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सपनों का घर कहीं मुसीबत न बन जाए! घर खरीदने से पहले इन डॉक्यूमेंट्स की करें जांच, वरना डूब जाएगी पूरी कमाई

सपनों का घर जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है, लेकिन गलत कागजात से यह मुसीबत बन सकता है। टाइटल डीड, चेन ऑफ टाइटल, एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट, RERA रजिस्ट्रेशन और NOC जैसे दस्तावेजों की बारीकी से जांच करें। उत्तर प्रदेश में IGRS पोर्टल पर सत्यापन जरूरी। वकील की मदद लें, वरना फ्रॉड में फंसकर पूरी कमाई डूब सकती है। सतर्क रहें, परिवार का भविष्य सुरक्षित रखें।

By Pinki Negi

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सपनों का घर हर भारतीय का अभिमान होता है। वर्षों की मेहनत और बचत लगा कर खरीदा जाने वाला यह आशियाना परिवार की स्थिरता और भविष्य की गारंटी का प्रतीक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत दस्तावेजों की वजह से यह खुशी का घर मुसीबत का ठिकाना बन सकता है? देशभर में रोजाना सैकड़ों प्रॉपर्टी खरीदार फर्जी टाइटल डीड, छिपे लोन या विवादों के जाल में फंस रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के रियल एस्टेट बाजार में हर साल करोड़ों रुपये का फ्रॉड होता है, जहां छोटी सी लापरवाही पूरी जमा-पूंजी लील लेती है।

घर खरीदना कानूनी जांच का गहन अभ्यास

घर खरीदना सिर्फ लोकेशन या कीमत का सवाल नहीं, बल्कि कानूनी जांच का गहन अभ्यास है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में, जहां रियल एस्टेट तेजी से बढ़ रहा है, IGRS पोर्टल पर रजिस्ट्री से पहले स्वामित्व सत्यापन अनिवार्य हो गया है। फिर भी, कई खरीदार बिना पूरी पड़ताल के डील फाइनल कर लेते हैं। सबसे पहले टाइटल डीड की बारीकी से जांच करें। यह दस्तावेज विक्रेता के वैध मालिकाना हक को साबित करता है।

अगर यह फर्जी या पुरानी है, तो कोर्ट में सालों लंबा केस चल सकता है। इसके बाद चेन ऑफ टाइटल देखें, जो संपत्ति के पिछले 30 सालों के सभी मालिकों का सिलसिला बताता है। कोई गैप या डिस्क्रिपेंसी होने पर विवाद पक्का है।

एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट और सेल एग्रीमेंट की अहमियत

एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC) तीसरा सबसे क्रिटिकल डॉक्यूमेंट है। यह प्रमाणित करता है कि प्रॉपर्टी पर कोई लोन, मॉर्गेज या कानूनी दावा तो नहीं। राज्य के उप-पंजीयक कार्यालय या ऑनलाइन पोर्टल से कम से कम 13-30 साल का EC लें। सेल एग्रीमेंट में कीमत, पेमेंट शेड्यूल, पजेशन डेट और दोनों पक्षों की जिम्मेदारियां साफ लिखी होनी चाहिए। प्रॉपर्टी टैक्स रसीदें चेक करें ताकि बकाया की मार आपको न झेलनी पड़े। 

अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लानकम्प्लीशन सर्टिफिकेट (CC) और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) सुनिश्चित करें कि निर्माण नियमों के अनुरूप है। अनधिकृत बिल्डिंग पर डिमोलिशन या जुर्माने का खतरा रहता है।

RERA, NOC और अन्य जरूरी प्रमाण पत्र

RERA पंजीकरण अब अनिवार्य है। प्रोजेक्ट का RERA नंबर वेरिफाई करें, डेवलपर का ट्रैक रिकॉर्ड देखें और कंप्लीशन डेट चेक करें। NOC सभी विभागों- बिजली, पानी, अग्निशमन, पर्यावरण- से लें। पजेशन लेटर कब्जे की आधिकारिक तारीख तय करता है, जबकि लोन क्लोजर सर्टिफिकेट पुराने बैंक लोन को क्लियर घोषित करता है। उत्तर प्रदेश में खातौनी, खाता यूनिट और म्यूटेशन एंट्री भी जरूरी हैं।

वकील की मदद से बचाव के उपाय

जांच के लिए प्रॉपर्टी वकील हायर करें। वे कोर्ट रिकॉर्ड, लिटिगेशन सर्च और फ्रॉड डिटेक्ट करते हैं। बिना वकील के डील न करें। हाल के एक मामले में मेरठ के निवासी ने फर्जी EC पर 50 लाख का फ्लैट खरीदा, अब बैंक ने प्रॉपर्टी जब्त कर ली। विशेषज्ञ सलाह देते हैं- मूल दस्तावेज ही लें, कॉपी न मानें। बैंक लोन की वेरिफिकेशन का इंतजार करें।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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