
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के गढ़ा गांव में बसा बागेश्वर धाम भक्तों का एक प्रमुख तीर्थस्थल बन चुका है। यहां के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की संस्था ‘श्री बागेश्वर जन सेवा समिति’ (जिसे बागेश्वर धाम जन सेवा समिति भी कहा जाता है) के लिए 15-16 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक दिन आया। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने इस संस्था को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम या FCRA के तहत पूर्ण पंजीकरण प्रदान कर दिया।
इससे अब दुनिया भर के भक्त- चाहे वे दुबई, लंदन, अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया में रहते हों- सीधे संस्था के नामित बैंक खाते में दान भेज सकेंगे। पहले यह प्रक्रिया जटिल थी, जहां हर विदेशी योगदान के लिए अलग-अलग अनुमति लेनी पड़ती। यह मंजूरी पांच वर्ष के लिए वैध है और संस्था को वैश्विक स्तर पर अपनी गतिविधियां तेज करने का सुनहरा अवसर प्रदान करती है।
FCRA का महत्व और प्रक्रिया
FCRA क्या है और क्यों इतना महत्वपूर्ण? यह कानून 1976 में बना था, जिसका उद्देश्य विदेशी फंडिंग के जरिए भारत में राजनीतिक या सामाजिक अस्थिरता को रोकना है। कोई भी धार्मिक, शैक्षिक या सामाजिक संस्था विदेश से पैसा लेने के लिए गृह मंत्रालय से इस ‘लाइसेंस’ की अनिवार्य आवश्यकता होती है। आवेदन प्रक्रिया कठिन होती है- वित्तीय विवरण, गतिविधियों का ब्योरा, पारदर्शिता का प्रमाण और सुरक्षा जांच शामिल।
बागेश्वर धाम ने इसे हासिल करने में सफलता पाई, जो करीब 16,000 पंजीकृत संस्थाओं में से एक बन गई। वर्तमान में ये संगठन सालाना लगभग 22,000 करोड़ रुपये का विदेशी चंदा प्राप्त करते हैं। धीरेंद्र शास्त्री की संस्था, जो धार्मिक (हिंदू), सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक कार्यों में सक्रिय है, अब इस पूल का हिस्सा है।
धीरेंद्र शास्त्री की वैश्विक लोकप्रियता
29 वर्षीय धीरेंद्र शास्त्री की लोकप्रियता का आलम यह है कि उनके सत्संग और कथाएं लाखों को खींचती हैं। मध्य प्रदेश से निकलकर वे राष्ट्रीय स्तर पर छाए, फिर विदेशों में भी। दुबई, यूएई और अमेरिका में उनके कार्यक्रमों में NRIs की भारी भीड़ उमड़ती है। उनकी वेबसाइट पर पहले से चंदा जुटाने का सेक्शन था, लेकिन घरेलू दान तक सीमित। अब विदेशी फंड से सामाजिक कार्यों को बल मिलेगा।
संस्था निर्धन कन्याओं के सामूहिक विवाह आयोजित करती है, अन्नपूर्णा रसोई से गरीबों को मुफ्त भोजन वितरित करती है, शिक्षा को बढ़ावा देती है और सनातन धर्म का प्रचार करती है। छतरपुर और आसपास के क्षेत्रों में ये प्रयास पहले से प्रभावी हैं, लेकिन अब बड़े पैमाने पर विस्तार संभव। शास्त्री अक्सर ‘हिंदू राष्ट्र’ और सनातन जागरण की बात करते हैं- यह फंडिंग उनके वैश्विक मिशन को मजबूती देगी, जैसे विदेशों में आश्रम या सेवा केंद्र स्थापित करना।
कड़े नियम और चुनौतियां
हालांकि, यह मंजूरी जिम्मेदारी का बोझ भी लाती है। FCRA के कड़े नियमों के तहत सभी विदेशी चंदा केवल दिल्ली के SBI मुख्यालय में नामित FCRA खाते में ही जमा होगा। संस्था को हर पैसों का स्रोत (किस देश से, किसने भेजा), उपयोग (किस प्रोजेक्ट पर) और वार्षिक रिपोर्ट सरकार को देनी होगी। ऑडिट अनिवार्य है और किसी भी उल्लंघन- जैसे गलत उपयोग या अपारदर्शिता- पर लाइसेंस रद्द हो सकता है।
हाल के वर्षों में सैकड़ों संस्थाओं के FCRA रद्द हुए हैं। बागेश्वर धाम को पारदर्शिता बनाए रखनी होगी, खासकर जब कुछ आलोचक शास्त्री के भड़काऊ बयानों (जैसे हिंदू राष्ट्र) को लेकर सवाल उठाते हैं। सोशल मीडिया पर ‘फॉरेन फंडिंग’ को लेकर बहस छिड़ गई है, कुछ इसे सकारात्मक बताते हैं तो कुछ संदेहास्पद।
भविष्य की संभावनाएं
कुल मिलाकर, यह फैसला बागेश्वर धाम के लिए मील का पत्थर है। धीरेंद्र शास्त्री का ‘ग्लोबल मिशन’ अब वित्तीय रूप से मजबूत होगा, सामाजिक कार्य तेज होंगे। लेकिन सफलता पारदर्शिता पर टिकी है। भक्तों में उत्साह है, जबकि पर्यवेक्षक नजर रखे हुए—क्या यह धार्मिक उत्थान का प्रतीक बनेगा या विवादों का कारण? समय जवाब देगा।









