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Indian Economy: दुनिया हैरान! ग्लोबल संकट के बीच भारत की ‘सुपरफास्ट’ रफ्तार, UN ने लगाया जीडीपी ग्रोथ पर बड़ा अनुमान

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By Pinki Negi

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वैश्विक अर्थव्यवस्था संकटों की चपेट में तड़प रही है, जहां ईरान युद्ध ने ऊर्जा बाजार को हिला दिया है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बंद हो चुके हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, सप्लाई चेन का बंटाधार और अमेरिकी टैरिफ वॉर ने पूरी दुनिया को मंदी की गिरफ्त में ले लिया है। लेकिन इसी तूफान के बीच भारत की अर्थव्यवस्था न केवल खड़ी हुई है, बल्कि रफ्तार पकड़ रही है।

संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक एवं सामाजिक आयोग फॉर एशिया एंड पैसिफिक (ESCAP) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत की जीडीपी ग्रोथ को लेकर बेहद सकारात्मक अनुमान जताया है। चालू वित्त वर्ष 2026 में भारत की विकास दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो अगले वित्त वर्ष 2027 में बढ़कर 6.6 प्रतिशत हो जाएगी। यह आंकड़ा वैश्विक औसत 2.7 प्रतिशत से कहीं ज्यादा है, जो भारत को दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में चमका रहा है।

ईरान युद्ध के साए में भी भारत की मजबूत रफ्तार

ESCAP की यह रिपोर्ट 17 मार्च 2026 की स्थिति पर आधारित है, जब ईरान युद्ध चरम पर था और उसके असर साफ दिखने लगे थे। ऊर्जा संकट ने वैश्विक व्यापार को ठप कर दिया, लेकिन भारत ने अपनी आर्थिक गति बनाए रखी। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष में ग्रामीण इलाकों की मजबूत खपत ने भारत की तेज वृद्धि का आधार तैयार किया। किसानों की अच्छी आमदनी, मजबूत कृषि उत्पादन और सरकारी योजनाओं जैसे PM-KISAN ने ग्रामीण मांग को बुलंद रखा।

ऊपर से वस्तु एवं सेवा कर (GST) की दरों में हालिया कटौती ने उपभोक्ताओं के जेब को राहत दी और घरेलू बाजार को नई जान फूकी। इससे न केवल खुदरा बिक्री बढ़ी, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में भी सकारात्मक लहर दौड़ गई। RBI की रिपोर्ट भी यही पुष्टि करती है कि FY26 में भारत 7.6 प्रतिशत की रफ्तार पकड़ सकता है, जो वैश्विक संकटों के बावजूद एक मिसाल है।

एशिया-पैसिफिक का नया ग्रोथ इंजन

भारत अब एशिया-पैसिफिक क्षेत्र का असली ‘ग्रोथ इंजन’ बन चुका है। ESCAP रिपोर्ट के मुताबिक, जहां चीन की GDP ग्रोथ पिछले साल 5 प्रतिशत पर सिमट गई, वहीं इस साल 4.3 प्रतिशत और अगले साल 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रियल एस्टेट संकट, कमजोर उपभोक्ता मांग और निर्यात में गिरावट ने चीन को पीछे धकेल दिया है। पाकिस्तान की हालत तो और भी खराब है- पिछले साल 3 प्रतिशत ग्रोथ के बाद इस साल 2.6 प्रतिशत और 2027 में महज 3.1 प्रतिशत रहने की संभावना है।

राजनीतिक अस्थिरता, महंगाई और विदेशी कर्ज ने इसे क्षेत्र का सबसे कमजोर कड़ी बना दिया। इसके उलट भारत न केवल पड़ोसियों को मीलों पीछे छोड़ रहा है, बल्कि G20 देशों में सबसे आगे चल रहा है। IMF के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में भारत वैश्विक रियल GDP ग्रोथ में 17 प्रतिशत का योगदान देगा, जो अमेरिका से भी ज्यादा है।

US टैरिफ का झटका, लेकिन सर्विस सेक्टर ने संभाला मोर्चा

2025 के दूसरे हिस्से में अमेरिका ने 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिए, जिससे भारत के निर्यात में 25 प्रतिशत की भारी गिरावट आ गई। टेक्सटाइल, फार्मा और ऑटो पार्ट्स जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था ने हार नहीं मानी। सर्विस सेक्टर ने कमाल कर दिखाया – IT, सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट और फाइनेंशियल सर्विसेज में बूम आया, जो कुल GDP का 53.6 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है। वैश्विक कंपनियां भारत को ‘बैक ऑफिस’ के रूप में देख रही हैं, जिससे रेमोट वर्क और डिजिटल सर्विसेज में इजाफा हुआ।

इसके अलावा सरकार की फिस्कल सपोर्ट क्षमता ने कमजोर वर्ग को सहारा दिया। बढ़ती वैश्विक खाद्य कीमतों का असर कम करने के लिए सब्सिडी, फ्री राशन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) जैसे कदम उठाए गए। ऊर्जा संकट से निपटने के लिए भारत ने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाई, रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाई और घरेलू संसाधनों का बेहतर उपयोग किया।

आखिर भारत की इकोनॉमी इतनी मजबूत क्यों?

ESCAP के मैक्रोइकोनॉमिक पॉलिसी डायरेक्टर हमजा मलिक ने रिपोर्ट में खुलासा किया कि बाहरी झटकों के बावजूद भारत की ग्रोथ बरकरार है क्योंकि इसकी आंतरिक उत्पादकता लगातार सुधर रही है। “किसी भी अर्थव्यवस्था की लंबी दौड़ उत्पादकता पर टिकी होती है, और भारत इसमें अव्वल है,” मलिक ने कहा। भारत की 1.4 अरब की आबादी एक बड़ा फायदा है- इसमें लाखों युवा श्रमिकों को प्रोडक्टिव सेक्टरों जैसे मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और टेक में शामिल करने की क्षमता है।

PLI स्कीम, मेक इन इंडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर पुश ने उत्पादकता को बूस्ट दिया। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती ने आश्चर्यजनक भूमिका निभाई – अच्छी मानसून, MSP बढ़ोतरी और डिजिटल मार्केटिंग ने किसानों को सशक्त बनाया। GST कटौती ने टैक्स रेशनलाइजेशन के जरिए मांग को और तेज किया। मलिक का मानना है कि ये फैक्टर्स भारत को ‘सुपरफास्ट’ बनाए रखेंगे, भले ही ICRA जैसी एजेंसियां ईरान युद्ध के लंबे असर से 7.1 प्रतिशत ग्रोथ पर चेतावनी दें।

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Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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