
ऋषिकेश, योग की विश्व राजधानी, अब भारत के पहले कांच के सस्पेंशन ब्रिज ‘बजरंग सेतु’ के साथ एक नई ऊंचाई छूने को तैयार है। गंगा नदी पर मुनि की रेती इलाके में बना यह पुल 132 मीटर लंबा और 8 मीटर चौड़ा है, जिसकी कुल लागत लगभग 70 करोड़ रुपये आंकी गई है। निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और अप्रैल 2026 में तकनीकी परीक्षणों के बाद इसे जनता के लिए खोल दिया जाएगा। यह ब्रिज न केवल इंजीनियरिंग का कमाल है, बल्कि लक्ष्मण झूला के बंद होने के बाद पर्यटकों को नया आकर्षण प्रदान करेगा।
लक्ष्मण झूला की जगह नया विकल्प
लगभग 100 साल पुराने लक्ष्मण झूला को 2019 से सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया था, जो तपोवन और जोंक को जोड़ता था। अब बजरंग सेतु उसकी जगह ले रहा है, जिसमें दोनों ओर 3.5 इंच मोटे टफन ग्लास (12 एमएम के 5 लेयर्स) से बने पैदल पथ हैं। ये ग्लास वॉकवे इतने मजबूत हैं कि 150 साल तक टिक सकें और मौसम की मार झेल सकें।
बीच में दोपहिया वाहनों के लिए स्टील डेक है, जो ऋषिकेश-बद्रीनाथ राजमार्ग को यमकेश्वर से जोड़ेगा। फरवरी 2026 तक इसका आंशिक हिस्सा खुल चुका है, लेकिन ग्लास हिस्सा सुरक्षा जांच के बाद अप्रैल में आम लोगों के लिए उपलब्ध होगा।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था को नई गति
यह पुल पर्यटन को नई गति देगा। पर्यटक कांच के फर्श से गंगा की लहरों को सीधे निहार सकेंगे, जो रोमांच और आस्था का अनोखा संगम बनेगा। ऋषिकेश पहले से राफ्टिंग, बंजी जंपिंग, योग रिट्रीट और ट्रेकिंग के लिए मशहूर है। बजरंग सेतु के खुलने से इन गतिविधियों में उछाल आएगा, खासकर चारधाम यात्रा के दौरान। स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, क्योंकि होटल, रेस्तरां और साहसिक स्पोर्ट्स ऑपरेटरों को नया बाजार मिलेगा। अधिकारियों के मुताबिक, 24-25 अप्रैल को हवा, तापमान और भार परीक्षण होगा, उसके बाद उद्घाटन।
आस्था और आधुनिकता का संगम
बजरंग सेतु ऋषिकेश की आध्यात्मिक विरासत को आधुनिकता से जोड़ेगा। यह धार्मिक पर्यटकों के लिए आसान आवागमन सुनिश्चित करेगा और इंस्टाग्राम-वर्थी स्पॉट बनेगा। लोक निर्माण विभाग ने इसे गणतंत्र दिवस तक खोलने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब अप्रैल तक की उम्मीद है। आने वाले दिनों में यह पुल लाखों श्रद्धालुओं और सैलानियों का केंद्र बनेगा, जो उत्तराखंड पर्यटन को नई दिशा देगा।









