
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच पश्चिम एशिया में छिड़ा युद्ध पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला रहा है। ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट बंद करने के फैसले ने वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, जहां पेट्रोल-डीजल की कमी तो नहीं, लेकिन LPG सिलेंडरों की भारी किल्लत ने गृहणियां परेशान कर दी हैं।
रेस्तरां और होटल बंद हो रहे हैं, जबकि PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की आपूर्ति बिना रुके जारी है। PNGRB के अनुसार, 784 जिलों में फैले PNG नेटवर्क ने LPG जैसी टेंशन से लाखों घरों को निजात दी है।
युद्ध का वैश्विक असर
LPG, जो प्रोपेन-ब्यूटेन का मिश्रण है, कच्चे तेल रिफाइनिंग और नेचुरल गैस प्रोसेसिंग का बाय-प्रोडक्ट है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की 31.3 MMT खपत का 60% आयात पर निर्भर है, जो 90% होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। युद्ध के कारण शिपिंग बाधित होने से सिलेंडर डिलीवरी रुक गई, जिसका असर गुजरात, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में दिखा। दूसरी ओर, PNG मुख्यतः मीथेन गैस है, जो KG बेसिन, असम (50% घरेलू उत्पादन) से आती है। 32,000 किमी NGPL ग्रिड से गेट स्टेशन होते हुए MDPE पाइपलाइनों द्वारा घरों तक पहुंचती है।
PNG की सप्लाई प्रक्रिया
PNG घर कैसे पहुंचती है? नेशनल गैस ग्रिड से शहर स्टेशन पर दबाव कम कर स्टील पाइपों से कॉलोनी, फिर GI/कॉपर पाइप और मीटर से स्टोव तक। कनेक्शन 48 घंटे में लग जाता है। वर्तमान में 1.62 करोड़ घर जुड़े हैं, 2034 तक 12.6 करोड़ का लक्ष्य। गुजरात (अहमदाबाद, सूरत), महाराष्ट्र (मुंबई), दिल्ली-NCR, यूपी (नोएडा, लखनऊ, मेरठ क्षेत्र) में मजबूत कवरेज। PNGRB के नेशनल PNG ड्राइव 2.0 से 307 GA में विस्तार।
सरकारी नीतियां और फायदे
सरकार PNG वाले इलाकों में LPG बंद करने का आदेश दे चुकी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने 24 मार्च को नोटिफाई: 3 माह में PNG अपनाओ वरना LPG कट। PNG सस्ता (₹700-800/माह), सुरक्षित (हल्की गैस), 24×7 सप्लाई। LPG सिलेंडर भारी, रिसाव जोखिम भरा। विशेषज्ञ कहते हैं, PNG से आयात निर्भरता घटेगी, पर्यावरण बचेगा।
आगे की राह
मेरठ जैसे शहरों में भी PNG पहुंच रहा है, जहां LPG किल्लत चरम पर। युद्ध ने PNG इंफ्रास्ट्रक्चर की अहमियत उजागर की। ‘वन नेशन, वन ग्रिड’ से 25,000+ किमी पाइपलाइन तैयार। भारत को KG-असम उत्पादन बढ़ाना होगा। फिलहाल, PNG लाखों घरों का सहारा।









