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Delhi-Dehradun Expressway: इन किसानों की खुल गई किस्मत! दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के किनारे जमीन है तो घर में बरसेगा पैसा ही पैसा

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उद्घाटित 213 किमी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे किसानों के लिए वरदान। यात्रा समय 6 से घटकर 2.5 घंटे, फसलें ताजा दिल्ली मंडी पहुंचेंगी। बागपत-शामली में जमीन मूल्य 30% उछाल, एग्रो-पार्क व रोजगार बढ़े। ग्रामीण आय दोगुनी, बिचौलिए खत्म।

By Pinki Negi

Delhi-Dehradun Expressway: इन किसानों की खुल गई किस्मत! दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के किनारे जमीन है तो घर में बरसेगा पैसा ही पैसा

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लाखों किसानों के लिए समृद्धि का नया गलियारा साबित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में उद्घाटित यह 213 किलोमीटर लंबा इकोनॉमिक कॉरिडोर दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर बागपत, शामली, सहारनपुर होते हुए देहरादून तक पहुंचता है, जो यात्रा के समय को 5-6 घंटे से घटाकर महज ढाई घंटे कर देता है।

अब तक खराब सड़कों और जाम से जूझते किसान अपनी फसलें दिल्ली की आजादपुर मंडी तक ताजा पहुंचा सकेंगे, जिससे उनकी आय में जबरदस्त उछाल आएगा। यह प्रोजेक्ट न केवल लॉजिस्टिक्स लागत घटा रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे रहा है।

दिल्ली की मंडी तक पहुंच आसान

इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा लाभ बागवानी और नकदी फसलों पर निर्भर किसानों को मिल रहा है। सहारनपुर, बागपत, शामली और मुजफ्फरनगर के हजारों किसान पहले अपनी सब्जियां, फल और फूल रास्ते में खराब होने से करोड़ों का नुकसान झेलते थे। अब बेहतर कनेक्टिविटी से ये उत्पाद बिना रुकावट दिल्ली-NCR के बाजारों तक पहुंचेंगे। उदाहरणस्वरूप, हर्षिल के सेब, जोशीमठ की राजमा, चकराता के बुरांश फल और पुरोला का लाल चावल अब कम समय में बड़े शहरों की मंडियों में ताजा बिकेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कहा कि यह कॉरिडोर किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ेगा, बिचौलियों की भूमिका कम कर शुद्ध मुनाफा बढ़ाएगा। लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में 30-40% की कमी से किसानों का शुद्ध लाभ दोगुना हो सकता है।

जमीन मूल्य में बूम

एक्सप्रेसवे के किनारे जमीनों की कीमतों में बूम आ गया है। बागपत के 31 गांवों से गुजरने वाले इस कॉरिडोर ने अधिग्रहीत जमीन के मालिकों को उचित मुआवजा दिया, जिससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। जहां पहले एकड़ जमीन के लाखों रुपये मिलते थे, अब बाजार मूल्य 15-30% तक उछल चुका है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, गाजियाबाद, बागपत और सहारनपुर जैसे इलाकों में वेयरहाउस, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और एग्रो-पार्क बन रहे हैं।

ये सुविधाएं किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए कलेक्शन सेंटर देंगी, साथ ही युवाओं को स्थानीय रोजगार प्रदान करेंगी। कॉरिडोर के आसपास अब तक 50 से अधिक उद्योग स्थापित हो चुके हैं, जो ग्रामीण इकोनॉमी को पंख दे रहे हैं।

नए रोजगार के अवसर

कनेक्टिविटी सुधार से किसान पारंपरिक फसलों से हटकर हाई-वैल्यू क्रॉप्स की ओर मुड़ रहे हैं। स्ट्रॉबेरी, मशरूम, ब्रोकली जैसी महंगी सब्जियां अब दिल्ली के मॉल्स और एक्सपोर्टर्स तक सुरक्षित पहुंचेंगी। कृषि विशेषज्ञ आसानी से गांवों तक पहुंच सकेंगे, जिससे आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज और खाद की जानकारी किसानों को घर बैठे मिलेगी। इसके अलावा, 5 टोल प्लाजा और 7 इंटरचेंज से यात्रा सुगम हुई है, हालांकि ओवरस्पीडिंग पर ऑटोमेटिक चालान की व्यवस्था सख्ती बरत रही है। टोल शुल्क करीब 675 रुपये है, लेकिन व्यापारिक लाभ इससे कहीं ज्यादा।

किसानों की बदलती जिंदगी

कुल मिलाकर, यह एक्सप्रेसवे किसानों के घरों में पैसा बरसाने वाला वरदान है। बागपत के किसान रामस्वरूप कहते हैं, “पहले ट्रक जाम में फसल सड़ जाती थी, अब दिल्ली मंडी सीधे घर के पास है।” भविष्य में लॉजिस्टिक्स हब और पर्यटन से जुड़े अवसरों से ग्रामीण जीवनशैली बदलेगी। हालांकि, कुछ इलाकों में सर्विस रोड की मांग उठ रही है, लेकिन कुल प्रभाव सकारात्मक है। यह प्रोजेक्ट विकसित भारत की मिसाल बन रहा है, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर किसानों की तकदीर बदल रहा है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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