
पिछले हफ्ते जहां सोने और चांदी की कीमतों में तेजी के साथ बाजार ने रिकवरी दर्ज की, वहीं एक्सपर्ट अब आगामी सप्ताह के लिए थोड़ी ज्यादा कंट्रोल वाली गतिविधि की संभावना जता रहे हैं। सोमवार, 6 अप्रैल से शुरू हो रहा हफ्ता दोनों धातुओं के लिए सीमित रेंज में रह सकता है, लेकिन रुझान हल्का सकारात्मक बना रहने की आशंका ज़्यादा है। निवेशकों की नजर इस बार खास तौर पर पश्चिम एशिया में जारी राजनीतिक तनाव और ग्लोबल आर्थिक डेटा पर जुड़ी रहेगी, जो सीधे इन बुलियन की दिशा तय कर सकते हैं।
RBI पॉलिसी और ग्लोबल डेटा पर दबाव
घरेलू बाजार में निवेशक इस हफ्ते रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति की बैठक पर खास नजर रखेंगे, जो हफ्ते के बीच में आने वाली है। रेपो रेट और लिक्विडिटी गाइडनेस पर केंद्रीय बैंक के संकेत न सिर्फ रुपये‑डॉलर की दिशा तय करेंगे, बल्कि उसके आधार पर सोना और चांदी की कीमतों में छोटी‑बड़ी तेजी या दबाव भी दिख सकता है। इससे पहले रेपो रेट में कटौती के बाद दोनों धातुओं के भाव में जमकर उछाल देखी गई थी, जो इस बात को फिर बताती है कि RBI की पॉलिसी बुलियन पर तुरंत और सीधा असर छोड़ सकती है।
ग्लोबल तनाव और अमेरिकी नीति का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले से जारी तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान से जुड़ी टिप्पणियों ने पिछले हफ्ते सोने और चांदी को नए ऊंचाइयों तक ले गए। JM Financial Services के एक्सपर्ट प्रणव मेर के मुताबिक गल्फ रीजन में जो भी घटनाक्रम होंगे, उसी हिसाब से गोल्ड‑सिल्वर में उतार‑चढ़ाव देखने को मिलेगा। ईरान ने हाल ही में अमेरिका के शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण की बात कही है, जिससे इन धातुओं के लिए “सेफ‑हैवन” डिमांड फिर से मजबूत होने की संभावना बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी तेजी
ग्लोबल लेवल पर भी सोना और चांदी में दबदबा बना हुआ है। कॉमेक्स पर जून कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना 155.4 डॉलर यानी लगभग 3.43 फीसदी बढ़कर 4,679.7 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी 3.13 डॉलर यानी लगभग 4.5 फीसदी उछलकर 72.92 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई। इस बीच अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत डेटा के बावजूद भी सोने की कीमतों में तेजी दर्ज हुई, जिससे यह संकेत मिलता है कि बाजार अभी भी मौद्रिक नीति के समर्थन और भू‑राजनीतिक तनाव को ज्यादा अहम मान रहा है।
हालांकि ETF निवेशकों की बिकवाली और कुछ सेंट्रल बैंकों की खरीद में धीमापन ने भावों पर थोड़ा दबाव जरूर डाला, लेकिन ट्रंप की तेज टिप्पणियों के बाद फिर से तेजी लौट आई।
अगले हफ्ते के लिए क्या उम्मीदें?
भारतीय बाजार में इस हफ्ते की दिशा अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर भी निर्भर करेगी। निवेशकों की नजर खास तौर पर सर्विस PMI डेटा, अमेरिका के ड्यूरेबल गुड्स आर्डर, GDP ग्रोथ रेट, PCE इंडेक्स और CPI महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी। इनमें से किसी भी आंकड़े में अप्रत्याशित रुझान आने से आर्थिक भविष्य के बारे में धारणा बदल सकती है, जिससे ब्याज दर नीति की उम्मीद और इक्विटी के वैकल्पिक निवेश के रूप में सोने‑चांदी दोनों पर असर दिख सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले हफ्ते दोनों धातुओं का ट्रेंड ज्यादातर साइडवेज रह सकता है, लेकिन जियोपॉलिटिकल और आंकड़ों के आधार पर उसमें हल्की तेजी की गुंजाइश बनी रहेगी।
चीन और फिजिकल डिमांड का दबदबा
इस बीच चीन जैसे बड़े खपत देश ने चांदी की रिकॉर्ड खरीदारी करके ग्लोबल सप्लाई पर दबाव बढ़ा दिया है। 2026 के पहले दो महीनों में चीन ने 200 टन से ज्यादा चांदी आयात कर ली, जो आठ साल का उच्च स्तर है। इससे उद्योग और निवेश दोनों स्तरों पर डिमांड बढ़ी है, जिसका असर आगे चलकर चांदी की कीमतों पर और ज्यादा दिखने की उम्मीद है। भारतीय खरीदारों के लिए इस हफ्ते ज्यादातर रणनीति रेज़िस्टेंस पर लाभ निकासी और सपोर्ट ज़ोन पर धीरे‑धीरे खरीदारी की रहेगी, खासकर अगर रुपये की कमजोरी और जियोपॉलिटिकल खबरों के साथ RBI की तटस्थ पॉलिसी दिशा‑निर्देश देखने को मिले तो।









