
ओडिशा सरकार ने एक क्रांतिकारी फैसला लेते हुए करीब 79,033 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, लेडी सुपरवाइजर्स और ब्लॉक कोऑर्डिनेटर्स को स्मार्टफोन वितरित करने की मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल 93.13 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जो मां और बच्चों के पोषण स्तर की निगरानी को डिजिटल रूप से मजबूत करेगी। मुख्य मंत्री मोहन चरण माज्ही की अध्यक्षता में शनिवार रात हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया, जो POSHAN अभियान को नई गति प्रदान करेगा।
स्मार्टफोन का चयन और विशेषताएं
यह पहल राज्य के ग्रामीण इलाकों में फैले आंगनवाड़ी केंद्रों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने सैमसंग गैलेक्सी A06 मॉडल के 4G स्मार्टफोन खरीदने का फैसला किया है, जिनकी प्रति यूनिट कीमत लगभग 11,783 रुपये है। यह फोन 6.7 इंच HD+ डिस्प्ले, मीडियाटेक हेलियो G85 प्रोसेसर, 4 जीबी रैम, 64 जीबी स्टोरेज, 50 मेगापिक्सल मुख्य कैमरा, 8 मेगापिक्सल फ्रंट कैमरा और 5000 mAh बैटरी से लैस है।
एंड्रॉयड 14 पर चलने वाला यह डिवाइस 2 साल के OS अपडेट और 4 साल के सिक्योरिटी पैच के साथ आता है, जो रोजमर्रा के कार्यों जैसे डेटा एंट्री और ग्रोथ मॉनिटरिंग के लिए आदर्श है।
POSHAN अभियान को मिलेगा डिजिटल बढ़ावा
POSHAN Tracker डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इन स्मार्टफोन्स का इस्तेमाल होगा, जिससे लाभार्थियों का रीयल-टाइम रजिस्ट्रेशन, दैनिक डेटा एंट्री, पूरक पोषण वितरण की निगरानी, बच्चों की ग्रोथ माप और प्री-स्कूल एजुकेशन जैसी गतिविधियां सुगम होंगी। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सही जगह पहुंचेगा और पारदर्शिता बढ़ेगी। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि यह कदम आंगनवाड़ी सिस्टम को एकीकृत ‘सishu वाटिका’ केंद्रों के साथ जोड़ने की दिशा में भी सहायक होगा, जिससे प्रारंभिक शिक्षा बेहतर होगी।
कैबिनेट के अन्य प्रमुख फैसले
कैबिनेट बैठक में अन्य महत्वपूर्ण फैसलों ने भी विकास की नई इबारत लिखी। मुख्यमंत्री हस्ततंता विकास योजना (MHBY) को मंजूरी मिली, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में हैंडलूम सेक्टर पर 589.10 करोड़ रुपये खर्च कर कारीगरों को GI टैग, ट्रेडमार्क और बाजार लिंकेज प्रदान किया जाएगा। बाढ़ प्रबंधन के लिए 2025-26 से 2029-30 तक 2,781 करोड़ की व्यापक योजना शुरू होगी, जो बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जान-माल की रक्षा करेगी। भुवनेश्वर मेट्रो प्रोजेक्ट के DMRC समझौते को रद्द कर राज्य खुद 273.51 करोड़ का बोझ उठाएगा।
वीर सुरेंद्र साई यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के पुनर्विकास पर 926.96 करोड़ और बंद पड़ी बदांबा कोऑपरेटिव शुगर इंडस्ट्री के पुनरुद्धार पर खर्च होगा। साथ ही, 1 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त चावल की नीलामी से स्टॉक मैनेजमेंट मजबूत होगा। ये फैसले ओडिशा को आत्मनिर्भर और डिजिटल राज्य बनाने की दिशा में मजबूत इरादे दिखाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन वितरण से ग्रासरूट स्तर पर पोषण सुधार में क्रांति आएगी।









