
स्मार्टफोन यूजर्स के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे मैसेजिंग ऐप्स के लिए सिम बाइंडिंग गाइडलाइन को 31 दिसंबर 2026 तक टाल दिया है। इसका मतलब साफ है कि फिलहाल आप बिना एक्टिव सिम कार्ड के भी इन ऐप्स का इस्तेमाल जारी रख सकेंगे। वेब वर्जन पर भी अब हर 6 घंटे में ऑटो लॉगआउट की चिंता खत्म हो गई है। यह फैसला तकनीकी चुनौतियों को देखते हुए लिया गया है, जिससे लाखों यूजर्स को राहत मिली है।
सरकार के सख्त निर्देश और कंपनियों का विरोध
पिछले साल नवंबर में केंद्र सरकार ने साइबर धोखाधड़ी रोकने के उद्देश्य से सख्त निर्देश जारी किए थे। Telecommunication Cybersecurity Amendment Rules, 2025 के तहत इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स को टेलीकॉम इनवॉइस एंटिटी-यूजर एंड्योरमेंट (TIUE) श्रेणी में रखा गया। इन ऐप्स को यह सुनिश्चित करना था कि उनकी सर्विस सिर्फ उन डिवाइसेस पर चले, जहां एक्टिव सिम कार्ड मौजूद हो।
DoT ने 28 नवंबर 2025 को व्हाट्सएप, टेलीग्राम, स्नैपचैट जैसी बड़ी कंपनियों को 26 फरवरी 2026 से सिम से लगातार जुड़ाव सुनिश्चित करने और 28 मार्च तक अनुपालन रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। लेकिन कंपनियों ने तकनीकी दिक्कतों का हवाला देते हुए विरोध जताया।
एप्पल का ऐतराज और डेडलाइन एक्सटेंशन
एप्पल जैसी दिग्गज कंपनी ने खुलकर ऐतराज जताया। iOS डिवाइसेस पर सिम बाइंडिंग लागू करना मुश्किल बताया गया, क्योंकि ऑपरेटिंग सिस्टम की सीमाओं और बड़े पैमाने पर टेस्टिंग की जरूरत है। आईएएमएआई (इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया) ने भी सरकार से समय मांगा। नतीजतन, मूल डेडलाइन 30 मार्च से आगे बढ़ाकर साल के अंत तक कर दिया गया। DoT के अनुसार, यह एक्सटेंशन कंपनियों को सिस्टम अपग्रेड, यूजर नोटिफिकेशन और लीगल चैलेंजेस सुलझाने का मौका देगा।
साइबर सिक्योरिटी गैप को प्लग करने का मकसद
सिम बाइंडिंग का मकसद साइबर सिक्योरिटी गैप को प्लग करना था। DoT ने पाया कि क्रॉस-बॉर्डर फ्रॉडर्स बिना सिम के ऐप्स का फायदा उठाते हैं। फर्जी अकाउंट्स बनाकर वे व्हाट्सएप पर ठगी करते रहे, क्योंकि अकाउंट सिम हटने पर भी एक्टिव रहता था। KYC वाले मोबाइल नंबर से बाइंडिंग ट्रैकिंग आसान बनाएगी। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह प्राइवेसी का उल्लंघन है और eSIM यूजर्स पर असर डाल सकता है। फिलहाल डुअल सिम, वेब यूज और सेकेंडरी डिवाइसेस पर रिस्क-बेस्ड नियम लागू रहेंगे।
डिजिटल इंडिया के लिए बैलेंस्ड अप्रोच
यह फैसला डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देते हुए सिक्योरिटी बैलेंस करता है। कंपनियां दिसंबर तक तैयारियां तेज करेंगी, जबकि यूजर्स बेफिक्र रह सकते हैं। लेकिन लंबे समय में सिम बाइंडिंग अनिवार्य हो सकती है, जो साइबर क्राइम पर लगाम लगाएगी। सरकार और टेक फर्मों के बीच यह डायलॉग डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत बनाएगा।









