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CBSE 12वीं रिजल्ट: परसेंटेज निकालने का सही तरीका क्या है? जानें क्या ‘Additional Subject’ के नंबर भी जुड़ते हैं?

सीबीएसई 12वीं रिजल्ट में 'बेस्ट ऑफ 5' नियम से परसेंटेज निकालें- अनिवार्य भाषा समेत पांच बेहतरीन विषयों के 500 अंकों पर। एडिशनल सब्जेक्ट कम स्कोर वाले मुख्य विषय को रिप्लेस कर 5-10% बढ़ा सकता है, जैसे मैथ्स 70 को PE 92 से बदलें। CGPA को 9.5 से गुणा करें। कॉलेज एडमिशन के लिए मार्कशीट चेक करें।

By Pinki Negi

CBSE 12वीं रिजल्ट: परसेंटेज निकालने का सही तरीका क्या है? जानें क्या 'Additional Subject' के नंबर भी जुड़ते हैं?

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के कक्षा 12वीं के परिणाम घोषणा के बाद लाखों छात्रों की निगाहें अपनी मार्कशीट पर टिकी हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बोर्ड खुद कोई डिवीजन या मेरिट लिस्ट जारी नहीं करता? छात्रों को अपनी परसेंटेज खुद ही निकालनी पड़ती है, और यहां ‘बेस्ट ऑफ 5’ नियम सबसे बड़ा सहारा बनता है।

यह नियम न केवल सरल है, बल्कि एडिशनल सब्जेक्ट के मार्क्स को शामिल कर आपके स्कोर को चमत्कारिक रूप से बढ़ा सकता है। आज हम इसकी गहराई से पड़ताल करते हैं, ताकि आप कॉलेज एडमिशन या जॉब फॉर्म भरते समय भ्रमित न हों।

‘बेस्ट ऑफ 5’ फॉर्मूला की बुनियाद

सीबीएसई का ‘बेस्ट ऑफ 5’ फॉर्मूला छात्रों के लिए वरदान साबित होता है। मान लीजिए आपके पास पांच मुख्य विषय हैं-जैसे अंग्रेजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स और फिजिकल एजुकेशन। गणना बिल्कुल सीधी है: इन पांचों विषयों के थ्योरी और प्रैक्टिकल मार्क्स को जोड़ें, जो कुल 500 अंकों के होते हैं। फिर फॉर्मूला लगाएं- परसेंटेज = (कुल प्राप्त अंक / 500) × 100। उदाहरण के लिए, अगर आपको 420 अंक मिले, तो आपका स्कोर होगा 84 प्रतिशत।

यह तरीका इसलिए लोकप्रिय है क्योंकि बोर्ड हर विषय को बराबर वेटेज देता है, और कोई न्यूनतम पासिंग मार्क्स की बाध्यता परसेंटेज कैलकुलेशन में नहीं आती। लेकिन असली खेल तब शुरू होता है जब छठा विषय, यानी एडिशनल सब्जेक्ट, मैदान में कूदता है।

एडिशनल सब्जेक्ट: स्कोर बढ़ाने का राज

कई छात्रों का सवाल रहता है- क्या ‘एडिशनल सब्जेक्ट’ के नंबर जुड़ते हैं? जवाब है हां, लेकिन शर्तों के साथ। सीबीएसई का स्पष्ट नियम है कि अगर आपके पास छह विषय हैं, तो परसेंटेज बेस्ट 5 विषयों के आधार पर निकाली जाती है। यहां अनिवार्य भाषा, जैसे अंग्रेजी या हिंदी, हमेशा शामिल होती है। बाकी चार स्पॉट के लिए वे विषय चुने जाते हैं जिनमें आपके अंक सबसे ऊंचे हों।

अगर आपका कोई मुख्य इलेक्टिव सब्जेक्ट, जैसे मैथ्स में 70 अंक हैं और एडिशनल सब्जेक्ट जैसे इंफॉर्मेटिक्स प्रैक्टिसेज या फिजिकल एजुकेशन में 92 अंक, तो कम स्कोर वाले मैथ्स को हटा दें। एडिशनल के 92 अंक ले आएं, और आपका कुल स्कोर उछलकर 500 में 442 हो सकता है- यानी 88.4 प्रतिशत! यह रिप्लेसमेंट नियम छात्रों को रणनीतिक लाभ देता है, खासकर साइंस स्ट्रीम में जहां कोर सब्जेक्ट्स कठिन होते हैं।

विभिन्न स्ट्रीम्स में नियम की लागूता

इस नियम की खूबी यह है कि यह लचीला है। कॉमर्स स्टूडेंट्स के लिए बिजनेस स्टडीज या अकाउंटेंसी में कमजोरी को एडिशनल जैसे होम साइंस से कवर किया जा सकता है, जबकि आर्ट्स में हिस्ट्री या पॉलिटिकल साइंस को म्यूजिक या पेंटिंग से बदल सकते हैं। लेकिन सावधानी बरतें-एडिशनल सब्जेक्ट भाषा श्रेणी का नहीं होना चाहिए, वरना वह अलग गिना जाएगा।

मार्कशीट पर यह स्पष्ट लिखा होता है कि कौन से अंक ‘बेस्ट ऑफ 5’ में आए। पुराने छात्रों के अनुभव बताते हैं कि इस ट्रिक से 5-10 प्रतिशत तक का फर्क पड़ सकता है, जो टॉप कॉलेजों के कटऑफ में game-changer साबित होता है।

CGPA से परसेंटेज रूपांतरण

अब बात करते हैं उन छात्रों की जो ग्रेडिंग सिस्टम में हैं। हालांकि सीबीएसई अब मुख्य रूप से मार्क्स बेस्ड रिजल्ट देता है, लेकिन अगर आपका CGPA उपलब्ध है, तो परसेंटेज निकालना आसान है। फॉर्मूला है- कुल CGPA को 9.5 से गुणा करें। जैसे, 9.0 CGPA पर 85.5 प्रतिशत मिलेगा। यह विधि सरकारी दिशानिर्देशों पर आधारित है और कई एंट्रेंस एग्जाम जैसे JEE या NEET में स्वीकार्य है। लेकिन याद रखें, हर संस्थान का अपना नियम हो सकता है।

कुछ DU कॉलेज ‘बेस्ट ऑफ 4’ मांगते हैं, जहां एक भाषा प्लस बेस्ट तीन सब्जेक्ट्स गिने जाते हैं। सरकारी नौकरियों के फॉर्म में कभी सभी मुख्य विषय, तो कभी बेस्ट 5 ही देखा जाता है। इसलिए, मार्कशीट को ध्यान से पढ़ें और जरूरत पड़ने पर बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in चेक करें।

2026 रिजल्ट सत्र की प्रासंगिकता

2026 के रिजल्ट सत्र में यह मुद्दा और प्रासंगिक हो गया है, क्योंकि कॉम्पिटिशन पहले से कठिन है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इम्प्रूवमेंट एग्जाम या कंपार्टमेंट केस में भी यही नियम लागू होता है, लेकिन री-इवैल्यूएशन के बाद दोबारा कैलकुलेट करें। अभिभावक संगठनों का कहना है कि बोर्ड को परसेंटेज कैलकुलेटर ऐप लॉन्च करना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बढ़े। फिलहाल, छात्र ऑनलाइन टूल्स या स्प्रेडशीट से खुद गणना कर रहे हैं।

संक्षेप में, ‘बेस्ट ऑफ 5’ और एडिशनल सब्जेक्ट का सही उपयोग आपकी प्रोफाइल को मजबूत बनाता है। चाहे साइंस हो या कॉमर्स, यह रूल समान रूप से लागू होता है। अगर आप स्ट्रीम-वाइज डिटेल चाहें, तो बोर्ड गाइडलाइंस फॉलो करें। सफलता की कुंजी सतर्कता में है- अभी गणना करें, भविष्य सुरक्षित रखें। (

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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