
मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग ने वैश्विक बाजारों में भूचाल ला दिया है। कच्चे तेल के दाम आसमान छूने लगे, एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज हुई और डॉलर इंडेक्स ने नई ऊंचाइयां हासिल कीं। ऐसे हाहाकार के बीच भारतीय रुपया भी अछूता न रहा। 27 फरवरी 2026 के बाद रुपये में आई 6.4 प्रतिशत की भारी गिरावट ने निवेशकों और आम लोगों में डर पैदा कर दिया। रुपया डॉलर के मुकाबले 93 के पार लुढ़क गया, जो एक दशक का सबसे निचला स्तर था। लेकिन अब साफ दिख रहा है कि यह ऊहापोह का दौर खत्म होने को है।
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की ताजा रिसर्च रिपोर्ट ने न सिर्फ स्थिति को स्पष्ट किया है, बल्कि सबको आश्वस्त भी कर दिया है। रिपोर्ट का स्पष्ट संदेश है- घबराने की कोई बात नहीं, क्योंकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के पास $690 बिलियन (करीब ₹57 लाख करोड़) का मजबूत सुरक्षा कवच मौजूद है।
केवल रुपया ही नहीं, वैश्विक मुद्राओं का भी दर्द
यह भंडार भारत की अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित हो रहा है। केवल रुपया ही नहीं गिरा, बल्कि वैश्विक मुद्राएं भी डॉलर के आगे घुटने टेकने को मजबूर रहीं। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक जब रुपये में 6.4 प्रतिशत की कमी आई, तो डॉलर इंडेक्स में भी करीब 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। सामान्य तौर पर डॉलर कमजोर होने पर अन्य मुद्राएं मजबूत होती हैं, लेकिन RBI ने ‘शॉक एब्जॉर्बर’ की स्मार्ट रणनीति अपनाई।
रुपये को नियंत्रित रूप से गिरने दिया गया ताकि बाहरी झटकों का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर कम पड़े। गुरुवार को यह रणनीति चरम पर पहुंची। रुपये ने 13 साल की सबसे बड़ी एकदिवसीय छलांग लगाई- 1.7 प्रतिशत की तेजी के साथ डॉलर के मुकाबले 93.10 पर बंद हुआ। यह सितंबर 2013 के बाद का रिकॉर्ड है। उधर निक्केई और हैंग सेंग जैसे एशियाई बाजार 3 प्रतिशत लुढ़के, जबकि ब्रेंट क्रूड $106 के पार पहुंच गया।
RBI की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से सट्टेबाजों पर लगाम
रुपये की यह बहाली RBI की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का कमाल है। सट्टेबाजों पर शिकंजा कसने के लिए केंद्रीय बैंक ने क्रांतिकारी कदम उठाए। नॉन-डिलीवरी फॉरवर्ड (NDF) कॉन्ट्रैक्ट्स पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गई, जिससे बैंकों को निवासी-अनिवासी ग्राहकों के लिए ऐसे सौदे करने से रोका गया। कॉन्ट्रैक्ट री-बुकिंग पर भी रोक लगाई गई, जबकि बैंकों की नेट ओपन पोजीशन को महज $100 मिलियन तक सीमित कर दिया। इन फैसलों ने मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी की कमर तोड़ दी और रुपये को तत्काल राहत दी।
$700 बिलियन भंडार की ताकत और SBI के सुझाव
SBI रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $700 बिलियन के पार पहुंच चुका है, जो 10 महीने से ज्यादा के आयात बिल चुकाने की ताकत रखता है। अल्पकालिक विदेशी कर्ज कुल भंडार का महज 20 प्रतिशत है। RBI जरूरत पड़ने पर इसी भंडार से डॉलर बाजार में उतारता है, जो रुपये को सहारा देता है। यह धन डॉलर, सोना और विदेशी बॉन्ड्स में सुरक्षित है।
रिपोर्ट ने भविष्य के लिए व्यावहारिक सुझाव भी दिए। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के लिए ‘स्पेशल डॉलर विंडो’ खोलने की बात कही गई। ये कंपनियां रोज $250-300 मिलियन डॉलर खरीदती हैं, जो सालाना $75-80 बिलियन बनता है। अलग विंडो से बाजार में डॉलर की वास्तविक मांग-सप्लाई साफ होगी और अस्थिरता कम।
नई उम्मीदों के साथ मजबूत भविष्य
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट युद्ध, ट्रंप के भाषणों से सुधरे रिस्क सेंटीमेंट और RBI की सतर्क निगरानी ने रुपये को नई उड़ान दी है। $690 बिलियन का यह भंडार भारत की आर्थिक साख का प्रतीक बनेगा, जो किसी भी वैश्विक तूफान में देश को सुरक्षित रखेगा। निवेशक अब आशावादी हैं, क्योंकि डॉलर का डर सचमुच खत्म हो चुका है।









