
महीने के आखिर में जेब खाली हो जाए और अचानक जरूरत पड़ जाए तो क्रेडिट कार्ड से एटीएम पर कैश निकालना सबसे आसान रास्ता लगता है। बिना कागजात के तुरंत पैसे मिल जाएं, यह सुविधा तो कमाल की है। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं- यह जाल है, जो चुपके से आपकी जेब काट लेता है। कैश एडवांस फीस, तगड़ा ब्याज और छिपे चार्ज मिलाकर छोटी सी निकासी हजारों का नुकसान करा सकती है। लाखों कार्डधारक इस गलती में फंस चुके हैं। आइए, इस कड़वे सच को खोलकर समझें।
फीस और ब्याज का पहला धक्का
क्रेडिट कार्ड से कैश निकासी पर सबसे पहला धक्का कैश एडवांस फीस का लगता है। यह निकासी रकम का 2.5 से 3.5 प्रतिशत होता है, न्यूनतम 250 से 500 रुपये तक। उदाहरण लें- 10,000 रुपये निकाले तो कम से कम 500 रुपये फीस उड़ जाती है। ऊपर से जीएसटी भी। फिर आता है फाइनेंस चार्ज यानी ब्याज, जो निकासी के पहले ही दिन से चालू हो जाता है। सामान्य खरीदारी पर 45-50 दिन का फ्री पीरियड मिलता है, लेकिन कैश पर नहीं। मासिक ब्याज 2.5 से 3.5 प्रतिशत तक, यानी सालाना 30-40 प्रतिशत! 30 दिन में ही 10,000 पर 800-900 रुपये ब्याज जुड़ जाए।
एटीएम और लेट फीस का सिरदर्द
एटीएम फीस अलग सिरदर्द। अपने बैंक के एटीएम पर मुफ्त लिमिट खत्म होते ही 20-23 रुपये प्रति निकासी। दूसरे बैंक के तो और महंगे। अगर बिल समय पर न भरा तो लेट पेमेंट फीस 15-30 प्रतिशत तक, जो बकाया को दोगुना कर देती है। क्रेडिट स्कोर पर भी बुरा असर पड़ता है। ज्यादा बकाया बढ़ने से न्यूनतम भुगतान पूरा न हो पाए तो सीबिल खराब। भविष्य के लोन रिजेक्ट हो सकते हैं। ऊपर से रिवॉर्ड पॉइंट्स जीरो- शॉपिंग पर तो पॉइंट्स मिलते हैं, कैश पर कुछ नहीं।
इमरजेंसी में फायदा, लेकिन सावधानी बरतें
फिर भी, इमरजेंसी में फायदा है। कोई पेपरवर्क नहीं, तुरंत कैश। अगर डेबिट कार्ड में बैलेंस न हो या यूपीआई काम न करे तो यह जान बचाने वाला विकल्प। लेकिन केवल अंतिम हथियार के रूप में इस्तेमाल करें। विशेषज्ञ सलाह देते हैं- पहले पर्सनल लोन लें, ब्याज 8-12 प्रतिशत सालाना। या क्रेड ऐप्स से बैंक ट्रांसफर, कम फीस। डेबिट कार्ड या यूपीआई सबसे सस्ते। आरबीआई नियम कहते हैं बैंक को सभी फीस बिल में साफ बतानी पड़ती है, लिमिट 20-40 प्रतिशत क्रेडिट लिमिट तक। 2026 में कोई बड़ा बदलाव नहीं, पुराने नियम ही कायम।
बचाव की समझदार सलाह
सलाह साफ है- इमरजेंसी फंड बनाएं, क्रेडिट लिमिट का 30 प्रतिशत से ज्यादा न खर्चें। स्टेटमेंट चेक करें, अलर्ट ऑन रखें। कैश एडवांस से बचें, वरना छोटी मदद बड़ा कर्ज बन जाएगी। समझदार बनें, जेब बचाएं।









