
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने लाखों पेंशनभोगियों के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब बुजुर्ग पेंशनर्स को बैंक या ईपीएफओ कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी (एफएटी) के जरिए वे अपने स्मार्टफोन से ही डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (जीवन प्रमाण) जमा कर सकते हैं। यह सुविधा विशेष रूप से नवंबर-दिसंबर में पेंशन रुकने की आशंका वाले समय में वरदान साबित हो रही है। ईपीएफओ ने हाल ही में जारी गाइडलाइंस में स्पष्ट किया है कि छह आसान चरणों में यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है, जिससे पेंशन की निरंतरता सुनिश्चित होती है।
डिजिटल पहल का महत्व और लाभ
यह डिजिटल पहल सरकार की ‘ईज ऑफ लिविंग’ नीति का हिस्सा है, जो कोविड के बाद तेजी से विकसित हुई। पहले पेंशनर्स को हर साल व्यक्तिगत रूप से जीवन प्रमाण जमा करना पड़ता था, जिसमें यात्रा और कतारों की परेशानी होती थी। अब आधार-आधारित फेस रिकग्निशन से मोबाइल कैमरे का लाइव फोटो आधार डेटाबेस से मैच हो जाता है।
प्रमाण आईडी जनरेट होते ही एसएमएस के जरिए डाउनलोड लिंक मिल जाता है, जो डिजीलॉकर में सेव हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि धोखाधड़ी की संभावना भी कम होगी। 80 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनर्स के लिए डोरस्टेप सेवा भी उपलब्ध है।
तैयारी के लिए आवश्यक वस्तुएं
प्रक्रिया शुरू करने से पहले स्मार्टफोन में कम से कम 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा और स्थिर इंटरनेट होना जरूरी है। सबसे पहला कदम है आधार नंबर और पेंशन पेमेंट ऑर्डर (पीपीओ) नंबर की तैयारी। ये विवरण पेंशन जारी करने वाली संस्था- चाहे बैंक हो, डाकघर या अन्य- के रिकॉर्ड से मेल खाने चाहिए। गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से ‘आधार फेस आरडी’ और ‘जीवन प्रमाण फेस ऐप‘ डाउनलोड करें। ये आधिकारिक ऐप्स हैं, इसलिए किसी अनजान स्रोत से बचें। ऐप ओपन करने पर ऑपरेटर ऑथेंटिकेशन चुनें; पेंशनर स्वयं ही ऑपरेटर बन सकते हैं, जिससे किसी सहायक की जरूरत नहीं पड़ती।
स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
अगले चरण में पेंशन विवरण भरें- पीपीओ नंबर, बैंक नाम, खाता संख्या आदि। आधार से लिंक्ड मोबाइल पर ओटीपी वेरिफाई करें। फिर फेस स्कैन शुरू करें: कैमरे के सामने सिर हल्का घुमाएं, पलक झपकाएं और मुस्कुराएं जैसी निर्देश फॉलो करें। लाइव फोटो कैप्चर होते ही सिस्टम आधार के साथ मैच करता है।
सफल होने पर प्रमाण आईडी स्क्रीन पर दिखेगा और एसएमएस आ जाएगा। पूरी प्रक्रिया मात्र 5-10 मिनट लेती है। यदि समस्या हो, तो यूमैंग ऐप या जीवनप्रमाण.गोव.इन वेबसाइट का सहारा लें। ऑफलाइन विकल्प के तौर पर सीएससी केंद्र या बैंक भी उपलब्ध हैं।
सहायता और सावधानियां
ईपीएफओ की हेल्पलाइन 1800-118-005 पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन दे रहे हैं। पेंशनर्स को समय पर जमा करने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि देरी से पेंशन रुक सकती है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहां बुजुर्ग आबादी अधिक है, यह सुविधा लाखों को लाभ पहुंचाएगी। ईपीएफओ ने सोशल मीडिया पर वीडियो ट्यूटोरियल भी जारी किए हैं। कुल मिलाकर, यह डिजिटल क्रांति पेंशनर्स के जीवन को सरल बना रही है।









