
जब हम हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते हैं, तो नजर अक्सर कवरेज की राशि और बीमारियों की लिस्ट पर टिक जाती है। लेकिन एक छिपा कारक आपकी जेब को सीधे प्रभावित करता है – आपका शहर। दिल्ली का निवासी लखनऊ वाले से 50% तक ज्यादा प्रीमियम चुकाएगा, वही 10 लाख का कवरेज लेने पर। इंश्योरेंस कंपनियां इसे ‘ज़ोनल प्राइसिंग’ कहती हैं, जहां मेट्रो शहरों को ज़ोन-1 में डालकर ऊंचा चार्ज वसूलती हैं।
क्या है ज़ोनल प्राइसिंग का लॉजिक?
ज़ोनल प्राइसिंग का लॉजिक बिल्कुल साफ है। दिल्ली, मुंबई जैसे ज़ोन-1 शहरों में अपेंडिक्स सर्जरी का खर्च 2 लाख रुपये से ज्यादा चढ़ जाता है, जबकि लखनऊ जैसे टियर-2 शहर में यह 80,000 से 1.2 लाख तक सीमित रहता है। डॉक्टर फीस, ऑपरेशन थिएटर रेंट और प्राइवेट हॉस्पिटल्स की ऊंची दरें क्लेम अमाउंट बढ़ाती हैं।
कंपनियां पिछले क्लेम डेटा से जोखिम आंकती हैं – दिल्ली में प्रदूषण से जुड़ी बीमारियां ज्यादा होने से दावे बढ़ते हैं, लिहाजा प्रीमियम भी। मिसाल लें: 25 साल के व्यक्ति का 10 लाख कवर दिल्ली में सालाना 15,111 रुपये का पड़ता है, लखनऊ में महज 10,012।
शहर बदलने पर प्रीमियम हाइक
शहर बदलने पर मुसीबत और बढ़ जाती है। लखनऊ में सस्ती पॉलिसी लेकर दिल्ली शिफ्ट हुए तो एड्रेस अपडेट न करने पर क्लेम टाइम को-पेमेंट का झटका लगेगा। 10-20% बिल खुद भरना पड़ेगा, क्योंकि कम जोखिम वाले ज़ोन की पॉलिसी महंगे इलाके में इस्तेमाल हुई। कई बार लोग छिपाते हैं, लेकिन नेटवर्क हॉस्पिटल में लोकेशन साफ हो जाती है। ज़ोन अपग्रेड रिन्यूअल पर 10-20% अतिरिक्त फीस के साथ संभव है, जो पूरे देश में कवर देता है।
मेट्रो शहरों की सुविधाएं और जोखिम
मेट्रो शहरों की चकाचौंध के पीछे गुणवत्ता का लालच भी है। यहां स्पेशलिस्ट डॉक्टर और लेटेस्ट मशीनें मिलती हैं, लेकिन बिल भारी। छोटे शहरों में सुविधाएं कम, खर्च भी कम। कंपनियां पिनकोड-वाइज डेटा से रेट तय करती हैं – अगर इलाके में क्लेम रेट हाई, प्रीमियम ऑटोमैटिक बढ़ता है। लखनऊ जैसे शहरों में स्टार हेल्थ या आदित्य बिड़ला प्लान 673-960 रुपये मासिक से शुरू, दिल्ली में दोगुना।
ग्राहकों के लिए जरुरी सलाह
ग्राहक सतर्क रहें। पॉलिसी लेते वक्त को-पेमेंट क्लॉज पढ़ें, ज़ोन-न्यूट्रल प्लान चुनें – ये थोड़े महंगे लेकिन कहीं भी इलाज की आजादी देते हैं। शिफ्टिंग पर तुरंत कंपनी को बताएं, वरना क्लेम रिजेक्ट का रिस्क। ऑनलाइन कोट कम्पेयर करें, सेक्शन 80D टैक्स बेनिफिट लें। छोटे शहर से मेट्रो जाते हैं तो 20-50% प्रीमियम हाइक मान लें।
आजकल ज़ोन-न्यूट्रल विकल्प बढ़ रहे हैं, लेकिन बेस प्रीमियम हाई। सही चॉइस से जेब और सेहत दोनों बचाएं। लोकेशन अब सिर्फ GPS पॉइंट नहीं, प्रीमियम डिसाइडर भी बन चुकी है।









