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Railway News: रेल कर्मचारियों को बड़ी राहत! अब निजी मोबाइल से नहीं होगी लोकेशन ट्रैकिंग, बोर्ड ने लिया बड़ा फैसला

रेलवे बोर्ड ने निजी मोबाइल पर लोकेशन ट्रैकिंग रोक दी। ट्रैक मेंटेनर्स व कीमैन को थर्ड-पार्टी ऐप्स से छुटकारा। 23 मार्च के आदेश से आधिकारिक जीपीएस डिवाइस अनिवार्य। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे संघ ने इसे अधिकारों की जीत बताया। प्राइवेसी सुरक्षित, ट्रैक सुरक्षा मजबूत।

By Pinki Negi

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भारतीय रेलवे के लाखों ट्रैक मेंटेनर्स, कीमैन और पेट्रोलमैन जैसे ग्राउंड स्टाफ के लिए एक ऐतिहासिक राहत वाला दिन आ गया है। रेलवे बोर्ड ने 23 मार्च 2026 को जारी सख्त आदेश संख्या 2017/CE-II/TK/Policy के तहत निजी मोबाइल फोनों पर लोकेशन ट्रैकिंग ऐप्स के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला न केवल कर्मचारियों की निजता की रक्षा करेगा, बल्कि रेलवे की ट्रैक सुरक्षा व्यवस्था को भी अधिक विश्वसनीय बनाएगा।

पिछले दबाव और कर्मचारियों का असंतोष

पिछले कुछ वर्षों से कई रेल मंडलों में अधिकारियों द्वारा ट्रैक गश्त की निगरानी के नाम पर कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा था। उन्हें अपने निजी स्मार्टफोन में थर्ड-पार्टी ट्रैकिंग ऐप्स इंस्टॉल करने को कहा जाता, जो बैटरी ड्रेन, सिग्नल की अनिश्चितता और डेटा चोरी के जोखिमों से भरा था। कर्मचारियों का गुस्सा लाजमी था- उनके फोन में परिवार की फोटो, निजी चैट्स, बैंकिंग ऐप्स और संवेदनशील जानकारी भरी रहती है।

ऐसी ‘तांक-झांक’ से उनकी प्राइवेसी का खुला उल्लंघन हो रहा था, जिससे असंतोष की लहर दौड़ गई थी। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे इंप्लॉयी संघ के मंडल मंत्री चंदन सिंह ने इसे ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला’ करार दिया था।

रेलवे बोर्ड का सख्त आदेश

रेलवे बोर्ड ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया और इंडियन रेलवे परमानेंट वे मैनुअल (IRPWM) के प्रावधानों का हवाला देते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए। बोर्ड के अनुसार, गश्त की मॉनिटरिंग केवल रेलवे द्वारा प्रदान किए गए आधिकारिक जीपीएस डिवाइसों से ही की जाएगी। ये डिवाइस औद्योगिक ग्रेड के हैं, जो एन्क्रिप्टेड डेटा ट्रांसमिशन, लंबी बैटरी लाइफ और उच्च सटीकता प्रदान करते हैं।

निजी ऐप्स में थर्ड-पार्टी सर्वरों का दखल रहता है, जो साइबर खतरों को न्योता दे सकते हैं। बोर्ड ने सभी जोनल रेलवेज को सख्त अनुपालन के आदेश दिए हैं, अन्यथा कार्रवाई की चेतावनी दी है।

कर्मचारियों पर प्रभाव

इस फैसले का असर सीधे उन लाखों कर्मचारियों पर पड़ेगा जो प्रतिदिन हजारों किलोमीटर पटरियों की जांच करते हैं। कीमैन और पेट्रोलमैन ट्रेनों की सुरक्षा के पहले पहरेदार हैं, लेकिन अब उन्हें निजी जीवन की चिंता किए बिना ड्यूटी निभानी होगी। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने पुष्टि की कि निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। चंदन सिंह ने इसे ‘कर्मचारियों के अधिकारों की ऐतिहासिक जीत’ बताते हुए कहा, “अब दबाव खत्म, केवल सरकारी डिवाइस से रिपोर्टिंग। इससे मनोबल बढ़ेगा और ड्यूटी में लापरवाही कम होगी।”

भविष्य की दिशा

यह कदम डिजिटल युग में प्राइवेसी बनाम ड्यूटी की बहस को नई दिशा देगा। रेलवे ने पहले भी थर्ड-पार्टी ऐप्स पर निर्भरता घटाई है, जैसे टिकट बुकिंग में बदलाव। कर्मचारी यूनियनों का मानना है कि यह फैसला अन्य क्षेत्रों के लिए मिसाल बनेगा। कुल मिलाकर, रेलवे बोर्ड ने संतुलन कायम किया- सुरक्षा मजबूत, प्राइवेसी सुरक्षित। 

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Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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