
अगर आप स्मार्टफोन या लैपटॉप खरीदने की सोच रहे हैं, तो फिलहाल जेब तैयार रखें। पिछले कुछ महीनों से टेक प्रोडक्ट्स की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि हो रही है। भारत में बिकने वाले 80 से ज्यादा स्मार्टफोन मॉडल्स की कीमतें 15 फीसदी तक उछल चुकी हैं, और ओप्पो-रेडमी जैसी कंपनियां नई लॉन्चिंग्स को पहले ही महंगा कर चुकी हैं। सैमसंग गैलेक्सी S26 सीरीज भी अब ज्यादा कीमत पर आने वाली है। चिंता की बात ये है कि मेमोरी चिप्स की भयंकर किल्लत से ग्राहकों को जल्द राहत मिलने की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही।
मेमोरी शॉर्टेज क्राइसिस
इस संकट का मूल कारण AI का वैश्विक बूम है। स्मार्टफोन और लैपटॉप के लिए इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स (RAM और स्टोरेज) अब AI डेटा सेंटर्स की भूख मिटाने में लग रही हैं। चिप बनाने वाली बड़ी कंपनियां- सैमसंग, SK हाइनिक्स और माइक्रोन- इनका करीब 90 फीसदी मार्केट शेयर कंट्रोल करती हैं। लेकिन AI कंपनियों के बड़े ऑर्डर ने कंज्यूमर मार्केट को सूखा बना दिया है।
नतीजा? स्मार्टफोन कंपनियों को चिप्स के लिए 20-30 फीसदी ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं, जो सीधे ग्राहकों की जेब पर असर डाल रहा है। माइक्रोन तो AI डेटा सेंटर्स के लिए ही चिप्स प्रोड्यूस करने लगी है, जबकि बाकी दो कंपनियां भी डिमांड का महज 60 फीसदी ही पूरा कर पा रही हैं।
ईरान युद्ध ने और बिगाड़ी तस्वीर
AI के अलावा, जियोपॉलिटिकल तनाव ने हालात को और जटिल बना दिया है। ईरान युद्ध के कारण सप्लाई चेन में रुकावटें बढ़ गई हैं, जिससे चिप प्रोडक्शन पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। ग्लोबल स्तर पर बिजली और पानी की बढ़ती खपत, कमजोर रुपया और शिपिंग कॉस्ट में उछाल ने भी कीमतों को आसमान छूने पर मजबूर कर दिया है। जनवरी-मार्च 2026 में ही कई मॉडल्स 4-8 फीसदी महंगे हो चुके हैं, और अप्रैल तक ये आंकड़े और ऊपर चढ़ गए। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले दो-चार महीनों में 30 फीसदी तक कीमतें बढ़ सकती हैं।
कब तक रहेगा ये संकट?
चिप दिग्गज कंपनियां प्रोडक्शन बढ़ाने की कोशिशें तो कर रही हैं, लेकिन ये प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। सैमसंग इस साल एक नया फैब्रिकेशन प्लांट शुरू करेगी, मगर फुल-स्केल प्रोडक्शन 2027 तक ही संभव होगा। SK हाइनिक्स भी नया प्लांट बना रही है, जो अगले साल काम शुरू करेगा। माइक्रोन की नई यूनिट 2027 में तैयार होगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये कंपनियां बढ़ती डिमांड को 2027 तक पूरा नहीं कर पाएंगी। ऐसे में मेमोरी शॉर्टेज क्राइसिस 2027-28 तक चलता दिख रहा है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि AI की मांग इतनी तेज है कि नई कैपेसिटी भी महज आंशिक राहत दे पाएगी।
ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?
भारतीय बाजार में ये हाइक मिड-रेंज से लेकर फ्लैगशिप फोन्स तक सबको जकड़ चुका है। पहले 8GB RAM वाले फोन अब 6GB पर शिफ्ट हो रहे हैं, जिससे परफॉर्मेंस प्रभावित हो रही है। लैपटॉप्स में भी स्टोरेज कॉस्ट बढ़ने से एंट्री-लेवल मॉडल्स 10-15 हजार रुपये महंगे हो गए हैं। खासकर उत्तर भारत में, जहां मीरट-दिल्ली जैसे शहरों में टेक डिमांड हाई है, लोग अब वेट-एंड-वॉच पॉलिसी अपना रहे हैं। लेकिन फेस्टिवल सीजन आने तक कीमतें और चढ़ सकती हैं।
खरीदारी की सलाह
अगर जरूरी नहीं, तो नई खरीदारी टालें। पुराने मॉडल्स या रिफर्बिश्ड ऑप्शन्स पर नजर रखें, जहां डिस्काउंट मिलने की संभावना है। फेस्टिवल सेल्स का इंतजार करें, क्योंकि नई लॉन्चिंग्स तो और महंगी होंगी। स्पेसिफिकेशन्स चेक करना न भूलें- कम RAM वाले फोन से बचें। लंबे समय में, ये संकट टेक इंडस्ट्री को मजबूत बनाएगा, लेकिन फिलहाल ग्राहकों को सब्र रखना होगा।









