
प्राचीन काल की ज्ञान‑पीठ नालंदा अब एक बार फिर से भारत की शिक्षा‑जगत की धड़कन बन गई है। बिहार के नालंदा जिले के राजगीर में स्थित नालंदा विश्वविद्यालय भारत सरकार द्वारा 2014 में “नए नालंदा विश्वविद्यालय” के रूप में पुनर्जीवित किया गया एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जिसे भारत की संसद द्वारा 2010 में पारित अधिनिमयन के जरिए वैधानिक मान्यता मिली।
800 से अधिक वर्षों के लंबे इंतजार के बाद इस विश्वविद्यालय को अपनी ऐतिहासिक विरासत का आधुनिक स्वरूप दिया गया, जिसका भव्य उद्घाटन 19 जून 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। अब यहां सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि आधुनिक रिसर्च, इंटरनेशनल रिलेशन, इकोलॉजी और बिज़नेस जैसे क्षेत्रों में भी अकादमिक चर्चा और ज्ञान निर्माण हो रहा है।
नालंदा में कौन‑कौन से कोर्स पढ़ाए जा रहे हैं?
नालंदा विश्वविद्यालय अभी ज्यादातर पोस्ट‑ग्रेजुएट (M.A./M.Sc.) और डॉक्टोरल लेवल (PhD) के कार्यक्रमों पर केंद्रित है। यहां अंडरग्रेजुएट‑लेवल (बीए/बीकॉम जैसे) रेगुलर डिग्री कोर्स अभी नहीं हैं, बल्कि फोकस रिसर्च और इंटरडिसिप्लिनरी अध्ययन पर ज्यादा है। यहां M.A. और M.Sc. के तहत जैसे बौद्ध अध्ययन, दर्शन और तुलनात्मक धर्म, इतिहास अध्ययन, अंतरराष्ट्रीय संबंध व शांति अध्ययन, धर्म‑संबंधी और इतिहासकारीक अध्ययन, इकोलॉजी व पर्यावरण अध्ययन, इकोनॉमिक्स और कुछ विशिष्ट मैनेजमेंट-ओरिएंटेड कोर्स जैसे MBA in Sustainable Development and Management जैसे प्रोग्राम चल रहे हैं।
इन्हीं तरह के अंदर PhD और विभिन्न शोध अनुशासनों में डॉक्टरेट प्रोग्राम भी उपलब्ध हैं। साथ ही, विभिन्न भाषाओं और विशेष विषयों पर कुछ छोटे अवधि के सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स भी चलाए जाते हैं, जो बहुत कम अवधि में निश्चित विषय‑क्षेत्र में अतिरिक्त योग्यता देने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं।
एडमिशन कैसे और कब मिलता है?
नालंदा विश्वविद्यालय में एडमिशन पूरी तरह ऑनलाइन और पेपरलेस है। यहां पोस्ट‑ग्रेजुएट और PhD के अधिकांश कोर्सों में प्रवेश मुख्य रूप से मेरिट‑आधारित चयन प्रक्रिया और व्यक्तिगत साक्षात्कार के जरिए होता है, जिसे आमतौर पर मेरिट बेस्ड एडमिशन कहा जाता है। अधिकांश शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए उम्मीदवारों को अपनी ग्रेजुएशन डिग्री, अच्छे मार्क्स और स्पष्ट रिसर्च या अध्ययन‑संबंधी उद्देश्यों को दर्शाते हुए एक स्टेटमेंट ऑफ पर्पस (SOP) जमा करना होता है। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता, SOP की गुणवत्ता और रेफ़री रिकमेंडेशन देखकर एक शॉर्टलिस्टेड लिस्ट जारी करता है, जिसके अगले चरण में वीडियो कॉल या ऑनलाइन इंटरव्यू के माध्यम से फाइनल सिलेक्शन होता है।
MBA और कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए अलग‑अलग राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय परीक्षा स्कोर जैसे MAT, CAT या XAT जैसे टेस्ट को मान्यता दी जाती है, जिसे आवेदन के दौरान अटैच करना होता है। PhD के लिए शॉर्टलिस्टिंग लगभग पूरी तरह रिसर्च प्रपोज़ल, लेखन नमूने, पिछला शोध और साक्षात्कार के आधार पर होती है, जिसमें छात्र की रिसर्च‑सोच और दिशा ज्यादा जरूरी मानी जाती है।
आवेदन की प्रक्रिया और फीस
शैक्षणिक सत्र 2026‑27 के लिए नालंदा विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया जून 2026 से शुरू होने की संभावना है, जिसके बाद क्लासेस अगस्त 2026 के आसपास शुरू हो सकते हैं। आवेदन के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले विश्वविद्यालय की ऑफिशियल वेबसाइट nalandauniv.edu.in पर जाना होगा, जहां “Admission” या “Apply here” सेक्शन पर क्लिक करके ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा। फॉर्म में आवश्यक शैक्षणिक दस्तावेज, फोटो, आईडी प्रूफ, अंग्रेजी टेस्ट स्कोर (जहां जरूरी हो), रेफ़री रिकमेंडेशन और SOP अटैच करने होते हैं। इसके बाद आवेदन शुल्क भरकर फॉर्म सबमिट करना होता है, जो भारतीय छात्रों के लिए आमतौर पर करीब 500 रुपये और विदेशी छात्रों के लिए लगभग 8 अमेरिकी डॉलर रखा जाता है। आवेदन के बाद उम्मीदवार को अपना प्रिंट‑आउट और PDF फाइल सुरक्षित रखनी चाहिए ताकि भविष्य में जांच या दस्तावेज प्रस्तुति की जरूरत पड़ने पर तैयार रह सके।
फीस के मामले में नालंदा विश्वविद्यालय ने अपेक्षाकृत किफायती दरें तय की हैं। भारतीय छात्रों के लिए दो साल के दो‑सेमेस्टर आधारित पोस्ट‑ग्रेजुएट कार्यक्रम (M.A./M.Sc. आदि) की कुल फीस लगभग 1.34 लाख रुपये तक रखी गई है, जबकि MBA जैसे प्रोग्राम में यह लगभग 2.22 लाख रुपये तक जा सकती है। PhD के लिए फीस लंबी अवधि के हिसाब से निर्धारित की जाती है, जो भारतीय छात्रों के लिए करीब 3.67 लाख रुपये के आसपास रखी गई है, जिसमें अलग से रहने और खाने का खर्च भी जोड़ा जाता है। विदेशी छात्रों के लिए फीस डॉलर में निर्धारित होती है, जो उनके लिए भी तुलनात्मक रूप से सस्ती मानी जाती है।









