
केंद्र सरकार ने संसद में जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) बिल 2026 पेश कर आम जनता को बड़ी राहत दी है। लोकसभा में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद द्वारा शुक्रवार को प्रस्तुत यह विधेयक 23 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों को सरल बनाएगा। इनमें 717 अपराधों को सिविल दंड में बदलकर जन-विश्वास आधारित शासन को बढ़ावा मिलेगा।
लाइसेंस समाप्ति पर 30 दिन की ग्रेस पीरियड
सबसे बड़ी राहत ड्राइविंग लाइसेंस धारकों को मिली है। मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन से लाइसेंस वैलिडिटी खत्म होने के बाद 30 दिनों तक इसे वैध माना जाएगा। नवीनीकरण आवेदन पर कोई चालान नहीं कटेगा। पहले बिना वैध लाइसेंस वाहन चलाने पर तुरंत जुर्माना लगता था। यह बदलाव दस्तावेज जुटाने में देरी होने पर आम लोगों को बचाएगा। जितिन प्रसाद ने ट्वीट कर इसे ‘ट्रस्ट-बेस्ड गवर्नेंस’ का क्रांतिकारी कदम बताया।
नवीनीकरण और पंजीकरण में नई सुविधा
अब नवीनीकरण आवेदन पर नया लाइसेंस आवेदन तिथि से प्रभावी होगा, पुरानी समाप्ति तारीख से नहीं। वाहन पंजीकरण पूरे राज्य में मान्य हो सकेगा, जोन या जिले तक सीमित नहीं रहेगा। महानगरों में रहने वालों को इससे आसानी होगी। पंजीकरण या बीमा रद्द होने की सूचना 14 से बढ़ाकर 30 दिन में दी जा सकेगी, जल्दबाजी से जुर्माने का डर खत्म।
बिल का व्यापक उद्देश्य
यह विधेयक पुराने कानूनों की अस्पष्टताओं को दूर करेगा, व्यवसायों और नागरिकों को सरलता देगा। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, तकनीकी खामियों से होने वाली परेशानियां समाप्त होंगी। 67 प्रावधान सीधे रोजमर्रा जीवन को आसान बनाएंगे। सरकार का फोकस ‘भरोसे’ पर शासन है, जहां छोटी गलतियों पर सजा न हो।
संसदीय प्रक्रिया और प्रभाव
बिल लोकसभा-राज्यसभा में चर्चा के बाद कानून बनेगा। मंजूरी पर मोटर वाहन नियमों में आमूलचूल बदलाव आएंगे। हालांकि, एक साल में 5+ चालान पर लाइसेंस रद्दीकरण सख्त रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ट्रैफिक अनुशासन बनाए रखते हुए राहत देगा, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहां वाहन संख्या तेजी से बढ़ रही है। जनता इसे स्वागतयोग्य बता रही है।









