणादायक है। 2.5 साल पहले उन्होंने 1 करोड़ रुपये की लग्जरी Mercedes-Benz EQB खरीदी, जो EV सेगमेंट की पॉपुलर SUV है। लेकिन उनकी हाउसिंग सोसाइटी ने पार्किंग में चार्जर लगाने के लिए NOC देने से साफ मना कर दिया। सोसाइटी का तर्क था कि पुरानी बिल्डिंग में बिजली का लोड कम है, बेसमेंट में चार्जिंग से आग लगने का खतरा है और सामान्य सुरक्षा को खतरा हो सकता है। रक्षित को मजबूरन पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों पर निर्भर होना पड़ा, जहां प्रति किलोमीटर खर्च 3.5-4 रुपये तक पहुंच जाता था। वहीं घरेलू चार्जिंग से यह खर्च सिर्फ 1.5 रुपये/किमी रहता।

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद रक्षित को आखिरकार जीत मिली। उनके पास पहले से Mercedes-Benz का प्रमाणित चार्जर, सही वायरिंग और बिजली बोर्ड की मंजूरी थी, जिसका हवाला देकर उन्होंने सोसाइटी के तर्कों को खारिज करवाया। यह जीत न सिर्फ व्यक्तिगत है, बल्कि पूरे EV समुदाय के लिए मिसाल कायम करती है। रक्षित ने कहा, “सोसाइटी का डर जायज लगता है, लेकिन आधुनिक चार्जरों में सुरक्षा फीचर्स जैसे थर्मल प्रोटेक्शन और स्मार्ट मॉनिटरिंग होती है। इनकार करना EV अपनाने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा था।”

क्या कहते हैं पावर मिनिस्ट्री के 2024 दिशा-निर्देश?

बिजली मंत्रालय ने 17 सितंबर 2024 को जारी ‘Guidelines and Standards for EV Charging Infrastructure‘ में साफ प्रावधान किया है। ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी (GHS) के निवासी अपने आवंटित पार्किंग स्पेस में अपने खर्चे पर प्राइवेट EV चार्जर लगा सकते हैं। सोसाइटी या RWA (रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन) को इससे रोकने का कोई अधिकार नहीं। बिजली कनेक्शन मौजूदा मीटर से या अलग सब-मीटर से लिया जा सकता है, और डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनी) को 3 से 30 दिनों के अंदर LT कनेक्शन (150 kW तक) देना अनिवार्य है।

गाइडलाइंस में सुरक्षा पर जोर दिया गया है। चार्जर BIS (Bureau of Indian Standards) और CEA (Central Electricity Authority) मानकों का पालन करें। इंस्टॉलेशन के लिए सर्टिफाइड इलेक्ट्रीशियन जरूरी है, और OYSTER (One-Time Verification) सिस्टम से रजिस्ट्रेशन अनिवार्य। अगर सोसाइटी ग्रिड लोड की चिंता जताए, तो स्मार्ट चार्जिंग और लोड मैनेजमेंट सॉल्यूशन अपनाए जा सकते हैं। नोएडा अथॉरिटी ने तो नई प्रॉपर्टीज के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) से पहले 20% पार्किंग स्पेस EV चार्जिंग के लिए आरक्षित करना अनिवार्य कर दिया है।

सोसाइटी की चिंताएं: जायज या बहाना?

कई सोसाइटीज अब भी हिचकिचा रही हैं। गुरुग्राम में 600 से ज्यादा हाईराइज में बेसमेंट चार्जिंग के लिए फायर NOC अटके पड़े हैं। पुरानी बिल्डिंग्स में वायरिंग अपग्रेड की जरूरत पड़ती है, जो लाखों का खर्चा लाता है। लेकिन गाइडलाइंस साफ कहती हैं- सोसाइटी इनकार नहीं कर सकती, सिर्फ सुविधा प्रदान करने में सहयोग करे। विशेषज्ञों का मानना है कि सब-मीटरिंग से बिजली चोरी रुकेगी और ग्रिड पर बोझ कम होगा। EV इंडस्ट्री से जुड़े विश्लेषकों के अनुसार, 2026 तक भारत में 10 लाख EV चार्जर की जरूरत है, जिसमें 30% प्राइवेट होंगे।

EV मालिक क्या करें?

अगर आप EV खरीदने या चार्जर लगवाने की सोच रहे हैं, तो ये कदम उठाएं:

  • सबसे पहले सोसाइटी मैनेजमेंट को लिखित आवेदन दें, जिसमें 2024 गाइडलाइंस का हवाला हो।
  • BIS-सर्टिफाइड चार्जर चुनें (7-22 kW रेंज आम) और डिस्कॉम से कनेक्शन अप्लाई करें।
  • इंस्टॉलेशन से पहले इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट करवाएं।
  • इनकार होने पर राज्य विद्युत नियामक आयोग (SERC) या हाईकोर्ट जाएं। रचित कत्याल केस की तरह PIL दायर करने का विकल्प भी खुला है।
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Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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