
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में एक नया मोड़ आ गया है। ओपनएआई ने अपने चैटजीपीटी प्लेटफॉर्म पर प्रस्तावित ‘एडल्ट मोड’ फीचर को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है। यह फैसला उम्र सत्यापन की चुनौतियों और नैतिक-सामाजिक जोखिमों के मद्देनजर लिया गया, जैसा कि हालिया रिपोर्ट्स में सामने आया। कंपनी अब मुख्य प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता पर फोकस कर रही है।
फीचर का प्लान और बैकग्राउंड
कंपनी की ओर से जारी बयान के अनुसार, यह फीचर 18+ यूजर्स के लिए टेक्स्ट-बेस्ड इरोटिक बातचीत का विकल्प देने वाला था। हालांकि, इमेज, वीडियो या गैरकानूनी कंटेंट पर सख्त पाबंदी की योजना थी। 2025 के अंत में सीईओ सैम ऑल्टमैन ने खुद इसकी संभावना जताई थी, लेकिन मार्च 2026 में एक्सपर्ट्स की चेतावनियों ने ब्रेक लगा दिया। मनोविज्ञान और न्यूरोसाइंस विशेषज्ञों ने आगाह किया कि इससे यूजर्स का भावनात्मक लगाव बढ़ सकता है, जो मानसिक स्वास्थ्य और वास्तविक रिश्तों पर बुरा असर डाल सकता है।
उम्र सत्यापन की मुख्य समस्या
उम्र सत्यापन सिस्टम की कमजोरी सबसे बड़ी समस्या बनी। रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह सिस्टम लगभग 12% मामलों में नाबालिगों को गलती से वयस्क मान लेता है। ऐसे में, सुरक्षा उपाय होने के बावजूद कम उम्र के यूजर्स तक पहुंच का खतरा बना रहता। ओपनएआई ने स्पष्ट किया कि फिलहाल फीचर पूरी तरह रद्द नहीं हुआ, लेकिन कोई नई समयसीमा नहीं बताई गई। इसके बजाय, कंपनी मौजूदा टूल्स को मजबूत बनाने पर जोर दे रही है।
एआई इंडस्ट्री में नैतिक बहस
यह कदम एआई इंडस्ट्री में नैतिक बहस को तेज करता है। एक ओर यूजर्स को अधिक आजादी देने की मांग है, वहीं प्लेटफॉर्म्स की सामाजिक जिम्मेदारी भी अहम। कुछ कंपनियां जैसे xAI या अन्य स्टार्टअप्स सीमित एडल्ट कंटेंट की अनुमति पर विचार कर रही हैं, लेकिन ओपनएआई ने सुरक्षा को प्राथमिकता चुनी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फैसला लंबे समय में कंपनी की विश्वसनीयता बढ़ाएगा, खासकर भारत जैसे बाजारों में जहां डिजिटल सेफ्टी नियम सख्त हो रहे हैं।
जिम्मेदारी का संतुलन
ओपनएआई के इस कदम से साफ है कि टेक्नोलॉजी के साथ जिम्मेदारी का संतुलन जरूरी है। यूजर्स के बीच मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं- कुछ इसे सेंसरशिप बता रहे हैं, तो कुछ सुरक्षा की सराहना कर रहे। भविष्य में क्या होगा, यह तो समय बताएगा, लेकिन फिलहाल चैटजीपीटी साफ-सुथरी बातचीत पर ही केंद्रित रहेगा।









