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Do You Know: भारत का वह इकलौता राज्य जहाँ आज तक नहीं पहुंची कोई रेलगाड़ी! जानें क्या है असली वजह

भारतीय रेलवे के विशाल नेटवर्क से वंचित सिक्किम, पूर्वी हिमालय का रत्न, आज भी ट्रेन की सीटी से अनजान है। 1975 से राज्य बने 50 साल बाद भी पहाड़ी चुनौतियां- खड़ी ढलानें, भूस्खलन- रेल बिछाने में बाधा। सेवोक-रंगपो 45 किमी लाइन 85% पूरी, 2027 तक लक्ष्य। पर्यटन, अर्थव्यवस्था व सीमा सुरक्षा को मिलेगा बूस्ट।

By Pinki Negi

Do You Know: भारत का वह इकलौता राज्य जहाँ आज तक नहीं पहुंची कोई रेलगाड़ी! जानें क्या है असली वजह

दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क होने का दावा करने वाली भारतीय रेलवे 28 राज्यों को जोड़ चुकी है, लेकिन पूर्वोत्तर का एक रत्न आज भी इस विशाल जाल से वंचित है। जी हां, सिक्किम- 1975 में भारत का 22वां राज्य बना- उस इकलौते राज्य की पहचान है जहां न रेल पटरी बिछी, न स्टेशन बना और न ही कभी ट्रेन की सीटी गूंजी। यह कोई गांव या कस्बा नहीं, बल्कि पूरा राज्य है जो प्रकृति की चुनौतियों से जूझ रहा है।

सिक्किम की भौगोलिक बाधाएं

सिक्किम की खूबसूरती ही इसकी सबसे बड़ी दुश्मन बनी हुई है। पूर्वी हिमालय की गोद में बसा यह छोटा सा राज्य ऊंचे पहाड़ों, खड़ी ढलानों, गहरी घाटियों और उफनती नदियों से घिरा है। यहां की मिट्टी अस्थिर है, भूस्खलन आम बात, और मौसम की मार इतनी कठोर कि रेल ट्रैक बिछाना इंजीनियरिंग की दृष्टि से नामुमकिन सरीखा।

विशेषज्ञों का कहना है कि रेल निर्माण के लिए जरूरी मजबूत आधारभूत संरचना यहां प्रकृति ने ही नकार दी। भारी बारिश, हिमस्खलन और भूकंपीय गतिविधियां हर प्रयास को विफल कर देती हैं। आर्थिक नुकसान का भय भी कम नहीं- एक किलोमीटर ट्रैक की लागत सामान्य इलाकों से कई गुना ज्यादा।

वर्तमान यात्रा के विकल्प

फिर भी सिक्किम के लोग हार नहीं मानते। यात्रा का सहारा सड़क और हवाई मार्ग हैं। न्यू जलपाईगुड़ी या सिलीगुड़ी जंक्शन उतरकर नेशनल हाईवे-10 से गंगटोक की 125 किमी की खड़ी चढ़ाई तय करनी पड़ती है। शेयर्ड टैक्सी, बसें या निजी गाड़ियां चलती हैं, लेकिन मानसून में भूस्खलन से घंटों जाम और अलगाव आम है। हवाई अड्डा पाक्योंग मौसम पर निर्भर है, इसलिए ज्यादातर यात्री बागडोगरा आते हैं। हेलीकॉप्टर सेवा सीमित और महंगी।

सेवोक-रंगपो परियोजना की प्रगति

अब उम्मीद की किरण सेवोक-रंगपो रेल परियोजना से है। पश्चिम बंगाल के सेवोक को सिक्किम के रंगपो से जोड़ने वाली 45 किमी लाइन में 14 सुरंगें (38 किमी लंबी), 13 बड़े पुल और 5 स्टेशन बन रहे हैं। जनवरी 2026 तक 85% काम पूरा हो चुका- 12 सुरंगें खुदाई समाप्त, ट्रैक बिछाने की तैयारी। बैलास्टलेस ट्रैक तकनीक का इस्तेमाल हो रहा। लक्ष्य 2027 का है, जिसकी पुष्टि सिक्किम के सीएम प्रेम सिंह तमांग ने की। पीएम मोदी ने फरवरी 2024 में रंगपो स्टेशन का शिलान्यास किया।

रेल आने के लाभ

रेल आने से सिक्किम का कायाकल्प होगा। पर्यटन- गंगटोक, नाथुला पास, छांगू झील- लाखों यात्रियों को सस्ता-आसान सफर देगा। माल ढुलाई सुधरेगी, राशन की कमी खत्म। रणनीतिक रूप से चीन सीमा पर मजबूती मिलेगी, सेना को फायदा। नौकरियां बढ़ेंगी, अर्थव्यवस्था चमकेगी। अभी हाईवे कटता है तो राज्य अवरुद्ध; रेल वैकल्पिक जीवनरेखा बनेगी।

सिक्किम की प्रतीक्षा अंतिम पड़ाव पर है। भारतीय रेल का यह अंतिम किला जीतना देश की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रमाण होगा। क्या 2027 तक सीटी गूंजेगी हिमालय में? समय जवाब देगा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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