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Bank Account Transfer: पुराना बैंक अकाउंट बंद करने से पहले कर लें ये काम! चुटकियों में नए अकाउंट में शिफ्ट करें अपनी SIP और EMI

बैंक अकाउंट बदलते वक्त SIP, EMI और ऑटो‑डेबिट को नए खाते में शिफ्ट करना बेहद जरूरी है, नहीं तो किस्तें बाउंस हो सकती हैं और CIBIL स्कोर प्रभावित हो सकता है। पुराने खाते का स्टेटमेंट चेक कर सभी autos की लिस्ट बनाएं, फंड हाउस और लोन प्रोवाइडर पर मैंडेट अपडेट करें और नई डिटेल्स पूरी तरह सेट होने तक पुराना खाता बंद न करें।

By Pinki Negi

how to shift sip auto debit to new bank account

अक्सर बेहतर सर्विस, ऊंची ब्याज दर या नौकरी बदलने की वजह से कई लोग अपना पुराना बैंक अकाउंट छोड़कर नया खाता खोलना चाहते हैं। नया बैंक अकाउंट खुलवाना अब काफी आसान हो गया है, लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब पुराने खाते से जुड़े वित्तीय लेन‑देन धीरे‑धीरे सरप्राइज देने लगते हैं। इनमें मुख्य रूप से आपकी EMI, SIP और ऑटो‑डेबिट वाले बिजली‑पानी के बिल, इंश्योरेंस प्रीमियम और ओटीटी सब्सक्रिप्शन जैसी चीजें शामिल होती हैं।

अगर आप बिना प्लानिंग के पुराना अकाउंट बंद कर देते हैं और नए खाते के लिए मैंडेट सेट नहीं करते, तो आपकी किस्तें बाउंस हो सकती हैं, जिससे न सिर्फ बैंक पेनाल्टी का भार बढ़ता है बल्कि आपका सिबिल (CIBIL) स्कोर भी खराब हो सकता है। इसलिए बैंक अकाउंट बदलने से पहले एक सॉलिड, व्यवस्थित गाइड फॉलो करना आज के डिजिटल जमाने में निवेशकों और लोन लेने वालों के लिए जरूरी है।

ऑटो‑पेमेंट की लिस्ट और ऑटो‑डेबिट मैंडेट अपडेट

सबसे पहले आपको अपना दिमाग “ऑटो‑पेमेंट मैप” बनाना होगा। इसके लिए पुराने बैंक के इंटरनेट‑बैंकिंग या मोबाइल ऐप से पिछले 3–6 महीने के स्टेटमेंट चेक करें और उन सभी EMI, SIP और ऑटो‑डेबिट वाले ट्रांजैक्शन की अलग से लिस्ट तैयार करें। इस लिस्ट में आपकी होन लोन या कार लोन की EMI, म्यूचुअल फंड की SIP, लाइफ/हेल्थ इंश्योरेंस की प्रीमियम, क्रेडिट कार्ड बिल, OTT प्लेटफॉर्म (Netflix, Amazon Prime, Disney+Hotstar आदि) और यहां तक कि बिजली, पानी या गैस के बिल जैसे recurring डेबिट शामिल हो सकते हैं। इस लिस्ट के बाद ही आप अपने नए बैंक अकाउंट के लिए नए ऑटो‑डेबिट मैंडेट बना सकते हैं।

SIP को नए अकाउंट में कैसे शिफ्ट करें

म्यूचुअल फंड SIP को नए खाते में शिफ्ट करने के लिए सबसे पहले आपको अपने फंड हाउस के ऑफिशियल पोर्टल या CAMS/KFintech जैसे रजिस्ट्रार प्लेटफॉर्म पर जाना होता है। वहाँ “Bank Mandate / ECS Mandate Update” या इसी तरह का कोई ऑप्शन चुनकर अपना नया खाता नंबर, बैंक नाम और IFSC कोड अपडेट करना होता है। इस प्रक्रिया में अक्सर नया चेक लीफ या कैंसिल चेक अटैच करना जरूरी होता है।

अगर आप डिजिटल ब्रोकर (जैसे Angel One, Groww, Zerodha, PhonePe आदि) के जरिए SIP करते हैं, तो उनके ऐप में भी e‑mandate बदलने का ऑप्शन मिलता है, जिससे पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ही पूरी हो जाती है। लेकिन इतना भूलना नहीं है कि बदलाव के बाद आप कम से कम एक बार मैन्युअल इन्वेस्टमेंट करके देखें कि नया मैंडेट सही चल रहा है या नहीं।

EMI और लोन की ऑटो‑डेबिट को नए खाते में ट्रांसफर करना

लोन वाली EMI के मामले में आपको थोड़ा औपचारिक तरीका अपनाना पड़ता है। आपको संबंधित बैंक या NBFC के लोन पोर्टल पर जाकर “Change Bank A/C for EMI” या “NACH Mandate Update” वाला फॉर्म डाउनलोड कर नया खाता विवरण भरना होता है। साथ ही कैंसिल चेक और आवश्यक दस्तावेज अटैच कर उसे ऑनलाइन अपलोड करना होता है या फिर ब्रांच में जमा करना होता है।

इस प्रक्रिया में आमतौर पर 24–72 घंटे या कभी‑कभी पूरा बिल‑साइकल भी लग जाता है, इसलिए नए मैंडेट अपडेट करने के लिए आपको कम से कम 3–5 दिन पहले ही आवेदन कर देना चाहिए। अगर बीचमें कोई EMI फेल हो जाए, तुरंत लोन प्रोवाइडर को inform करें, नहीं तो लेट फीस के साथ‑साथ आपके क्रेडिट स्कोर पर भी नकारात्मक निशान बन सकता है।

पुराना अकाउंट कब तक रखें?

इसके अलावा एक बहुत जरूरी बात यह है कि जब तक आपके नए अकाउंट से पहली EMI और पहली SIP सफलतापूर्वक cut न जाए, तब तक पुराना बैंक अकाउंट पूरी तरह बंद न करें। कम से कम दो महीने की किस्तों के बराबर बैलेंस पुराने खाते में रखना एक अच्छा “बफर पीरियड” बनाता है, जो तकनीकी गड़बड़ी या approval में देरी के दौरान आपको बचाता है। साथ ही अपने एम्प्लॉयर या HR को नए बैंक खाते की IFSC और अकाउंट नंबर की जानकारी जल्द से जल्द दें, ताकि आपकी सैलरी भी सही समय पर नए खाते में क्रेडिट हो।

गैस सब्सिडी (DBT), इनकम टैक्स रिफंड और अन्य सरकारी लाभों के लिए भी आपको संबंधित ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर नए बैंक अकाउंट की वैलिडिटी confirm करनी होती है। इन सभी छोटे‑छोटे कदमों को ध्यान से फॉलो करके आप बिना किसी बड़े झटके या मानसिक तनाव के अपना बैंक अकाउंट आसानी से बदल सकते हैं और निवेश, लोन और रोजमर्रा के भुगतान को नए सिस्टम में चुटकियों में शिफ्ट कर सकते हैं।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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