
हवाई यात्रियों की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने वह विवादास्पद आदेश वापस ले लिया, जिसके तहत फ्लाइट्स में 60 फीसदी सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क के चुनने की सुविधा मिलनी थी। कुछ दिनों पहले जारी इस आदेश से यात्रियों में खुशी की लहर दौड़ गई थी, लेकिन एयरलाइंस के विरोध के बाद मंत्रालय ने यू-टर्न ले लिया। अब मनपसंद सीट- चाहे वह फ्रंट रो हो या एक्स्ट्रा लेग स्पेस वाली- के लिए 200 से 2100 रुपये तक अतिरिक्त देने पड़ेंगे।
आदेश की शुरुआत और यात्रियों की खुशी
यह मामला 17 मार्च को तब शुरू हुआ जब मिनिस्ट्री ने डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को निर्देश दिया कि मौजूदा नियमों में संशोधन कर 20 अप्रैल से हर फ्लाइट में कम से कम 60 प्रतिशत सीटें फ्री सिलेक्शन के लिए उपलब्ध कराई जाएं। उद्देश्य था यात्रियों को राहत देना, क्योंकि पहले एयरलाइंस पसंदीदा सीटों पर भारी चार्ज वसूल रही थीं। इंडिगो, एयर इंडिया जैसी प्रमुख कंपनियां इससे सालाना अरबों रुपये की एंसेलरी रेवेन्यू कमाती हैं।
एयरलाइंस का तीखा विरोध
लेकिन इंडस्ट्री संगठनों, खासकर फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस और अकासा एयर ने तीखा विरोध दर्ज किया। उनका तर्क था कि यह कदम उनके खर्चे बढ़ाएगा और टिकट किरायों में इजाफा करने को मजबूर करेगा।
ईरान वॉर का दबाव और मिनिस्ट्री का यू-टर्न
ईरान वॉर के बाद वैश्विक ईंधन संकट से पहले ही परेशान एयरलाइंस ने दबाव बनाया कि फ्री सीट नीति से उनकी अतिरिक्त आय पर ब्रेक लगेगा, जो किराया स्थिर रखने का एकमात्र जरिया है। मिनिस्ट्री ने 1 अप्रैल को DGCA को पत्र लिखकर आदेश स्थगित कर दिया। बयान में कहा गया कि नए नियमों के प्रभाव का व्यापक आकलन होने तक इसे होल्ड किया जा रहा है। इसका मतलब साफ है- यात्रियों को पुराने नियमों के तहत ही चलना पड़ेगा। मिडिल सीटें तो फ्री मिलती ही हैं, लेकिन विंडो, आइल या प्राथमिकता वाली सीटें महंगी रहेंगी।
परिवारों और बुजुर्गों पर असर
इस फैसले से परिवारों और बुजुर्ग यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी होगी। एयरलाइंस का कहना है कि पेड सिलेक्शन एक ‘ऑप्ट-इन’ सर्विस है, जो प्राथमिकता चाहने वालों के लिए है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दी बुकिंग करने वाले अच्छी सीटें हथिया लेंगे, जिससे ग्रुप ट्रैवल करने वालों के लिए विकल्प सीमित हो जाएंगे। उद्योग विशेषज्ञ शशांक जोशी कहते हैं, “यह नीति एयरलाइंस की वित्तीय स्थिरता के लिए जरूरी थी। ईरान संघर्ष से फ्यूल कॉस्ट 30 फीसदी ऊपर चढ़ चुकी है, ऐसे में रेवेन्यू लॉस बर्दाश्त नहीं।”
यात्रियों की प्रतिक्रिया और भविष्य
यात्रियों की प्रतिक्रिया मिली-जुली है। सोशल मीडिया पर #FreeSeatsNow ट्रेंड कर रहा है, जबकि कुछ का मानना है कि इससे टिकट सस्ते रहेंगे। मिनिस्ट्री की समीक्षा जल्द पूरी होने की उम्मीद है, लेकिन तब तक हवाई सफर महंगा ही रहेगा। सरकार और एयरलाइंस के बीच यह टकराव उड्डयन क्षेत्र की चुनौतियों को उजागर करता है- जहां यात्रियों की सुविधा और कंपनियों की लाभप्रदता का संतुलन बनाना मुश्किल होता जा रहा है।









