
भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पीएम ई-ड्राइव (पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट) योजना में बड़े बदलाव किए हैं। 10,900 करोड़ रुपये के बजट वाली इस स्कीम को अब पहले से ज्यादा आसान और असरदार बनाया गया है।
खास बात यह है कि अब बिना सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे शोरूम से ही सीधी सब्सिडी मिलेगी। दोपहिया ईवी के लिए डेडलाइन 31 जुलाई 2026 तक बढ़ाई गई है, जबकि ई-रिक्शा जैसे थ्री-व्हीलर के लिए 31 मार्च 2028 तक राहत।
योजना का विस्तार और लक्ष्य
1 अक्टूबर 2024 से शुरू हुई यह योजना ईवी अपनाने, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने और प्रदूषण घटाने पर केंद्रित है। सरकार ने दोपहिया ईवी का लक्ष्य 14 लाख से बढ़ाकर 24.8 लाख कर दिया है। अब तक 14.39 लाख से ज्यादा टू-व्हीलर इसकी लाभ उठा चुके हैं, और सरकार ने कंपनियों को 1,182 करोड़ रुपये जारी किए हैं। हालांकि, बजट समय से पहले खत्म होने पर स्कीम रुक सकती है। ईवी चार्जिंग स्टेशन 27,000 से पार पहुंच चुके हैं, जिसमें 2,000 करोड़ का अलग प्रावधान है।
पात्रता और कीमत सीमा
सिर्फ निजी खरीदार और व्यावसायिक संस्थाएं पात्र हैं- सरकारी विभाग बाहर। टू-व्हीलर के लिए एक्स-शोरूम प्राइस 1.5 लाख रुपये तक, थ्री-व्हीलर के लिए 2.5 लाख तक सीमित। वाहन अधिकृत ओईएम का हो, न्यूनतम रेंज/स्पीड मानक पूरे करें। आधार-लिंक्ड मोबाइल अनिवार्य। दोपहिया पर ₹2,500/kWh सब्सिडी (अधिकतम ₹5,000 तक) मिलती है।
शोरूम से सब्सिडी क्लेम
प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस है:
- अधिकृत डीलरशिप पर ईवी चुनें।
- आधार e-KYC (फेस रिकग्निशन via पीएम ई-ड्राइव ऐप/पोर्टल) पूरा करें।
- डीलर e-वाउचर जेनरेट करे, SMS लिंक भेजे।
- वाउचर पर साइन करें, डीलर अपलोड करे।
- इनवॉइस से सब्सिडी कटे, डीलर RTO भी संभाले।
यह तुरंत डिस्काउंट सुनिश्चित करता है।
फायदे और भविष्य प्रभाव
ईवी अब बजट में आ जाएंगे, ईंधन खर्च बचेगा। पर्यावरणीय लाभ से शहरों की हवा साफ होगी। पब्लिक ट्रांसपोर्ट (ई-बस, ई-ट्रक) और चार्जिंग नेटवर्क पर जोर से लंबी दूरी की चिंता खत्म। राज्य स्तर पर अतिरिक्त इंसेंटिव संभव। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ग्रीन मोबिलिटी का बड़ा कदम है, लेकिन बजट प्रबंधन जरूरी। जल्द खरीदारी करें- pmedrive.heavyindustries.gov.in पर चेक करें।





