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SSC Exam Update: एसएससी उम्मीदवारों की बल्ले-बल्ले! परीक्षा नियम में हुआ बड़ा बदलाव, गलत सवाल पर अब सबको मिलेंगे पूरे अंक

कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने 2026 से अपनी भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया बदल दी है। अब गलत, अस्पष्ट या तकनीकी रूप से गड़बड़ पाए गए सवालों को रद्द कर दिया जाएगा और उनके पूरे अंक सभी उम्मीदवारों को दिए जाएंगे। इसके लिए “Objection Management System” लागू किया गया है, जिसमें अस्थायी उत्तरकुंजी पर ठोस आपत्तियां ली जाएंगी और विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद अंतिम की जारी होगी।

By Pinki Negi

SSC Exam Update: एसएससी उम्मीदवारों की बल्ले-बल्ले! परीक्षा नियम में हुआ बड़ा बदलाव, गलत सवाल पर अब सबको मिलेंगे पूरे अंक

सरकारी नौकरी की कतार में लगे लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने अपनी भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है, जिससे अब गलत, अस्पष्ट या अधूरे सवालों की वजह से किसी उम्मीदवार को नुकसान उठाना नहीं पड़ेगा। आयोग ने घोषणा की है कि अगर परीक्षा में कोई सवाल गलत, अस्पष्ट या तकनीकी रूप से गड़बड़ पाया जाता है, तो उसे रद्द कर दिया जाएगा और उस प्रश्न के पूरे अंक सभी उम्मीदवारों को बोनस जैसा लाभ दे दिया जाएगा।

यह नियम साल 2026 से लागू हो रहा है और SSC की लगभग हर कंप्यूटर‑आधारित भर्ती परीक्षा- CGL, CHSL, MTS, Selection Post, CPO आदि पर लागू होगा।

विरोध, आरटीआई और अदालतों के बाद फैसला

महीनों तक छात्रों की शिकायतें, आरटीआई आवेदन और कई जगह अदालती टिप्पणियां आयोग के लिए एक कड़ी वास्तविकता बन चुकी थीं। चुन‑चुनकर पिछले कुछ सालों में SSC की कई परीक्षाओं में गलत सवाल, अस्पष्ट विकल्प, तकनीकी गड़बड़ी और answer key में खामियों को लेकर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किए थे। इसी पृष्ठभूमि में आयोग ने अब “Objection Management System” नामक एक नई आपत्ति प्रबंधन प्रणाली लागू करने का फैसला किया है, जिसका मकसद परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनाना है।

आंसर की पर आपत्ति का नया ढांचा

परीक्षा खत्म होने के बाद SSC पहले प्रोविजनल (अस्थायी) आंसर की जारी करेगा। उम्मीदवारों को अपनी मर्जी से उस आंसर की पर आपत्ति दर्ज करने का मौका मिलेगा। यह आपत्तियां ऑनलाइन पोर्टल के जरिए विषय‑विशेषज्ञों की समीक्षा के लिए जाएंगी, जो उन प्रश्नों की जांच करेंगे जिन पर छात्रों ने ठोस तार्क और संदर्भ के साथ आपत्ति दर्ज की होगी। इस प्रक्रिया के बाद ही अंतिम आंसर की तैयार की जाकर जारी की जाएगी, जिससे उम्मीदवारों को एक स्पष्ट और निष्पक्ष मूल्यांकन की गारंटी दी जा सके।

गलत या अस्पष्ट सवाल पर “बोनस मार्क्स”

गलत या अस्पष्ट सवालों को लेकर नीति काफी साफ है। अगर कोई प्रश्न गलत है, उसका कोई सही विकल्प नहीं है या वह इतना अस्पष्ट है कि सही जवाब तय नहीं किया जा सकता, तो उस प्रश्न को पूरी तरह हटा दिया जाएगा। ऐसे प्रश्न के लिए अंक न केवल उन्हीं उम्मीदवारों को दिए जाएंगे जिन्होंने उसे हल किया है, बल्कि जिन्होंने उसे नहीं हल किया या गलत जवाब दिया है, उन्हें भी उस प्रश्न के पूरे अंक दिए जाएंगे। इससे किसी भी छात्र को गड़बड़ सवाल की वजह से रैंक या नंबर खोने का डर नहीं रहेगा।

एक से ज्यादा सही उत्तर और आउट‑ऑफ‑सिलेबस प्रश्न

सवाल में एक से ज्यादा सही उत्तर होने की स्थिति में भी नियम स्पष्ट है। ऐसे प्रश्नों में जिन उम्मीदवारों ने गलत विकल्प चुना होगा, उन पर नेगेटिव मार्किंग लागू रहेगी, जबकि जो भी सही विकल्प चुनेंगे, उन्हें पूरे अंक मिलेंगे। सिलेबस से बाहर के प्रश्नों के मामले में भी आयोग ने सख्त रवैया अपनाया है। यदि कोई सवाल पठार्थ्यक्रम से पूरी तरह बाहर निकलता है, तो उसे कैंसिल कर सभी अभ्यर्थियों को उसके पूरे अंक दिए जाएंगे, हालांकि आयोग का मानना है कि ऐसे मामले बहुत कम ही आते हैं।

भाषा विशेषज्ञता और ट्रांसलेशन की गारंटी

एक और महत्वपूर्ण नियम भाषा से जुड़ा है। SSC ने साफ‑साफ कह दिया है कि जिस भाषा का विकल्प अभ्यर्थी ने फॉर्म भरते समय चुना है, वही भाषा उसकी आधिकारिक परीक्षा भाषा होगी। प्रश्न हिंदी और अंग्रेजी दोनों में दिखेंगे, लेकिन उत्तर सिर्फ उसी भाषा में चुना गया विकल्प मान्य होगा। अगर किसी भाषा विशेष (जैसे किसी एक रीजनल लैंग्वेज वर्जन) में अनुवाद या लिखावट की गड़बड़ी मिलती है, तो उस विशेष भाषा के लिए प्रश्न‑मूल्यांकन अलग से किया जाएगा, ताकि एक भाषा की गलती दूसरी भाषा के उम्मीदवारों को नुकसान न पहुंचाए।

नए नियमों का भावी प्रभाव और छात्रों पर असर

इस बदलाव को अक्सर छात्रों की “लंबे संघर्ष की जीत” कहा जा रहा है। पहले गलत प्रश्नों की वजह से रैंक‑लिस्ट में अचानक बड़ा बदलाव आता था, जिसके पीछे आमतौर पर उस प्रश्न की वजह से बना अंक‑अंतर होता था। अब उसी प्रश्न को हटाकर सभी के लिए उसके अंक बराबर कर दिए जाएंगे, जिससे उम्मीदवारों को भरोसा रहेगा कि उनकी तैयारी और नेगेटिव मार्किंग का सही‑सही मूल्यांकन होगा, न कि किसी गलत प्रश्न की वजह से उनका भविष्य दांव पर लग जाए।

इस नए फ्रेमवर्क को लेकर शिक्षा विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि SSC ने न सिर्फ विश्वसनीयता बढ़ाई है, बल्कि छात्रों की जिम्मेदारी भी तय कर दी है- अब बस शिकायत जमा करने से ज्यादा, ठोस और तकनीकी तर्क के साथ आपत्ति दर्ज करने पर जोर दिया गया है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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