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वॉर का डर! विदेश यात्रा छोड़ अब लोग चुन रहे हैं ‘स्वदेशी’ ट्रिप, एजेंट्स दे रहे हैं बंपर डिस्काउंट

युद्ध के डर से गोरखपुर से विदेश यात्राएँ कैंसल हो रही हैं, जिससे रोज़ाना 400–500 करोड़ का घाटा हो रहा है। लोग सुरक्षित विकल्प ढूँढ़ रहे हैं, जिससे डोमेस्टिक टूरिज्म और निकटवर्ती एशियाई देशों के पैकेज में तेज़ मांग आई है। एजेंट अब सस्ते, कम‑जोखिम वाली स्वदेशी और एशियाई ट्रिप बढ़ावा दे रहे हैं।

By Pinki Negi

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गोरखपुर के विस्तारित शहरी और नगरीय वर्ग में पहले जहाँ यूरोप, मध्य पूर्व और अमेरिका की विदेशी यात्राएँ फैशन और दिखावे का हिस्सा बनी हुई थीं, आज उसी गतिविधि का बड़ा हिस्सा युद्ध और सुरक्षा चिंताओं की वजह से ठहर गया है। ट्रैवल एजेंट बताते हैं कि पीक सीज़न में जहाँ हवाई बुकिंग इतनी ज़्यादा होती थी कि टिकट और सीट नहीं मिलती थी, वहीं अब रोज़ाना बड़ी संख्या में बुकिंग्स कैंसल हो रही हैं।

लोग सुरक्षा, उड़ान रद्द होने और विदेश में फंसे रहने के डर से यात्राएँ टाल रहे हैं। इस वजह से इंटरनेशनल टूर‑बुकिंग में 10–12 प्रतिशत तक गिरावट आई है, जिसके चलते गोरखपुर जैसे शहरों में रोज़ाना 400–500 करोड़ रुपये तक का घाटा हो रहा है।

विदेश यात्रा में भारी गिरावट

युद्ध और भू‑राजनीतिक तनाव ने विदेश यात्रियों की मनोस्थिति पर सीधा असर डाला है। एजेंट्स के मुताबिक, जो लोग अभी भी यूरोप या उत्तरी अमेरिका की यात्रा करना चाहते हैं, वे भी अब इंश्योरेंस, रिफंड‑पॉलिसी और रूट‑सेफ्टी को लेकर ज़्यादा सतर्क हो गए हैं। मध्य पूर्व की तरफ जाने वाली फ्लाइट्स या रूट्स जिनमें ईरान, इजरायल या नज़दीकी ज़ोन शामिल होते हैं, वहाँ बुकिंग तेज़ी से घट रही है। जिन लोगों ने साल भर पहले यूरोप या मध्य पूर्व की ट्रिप बुक कर दी थी, वे अब भी बदले में यात्रा रद्द करने का निर्णय ले रहे हैं।

जैसा कि रॉयल टूर ऐण्ड ट्रैवल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मालिक अहमद माआज़ बताते हैं, “वॉर ने टूरिज्म को बहुत प्रभावित किया है। लोग लगातार फ्लाइट‑कैंसिल करवा रहे हैं, और ऐसा अगर लम्बे समय तक चला तो दिक्कत होगी।” उनके अनुसार, अगर यह स्थिति जारी रही तो अंतरराष्ट्रीय टूरिज्म‑सेक्टर को निवेश और रोज़गार दोनों के लिहाज़ से गहरा झटका लगेगा।

डोमेस्टिक टूरिज्म और ‘निकट‑एशियाई’ विकल्प

इस विकट स्थिति ने एजेंटों को रणनीति बदलने पर मजबूर किया है। अब वे अंतरराष्ट्रीय टूर के बजाय डोमेस्टिक टूरिज्म और निकटवर्ती एशियाई देशों के पैकेज ज़्यादा बढ़ावा दे रहे हैं। लोग जानबूझकर उन रूट्स को चुन रहे हैं, जिन पर मध्य पूर्व का हवाई क्षेत्र शामिल नहीं होता, जैसे वियतनाम, थाईलैंड, श्रीलंका, सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया और कंबोडिया। ये देश न केवल दूरी के हिसाब से करीब हैं, बल्कि टिकट और पैकेज भी यूरोप या अमेरिका की तुलना में काफी सस्ते और कम‑जोखिम वाले माने जाते हैं।

अहमद माआज़ बताते हैं, “जिन लोगों ने विदेश टूर कैंसिल किए हैं, हम उनके सामने डोमेस्टिक टूरिज्म का ऑप्शन रख रहे हैं, ताकि वे अपनी छुट्टियाँ बर्बाद न करें।” इस वजह से लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, नीलगिरी, गोवा और दूसरे हिल‑स्टेशन पैकेज इन दिनों गोरखपुर के ग्राहकों के बीच खासी मांग में हैं।

घाटा और भविष्य का दबाव

युद्ध चलने से न केवल ट्रैवल एजेंट, बल्कि एयरलाइंस, होटल, गाइड‑सर्विस और लोकल ट्रांसपोर्ट पर भी दोहरा दबाव पड़ रहा है। गोरखपुर जैसे शहरों में, जहाँ बड़ी संख्या में परिवार और MES/रेलवे/सरकारी कर्मचारी विदेश यात्रा योजना बनाते हैं, इस तरह की गिरावट से रोज़गार और लोकल बिज़नेस दोनों पर असर पड़ रहा है। एजेंट चिंतित हैं कि अगर युद्ध की स्थिति लम्बे समय तक चली तो वैश्विक टूरिज्म‑इकोसिस्टम में भारत और भी पीछे रह सकता है।

ग्राहकों के लिए नई प्राथमिकताएँ

गोरखपुर के युवा और मिडल‑क्लास ग्राहक अब यात्रा चुनते समय तीन बातों पर ज़्यादा ज़ोर दे रहे हैं:

  • सुरक्षित रूट और स्टेबल अन्तरराष्ट्रीय माहौल।
  • लचीली बुकिंग‑पॉलिसी, जिसमें गलत टाइम पर या आपात स्थिति में बुकिंग आसानी से रिसेड्यूल या रिफंड हो सके।
  • डोमेस्टिक या निकट‑एशियाई टूर पर बंपर डिस्काउंट और ऑफर, जिससे यात्रा‑बजट न्यूनतम रहे।

इस दौर में ग्राहकों के लिए सबसे समझदार बात यह है कि वे न केवल मंज़िल पर, बल्कि रूट, इंश्योरेंस और एजेंट की विश्वसनीयता पर भी ज़्यादा ध्यान दें। इस तरह का अंतरराष्ट्रीय टूरिज्म‑संकट लंबे समय तक रह सकता है, लेकिन इसी वजह से भारतीय घरेलू पर्यटन और निकटवर्ती एशियाई बाज़ार के लिए यह अवसर भी बन रहा है, जहाँ गोरखपुर जैसे शहरों से आने वाली मांग देश‑दर‑देश यात्रा को बदलती दिशा दिखाती है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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