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Most Educated State: केरल नहीं, अब यह राज्य है देश में सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा! यूपी-महाराष्ट्र को पछाड़ा; लिस्ट देख चौंक जाएंगे आप

मिजोरम ने केरल को पछाड़कर भारत का सबसे पढ़ा-लिखा राज्य बनने का गौरव हासिल कर लिया है। 2025 के आंकड़ों में इसकी साक्षरता दर 98.2% है, जबकि यूपी (72.6%) और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य पीछे हैं। पूर्वोत्तर की तेज प्रगति मिशनरी शिक्षा और सरकारी योजनाओं का कमाल है। यह बदलाव राष्ट्रीय असमानता उजागर करता है।

By Pinki Negi

Most Educated State: केरल नहीं, अब यह राज्य है देश में सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा! यूपी-महाराष्ट्र को पछाड़ा; लिस्ट देख चौंक जाएंगे आप

मिजोरम अब भारत का सबसे पढ़ा-लिखा राज्य बन चुका है। 2025 के आंकड़ों के अनुसार इसकी साक्षरता दर 98.2 प्रतिशत पहुंच गई है, जो लंबे समय से नंबर एक पर काबिज केरल की 95.3 प्रतिशत दर को पीछे धकेल देती है। यह बदलाव पूर्वोत्तर राज्यों की तेज प्रगति को दर्शाता है, जहां मिशनरी शिक्षा, सरकारी योजनाएं और समुदायिक प्रयासों ने चमत्कार कर दिखाया। आश्चर्यजनक रूप से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य अभी भी इस सूची में काफी नीचे हैं, जो राष्ट्रीय असमानता की गहरी खाई को उजागर करता है।

टॉप साक्षरता वाले राज्य

यह खबर तब आई जब हालिया रिपोर्ट्स ने मिजोरम को शीर्ष पर घोषित किया। पहले केरल अपनी साक्षरता के लिए मशहूर था, लेकिन मिजोरम ने 98.2 प्रतिशत के साथ पहला स्थान हासिल कर लिया। उसके ठीक पीछे लक्षद्वीप 97.3 प्रतिशत के साथ दूसरे नंबर पर है, जबकि नागालैंड तीसरे स्थान पर 95.7 प्रतिशत दर के साथ। केरल अब चौथे पायदान पर खिसक गया है।

मेघालय, त्रिपुरा, चंडीगढ़, गोवा, पुडुचेरी और मणिपुर भी टॉप-10 में शामिल हैं, जहां साक्षरता दर 92 से 94 प्रतिशत के बीच है। यह लिस्ट 2025 के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है, जो दिखाती है कि पूर्वोत्तर और छोटे राज्य बड़े राज्यों से कहीं आगे निकल चुके हैं।

मिजोरम की सफलता के पीछे कारण

मिजोरम की यह सफलता रातोंरात नहीं हुई। यहां ईसाई मिशनरियों ने दशकों पहले शिक्षा का बीज बोया था, जो आज फल-फूल रहा है। राज्य सरकार की ‘मिजोरम साक्षरता मिशन’ जैसी योजनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों तक शिक्षा पहुंचाई। महिलाओं की साक्षरता दर पुरुषों से भी ऊंची है, जो 98.7 प्रतिशत है।

इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश की साक्षरता दर मात्र 72.6 प्रतिशत है, जहां शहरी इलाकों में यह 80.85 प्रतिशत तक पहुंची लेकिन ग्रामीण क्षेत्र पीछे हैं। महाराष्ट्र थोड़ा बेहतर है, लेकिन टॉप-10 से बाहर। यूपी ने हाल ही में हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को पीछे छोड़ा, पर यह प्रगति धीमी है। बिहार जैसे राज्य सबसे निचले पायदान पर बने हुए हैं।

बड़े राज्यों की चुनौतियां

इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं। पूर्वोत्तर राज्यों में कम आबादी, बेहतर स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर और कम ड्रॉपआउट रेट मुख्य हैं। केंद्र सरकार की ‘समग्र शिक्षा अभियान’ ने भी मदद की। हालांकि, बड़े राज्यों में जनसंख्या दबाव, गरीबी और लड़कियों की जल्दी शादी जैसी समस्याएं बाधा हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यूपी-महाराष्ट्र ने डिजिटल शिक्षा और शिक्षक प्रशिक्षण पर जोर दिया तो वे भी आगे बढ़ सकते हैं।

भविष्य की संभावनाएं

यह सूची आम लोगों को चौंका रही है, क्योंकि केरल का दबदबा टूटना अप्रत्याशित है। अमित शाह जैसे नेताओं ने भी पूर्वोत्तर की तारीफ की। कुल मिलाकर, यह भारत की शिक्षा यात्रा में एक मील का पत्थर है। अगर सभी राज्य इस गति से चले तो 2030 तक 100 प्रतिशत साक्षरता का सपना साकार हो सकता है। लेकिन बड़े राज्यों को अभी लंबा सफर तय करना है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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