
मध्य पूर्व के राजनीतिक तनाव में जैसे‑जैसे उथल‑पुथल बढ़ रही है, वैसे‑वैसे सोने और चांदी की कीमतों में भी भारी उतार‑चढ़ाव दिख रहा है। पिछले दो दिन में सोने की ट्रेडिंग में भारी गिरावट के बाद सोमवार को फिर तेजी लौट आई, जबकि चांदी में भी ड्रामेटिक बदलाव के साथ दोनों धातु निवेशकों के लिए गेम शेंगिंग मोड में आ गई हैं।
गिरावट के बाद सोने में तेजी
सोमवार को बाजार में सोना लगभग गिरता ही दिख रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से होर्मुज जलडमरूमार्ग (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को ब्लॉक करने की बात से जियोपॉलिटिकल तनाव और बढ़ा, जिसके बावजूद सोने के भाव में गिरावट के संकेत साफ थे। भारत में MCX पर सोने का भाव 0.44 फीसदी यानी लगभग 699 रुपये गिरकर 5 जून डिलीवरी वाले सोने के लिए 1,51,983 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। इस दौरान ग्लोबल मार्केट में भी कीमतें नीचे खिसकीं, जिससे निवेशकों में थोड़ा दबाव और उलझन दोनों बढ़ी।
लेकिन मंगलवार, 14 अप्रैल को पूरा सीन बदल गया। ग्लोबल बाजार में सोने की कीमतों में वापसी हुई। COMEX गोल्ड की कीमत लगभग 23 डॉलर तक ऊपर चढ़ गई, जबकि एक दिन में लगभग 1% की तेजी देखी गई। यह देखते हुए कि 29 जनवरी को सोने ने रिकॉर्ड हाई 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल छुआ था, आज की कीमत अभी भी उससे काफी सस्ती है, जिससे छोटे निवेशकों के लिए खरीदारी का अपेक्षाकृत बेहतर मौका माना जा रहा है।
चांदी में भगदड़, फिर तेजी
चांदी का मार्केट इन दिनों सोने से भी ज्यादा वोलेटाइल दिख रहा है। हाल के दिनों में चांदी में बड़ी गिरावट दर्ज हुई, जिसमें 2,775 रुपये (लगभग 1.14%) की गिरावट के साथ चांदी का भाव 2,40,499 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। यह लेवल पिछले हाई से काफी नीचे है, क्योंकि चांदी ने भी फरवरी‑मार्च के आसपास करीब 4.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का उच्च स्तर छुआ था।
सोमवार को सोने में हजार रुपये से अधिक की गिरावट के बाद चांदी भी दबी हुई थी, लेकिन मंगलवार को दोनों धातुओं में साथ‑साथ तेजी लौटी। COMEX सिल्वर कीमत 76.49 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई, जो लगभग 1% की बढ़त के साथ थी। इससे साफ है कि चांदी अभी भी उसी तेज उतार‑चढ़ाव के मोड में है, जहां एक दिन गिरावट दूसरे दिन तेजी बदल‑बदल कर आ रही है।
क्यों बदल रही कीमतें?
सोने और चांदी पर असर डालने वाले कारकों में इन दिनों सबसे आगे हैं: अमेरिका और ईरान के बीच की हालिया बातचीत, होर्मुज जलडमरूमार्ग पर चल रहा संकट, तथा कच्चे तेल की कीमतों में उतार‑चढ़ाव। वैश्विक बाजार में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर जैसी बातचीत की आशंका और कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी स्थिरता ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को खींचा, जिससे तेजी वापस लौटी।
साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में उतार‑चढ़ाव और डॉलर‑ब्याज दरों की गतिविधियां भी सोने व चांदी की कीमतों को खींच और खींच रही हैं। जब डॉलर मजबूत होता है या ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो सोना सस्ता लगता है, और जब जियोपॉलिटिकल रिस्क व तेल‑महंगाई बढ़ती है, सोना ज्यादा आकर्षक लगने लगता है। इस खेल के बीच चांदी अपने इंडस्ट्रियल यूज और ट्रेडिंग वोलुम के कारण और भी ज्यादा ड्रामेटिक रूप से बदल रही है।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
अगर आप निवेश की दृष्टि से देखें, तो हाल के दिनों की कीमतों के अनुसार सोना अभी अपने ऑल टाइम हाई से काफी सस्ता है, जबकि चांदी भी पिछले हाई से नीचे घूम रही है। इस स्थिति में अक्षय तृतीया और आने वाले त्योहारों के समय खरीदारी के लिए यह एक रिलेटिव गोल्डन चांस माना जा सकता है, लेकिन साथ ही यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि बाजार अभी भी बहुत वोलेटाइल है और रोज भारी उतार‑चढ़ाव देखा जा सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर की स्थानीय ज्वैलर्स और MCX रेट्स से लाइव कीमत जरूर चेक करें और लंबी अवधि के निवेश की रणनीति पर ज्यादा भरोसा रखें।









