
अगर आप सैमसंग, वीवो या ओप्पो का नया स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो जेब तैयार रखिए। सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसा मामला गरमाया है, जो सीधे आपकी जेब काट सकता है। कस्टम विभाग ने लिथियम-आयन बैटरी पर टैक्स बढ़ाने की मांग उठाई है, जिससे मोबाइल फोन महंगे हो सकते हैं। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जे.के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने सैमसंग, वीवो, ओप्पो और एलजी जैसी कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
विवाद की असली जड़
यह विवाद 2025 के CESTAT फैसले से जन्मा। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि स्मार्टफोन और टैबलेट में लगी लिथियम-आयन बैटरी मोबाइल का अभिन्न हिस्सा हैं, इसलिए 12% IGST ही लागू होगा। लेकिन कस्टम विभाग राजी नहीं। उनका तर्क है कि बैटरी अलग उत्पाद है, जिसकी अपनी टैरिफ कैटेगरी है। इसे फोन का पुर्जा मानकर 28% टैक्स चुकाना चाहिए।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने कोर्ट में दलील दी कि ट्रिब्यूनल ने बैटरी की अलग पहचान को नजरअंदाज किया, जिससे राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है। कोर्ट ने सुनवाई को सहमति दी और कंपनियों का पक्ष सुने बिना फैसला टाल दिया।
उपभोक्ताओं पर सीधा असर
इस मामले का असर सीधा उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। बैटरी किसी भी स्मार्टफोन की लागत का 20-30% हिस्सा होती है। अगर 28% टैक्स लग गया, तो कंपनियां इसे ग्राहकों पर थोप देंगी। पहले से ही चिप किल्लत, AI की मांग से रैम-स्टोरेज महंगे होने और वैश्विक तनाव से सैमसंग गैलेक्सी A57 की कीमत 30% उछल चुकी है- अब 62,499 रुपये। वीवो T4 लाइट 9,999 से 13,999 रुपये हो गया। ओप्पो और शाओमी भी 40% तक महंगे। रिटेलर्स मानते हैं कि यह टैक्स बढ़ोतरी कीमतों को और 15-20% ऊपर धकेल देगी।
बाजार पर संकट के बादल
भारतीय स्मार्टफोन बाजार, जो 2025 में 250 मिलियन यूनिट बिक चुका, अब संकट में है। बजट सेगमेंट सबसे ज्यादा प्रभावित होगा, जहां 10,000 रुपये वाले फोन अब 14,000 के पार। विशेषज्ञ कहते हैं, कंपनियां पहले ही ‘AI टैक्स’ का बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं, क्योंकि Nvidia जैसे प्लेयर्स हाई-बैंडविड्थ मेमोरी चिप्स हड़प रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने पर मिड-रेंज फोन 20,000 से 25,000 रुपये तक महंगे हो सकते हैं।
ग्राहकों के लिए सलाह
उपभोक्ता क्या करें? फिलहाल पुराने स्टॉक या फ्लिपकार्ट-अमेजन डिस्काउंट चेक करें। लोकल ब्रांड्स जैसे लावा या इटेल जैसे विकल्प तलाशें। सरकार ने बजट 2026 में कुछ पार्ट्स पर ड्यूटी कम की, लेकिन यह टैक्स विवाद नया खतरा है। सैमसंग-वीवो जैसे दिग्गज अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे, पर ग्राहक अंतिम हारी। कोर्ट की अगली सुनवाई पर नजरें टिकी हैं- क्या सस्ते फोन का सपना टूटेगा?









