
इस वीकेंड फैमिली के साथ बाहर डिनर या ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने का प्लान है? सावधान, जेब ढीली होने वाली है। पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल युद्ध की लपटें अब भारत की थाली तक पहुंच गई हैं। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आसमान छूती कीमतें और सप्लाई की किल्लत ने होटल-रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया है।
HRAWI (होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया) के प्रवक्ता प्रदीप शेट्टी के मुताबिक, ऑपरेटिंग कॉस्ट में 20% का उछाल आ गया है, जिससे मेन्यू रेट्स बढ़ाना अब मजबूरी बन गया है । फरवरी के आखिर से शुरू हुए इस संघर्ष ने ईंधन, खाद्य तेल और कच्चे माल की कीमतें आसमान छू लीं, जिसका सीधा असर आपकी पसंदीदा डिश पर पड़ रहा है ।
युद्ध का जड़ असर: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर संकट
युद्ध का जड़ असर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर पड़ा, जहां से भारत की 60% एलपीजी आपूर्ति आती है। सरकार ने घरेलू रसोई, अस्पतालों और जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता दी, लेकिन रेस्टोरेंट्स को रोज 6-10 सिलेंडर जुटाने की कसरत करनी पड़ रही है।
LPG कीमतों में उछाल: शहरवार बढ़ोतरी
1 अप्रैल से 19 किलो कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में ₹195.50 की बढ़ोतरी हुई- दिल्ली में ₹2,078.50, मुंबई में ₹196, कोलकाता में ₹2,208 और चेन्नई में ₹203 महंगा । एक महीने पहले ₹1,650 का सिलेंडर अब ₹2,100-2,300 तक पहुंच गया। सप्लाई कटौती से कई रसोइयां ठंडी पड़ीं, जिससे काम के घंटे कम करने पड़े या वैकल्पिक ईंधन अपनाने पड़े ।
खाद्य तेल और मेन्यू पर छाया संकट
खाद्य तेल पर भी युद्ध की छाया गहराई। सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम ऑयल के दाम 3-5 रुपये प्रति लीटर चढ़े, फ्रेट चार्ज और रुपये की कमजोरी से आयात लागत 10-15% बढ़ी। अगर संघर्ष लंबा चला तो और उछाल संभव । दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहरों में छोले-भटूरे ₹40 से ₹50-60, चाय ₹10 से ₹25 हो गई। वارانसी के ढाबों पर चाय-रोटी तक महंगी ।
छोटे रेस्टोरेंट्स की मजबूरी: 20-30% रेट हाइक
छोटे रेस्टोरेंट्स और क्लाउड किचन सबसे ज्यादा प्रभावित- कई मेन्यू छोटा कर दाल मखनी जैसी डिशें हटा लीं। बाजार जानकारों का अनुमान है कि अप्रैल से 20-30% रेट हाइक तय, जून-जुलाई की बजाय अभी शुरू ।
उद्योग की मांगें: सरकार से राहत की उम्मीद
HRAWI ने सरकार से लाइसेंस फीस माफी, किस्त सुविधा और सप्लाई प्राथमिकता की मांग की। पेट्रोलियम मंत्रालय ने जमाखोरी रोकने के लिए छापे मारे, लेकिन राहत सीमित। बड़े चेन किसी तरह सहन कर लेंगे, पर पड़ोसी ढाबा बंद होने की कगार पर। उपभोक्ताओं को सलाह: घर पर खाना बनाएं या PNG की ओर रुख करें। युद्ध का कुप्रभाव लंबा चला तो महंगाई की चेन रिएक्शन पूरे बाजार को झकझोर देगी । क्या सरकार समय रहते कदम उठाएगी, ये देखना बाकी।









