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पड़ोसी के घर की ओर है CCTV का मुंह? हो सकती है जेल! जानें प्राइवेसी का नया ‘कठोर’ कानून

हाईटेक दौर में घरों पर CCTV सुरक्षा का साथी बन गया, लेकिन पड़ोसी के घर की ओर कैमरा घुमाना निजता का उल्लंघन है। एडवोकेट मुरारी तिवारी के अनुसार, BNS धारा 77, 351 और IT Act 66E के तहत 1-3 साल की जेल हो सकती है। पहले बात करें, न माने तो थाने में शिकायत करें। प्राइवेसी मौलिक अधिकार है- सावधान!

By Pinki Negi

पड़ोसी के घर की ओर है CCTV का मुंह? हो सकती है जेल! जानें प्राइवेसी का नया 'कठोर' कानून

यह हाईटेक जमाना है जहां छोटे से कैमरे ने सुरक्षा का चेहरा बदल दिया है। लोग घरों पर CCTV लगाकर चोरी-डकैती से बच रहे हैं, लेकिन कई बार ये कैमरे पड़ोसी के घर की खिड़कियों या गेट पर फोकस हो जाते हैं। इससे निजता का गंभीर उल्लंघन होता है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार होने के बावजूद क्या पड़ोसी का ऐसा करना कानूनी है? दिल्ली बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन और हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील मुरारी तिवारी से विशेष बातचीत में साफ हो गया कि ऐसा करना अपराध है, जिसकी सजा जेल तक हो सकती है।

निजता का हनन क्यों गंभीर अपराध?

एडवोकेट मुरारी तिवारी ने स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 21 निजता को मौलिक अधिकार देता है। अगर CCTV का मुंह पड़ोसी के घर की ओर है, तो यह ‘राइट टू प्राइवेसी’ का उल्लंघन है। अपना घर सुरक्षित करने के लिए कैमरा लगाना जायज है, बशर्ते वह केवल आपके प्रवेश द्वार या सार्वजनिक सड़क को कवर करे।

लेकिन अगर यह निजी जगह जैसे मुख्य गेट या आंगन पर फोकस करता है, जहां व्यक्ति गोपनीयता की उम्मीद रखता है, तो यह गैरकानूनी है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी घर में बिना सभी की सहमति CCTV लगाने को निजता भंग माना है। ऐसे मामलों में सिविल सूट से लेकर आपराधिक केस तक बन सकता है।

कौन सी धाराएं भेजेंगी जेल?

नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) ने इसे और सख्त कर दिया है। BNS की धारा 77 (पहले IPC 354C- voyeurism) के तहत बिना सहमति महिलाओं की निजी गतिविधियां रिकॉर्ड करना 1-3 साल की कैद या जुर्माने का कारण बनेगा। अगर फुटेज से अपमान होता है, तो BNS 351 (मानहानि) और धारा 331 लागू होंगी। IT एक्ट की धारा 66E भी अनधिकृत फोटो-वीडियो कैप्चर पर 3 साल जेल या 5 लाख जुर्माना लगाती है। पुरुषों के लिए भी समान प्रावधान हैं, हालांकि महिलाओं को अतिरिक्त संरक्षण मिलता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने इसे मजबूत किया है।

शिकायत का आसान रास्ता

सबसे पहले पड़ोसी से बात करें। अगर न माने, तो नजदीकी थाने में लिखित शिकायत दें। सबूत जैसे फोटो, वीडियो या गवाह जोड़ें। साइबर सेल या ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट में FIR दर्ज कराएं। कोर्ट कैमरा हटाने या एंगल बदलने का स्थायी आदेश दे सकता है। जरूरत पड़े तो सेशन कोर्ट, हाईकोर्ट तक जाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में ऐसे केस बढ़ेंगे, इसलिए सावधानी बरतें। सोसाइटी में सभी की सहमति जरूरी है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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