
भारत में करोड़ों लोग आधार कार्ड को अपनी पहचान का सबसे मजबूत सबूत मानते हैं। नाम, पता, जेंडर, मोबाइल नंबर और डेट ऑफ बर्थ (DOB) जैसी जानकारी इस 12 अंकीय नंबर पर दर्ज होती है, जिससे सरकारी योजनाओं से लेकर बैंक खाते तक हर काम आसान हो जाता है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या आधार कार्ड हर तरह के प्रमाण के लिए पर्याप्त है?
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि आधार केवल पहचान पत्र है, न कि जन्म तिथि या नागरिकता का आधिकारिक प्रमाण। यह खुलासा उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के नए आदेशों के बाद और भी प्रासंगिक हो गया है, जहां आधार को DOB प्रूफ मानने पर सख्ती बरतने के निर्देश जारी हुए हैं।
UIDAI की आधिकारिक स्थिति
UIDAI की आधिकारिक स्थिति बिल्कुल साफ है। आधार कार्ड बनवाते समय DOB स्व-घोषित (सेल्फ-डिक्लेयर्ड) होती है, क्योंकि इसके लिए जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल सर्टिफिकेट जैसा मूल दस्तावेज अनिवार्य नहीं होता। नागपुर और लखनऊ UIDAI कार्यालयों के पत्रों में कहा गया कि आधार को उम्र सत्यापन या जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
उदाहरण के लिए, 31 अक्टूबर 2025 को लखनऊ UIDAI ने स्पष्ट पत्र जारी किया, जिसके आधार पर यूपी सरकार ने नवंबर 2025 में सभी विभागों को निर्देश दिया कि आधार DOB प्रूफ के रूप में अमान्य है। महाराष्ट्र में भी अगस्त 2023 के बाद केवल आधार पर जारी जन्म प्रमाण पत्र रद्द करने के आदेश आ चुके हैं। इन फैसलों का मकसद फर्जीवाड़ा रोकना है, क्योंकि कई लोग आधार में मनमानी DOB दर्ज करा लेते हैं।
नागरिकता प्रमाण के रूप में भ्रम
नागरिकता के मामले में भी भ्रम आम है। UIDAI ने बार-बार कहा कि आधार भारतीय नागरिकता साबित नहीं करता। भारत में रहने वाले विदेशी नागरिक भी पात्रता शर्तों पर आधार बना सकते हैं, इसलिए यह केवल रेसिडेंट आईडी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने भी इसे नागरिकता प्रमाण मानने से इनकार किया है। फिर भी, लोग सरकारी नौकरियों, पेंशन, SIR प्रक्रिया या योजनाओं में आधार को ही पर्याप्त समझते हैं, जो अब मुश्किल खड़ी कर सकता है।
आधार का सही उपयोग
आधार का सही इस्तेमाल कहां करें? यह सामाजिक कल्याण योजनाओं जैसे उज्ज्वला, आयुष्मान भारत या राशन वितरण में लाभार्थी पहचान के लिए आदर्श है। इससे डुप्लिकेशन रुकता है और पारदर्शिता बढ़ती है। लेकिन जन्म तिथि सत्यापन के लिए जन्म प्रमाण पत्र, हाईस्कूल सर्टिफिकेट, पासपोर्ट या अस्पताल रिकॉर्ड जरूरी हैं। UIDAI की वेबसाइट पर स्वीकार्य दस्तावेजों की सूची उपलब्ध है। अगर आधार में DOB गलत है, तो 18 साल से कम उम्र वालों के लिए केवल एक बार सुधार संभव है, वो भी मूल प्रमाण के साथ।
बदलाव का प्रभाव और सलाह
यह बदलाव लाखों लोगों के लिए चुनौती है, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहां सरकारी सेवाओं में सत्यापन सख्त हो रहा है। नागरिकों को सलाह है कि तुरंत जन्म प्रमाण पत्र बनवाएं या अपडेट कराएं। UIDAI का X हैंडल और वेबसाइट पर समय-समय पर मिथक तोड़ने वाली जानकारी आती रहती है। सही जागरूकता से ही डिजिटल इंडिया का सपना साकार होगा।









