
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए आने वाला सोमवार, 13 अप्रैल, कई मायनों में अहम साबित हो सकता है। पाकिस्तान और चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर बन चुका है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसकी पकड़ मजबूत होती दिख रही है। ऐसे समय में 8th Pay Commission से जुड़ी तैयारियां तेज हो गई हैं, जिससे करोड़ों कर्मचारियों की इनकम, पेंशन और परचेजिंग पावर पर सीधा असर पड़ेगा।
NC-JCM की अहम बैठक और शेयर मेमोरेंडम
सोमवार को नेशनल काउंसिल ऑफ ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की ड्राफ्टिंग कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में 8वें वेतन आयोग के लिए जो साझा मेमोरेंडम (शेयर मेमोरेंडम) तैयार किया जा रहा है, उसे अंतिम रूप देने की कोशिश होगी। कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, यही मेमोरेंडम आगे चलकर आयोग के सामने कर्मचारियों की मांगों और अपेक्षाओं की ‘मुख्य चार्जशीट’ बनेगा।
सैलरी, पेंशन और सर्विस कंडीशंस पर फोकस
इस मीटिंग में फिटमेंट फैक्टर, विभिन्न भत्तों, बेसिक सैलरी स्ट्रक्चर, पेंशन और सर्विस कंडीशंस जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। इससे पहले 12 मार्च को भी एक बैठक हो चुकी है, जिसमें मोटे तौर पर प्रस्तावों की दिशा तय की गई थी और अब 13 अप्रैल को उन्हें फाइनल टच दिया जाएगा। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस बार कोशिश है कि अलग-अलग मुद्दों को बिखरे हुए तरीके से उठाने के बजाय एक समग्र पैकेज के रूप में आयोग के सामने रखा जाए, ताकि प्रभाव भी ज्यादा हो और फैसला भी स्पष्ट हो।
कर्मचारी संगठनों के सुझाव और 18 सवाल
सूत्रों के अनुसार, कर्मचारी संगठनों ने आयोग को कई जरूरी सुझाव भेजे हैं। NC-JCM के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने हाल में आयोग को पत्र लिखकर नौ अतिरिक्त मुद्दों को भी एजेंडा में शामिल करने की मांग की है। इससे पहले आयोग ने 18 सवालों की एक सूची जारी की थी और सभी पक्षों से उस पर लिखित राय मांगी थी। इन सवालों का फोकस broadly सैलरी, पेंशन, भत्ते, प्रमोशन, कॉन्ट्रैक्ट/टेम्परेरी स्टाफ की स्थिति और रिटायरमेंट के बाद की सुरक्षा पर है।
8वें वेतन आयोग का कार्यक्षेत्र और समय सीमा
सरकार पहले ही 8वें वेतन आयोग का गठन कर चुकी है और उसके ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ यानी नियम और कार्यक्षेत्र तय कर दिए गए हैं। आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय मिला है। इस अवधि में वह मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर, पे लेवल, ग्रेड पे पैटर्न, भत्तों, पेंशन स्कीम और अन्य सुविधाओं की सूक्ष्म समीक्षा करेगा। 7वें वेतन आयोग के बाद महंगाई, टैक्स स्ट्रक्चर और आर्थिक परिस्थितियों में काफी बदलाव हुए हैं, इसलिए कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बार स्ट्रक्चर को ज्यादा रियलिस्टिक और भविष्य की महंगाई को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।
फिटमेंट फैक्टर पर सबसे ज्यादा नजर
कर्मचारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर है। यही वह मल्टीप्लायर है, जिसके आधार पर नई बेसिक सैलरी तय होती है। 6वें और 7वें वेतन आयोग के अनुभव के बाद इस बार कर्मचारी संगठन फिटमेंट फैक्टर को 3.25 या उससे ज्यादा रखने की मांग कर रहे हैं, ताकि महंगाई की मार से कुछ राहत मिल सके और रियल इनकम यानी वास्तविक क्रय शक्ति में सुधार हो। यदि फिटमेंट फैक्टर उच्च स्तर पर तय होता है, तो बेसिक पे के साथ-साथ एरियर, पेंशन और अन्य लाभ भी स्वतः बढ़ेंगे।
DA, मर्जर और सोशल सिक्योरिटी की बहस
महंगाई भत्ता (DA) भी इस पूरी बहस का अहम हिस्सा है। फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों को 58% DA मिल रहा है, जिसे जल्द 60% तक बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। कर्मचारी संगठनों की एक बड़ी मांग यह भी है कि DA को बेसिक सैलरी में मर्ज किया जाए। अगर DA को बेसिक में जोड़ने का निर्णय होता है, तो बेसिक वेतन बढ़ जाएगा और उसके साथ HRA, TA, पेंशन, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट जैसे सभी फायदे अपने आप ऊंचे ब्रैकेट में पहुंच जाएंगे।
मजबूत अर्थव्यवस्था और कर्मचारियों की उम्मीद
भारत इस समय दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में है और सोने की खपत के मामले में ‘गोल्डन किंग’ की स्थिति में पहुंच चुका है। ऐसे में कर्मचारी वर्ग का तर्क है कि जब देश की आर्थिक स्थिति और टैक्स कलेक्शन मजबूत हो रहे हैं, तब सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को भी बेहतर सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक सैलरी मिलनी चाहिए। 13 अप्रैल की बैठक के बाद जो साझा मेमोरेंडम तैयार होगा, वही आगे 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों की बुनियाद रख सकता है और आने वाले वर्षों के लिए सरकारी नौकरी की पूरी तस्वीर बदल सकता है।









