
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों के $100 प्रति बैरल को पार करने के बीच केंद्र सरकार ने आम जनता और तेल कंपनियों को राहत देने के लिए पेट्रोल व डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती का ऐलान किया है। 27 मार्च को जारी इस फैसले से पेट्रोल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये कर दी गई, यानी 10 रुपये की सीधी कमी। वहीं डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी को पूरी तरह शून्य (NIL) कर दिया गया। यह कदम मध्य पूर्व के युद्धग्रस्त क्षेत्रों से उपजी वैश्विक ऊर्जा संकट के दबाव को कम करने का प्रयास है।
वैश्विक संकट का घरेलू असर
मध्य पूर्व (वेस्ट एशिया) में चल रहे संघर्ष ने ब्रेंट क्रूड के भावों को आसमान छू लिया है, जिससे भारत की तेल कंपनियां (OMCs) जैसे IOC, BPCL और HPCL भारी घाटे (अंडर-रिकवरिज) झेल रही हैं। सरकार का यह फैसला इन कंपनियों को आर्थिक बफर प्रदान करने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को अप्रत्यक्ष राहत देने का प्रयास है। वित्त मंत्री ने घोषणा में कहा कि यह कदम तेल कंपनियों की मार्जिन को मजबूत करेगा, जो पिछले कुछ महीनों से लगातार लाल निशान में चल रही हैं। हालांकि, अप्रैल 2025 में इन्हीं ड्यूटीज को बढ़ाया गया था, जिसे अब उलट दिया गया है।
कीमतों पर क्या होगा प्रभाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि पंपों पर रिटेल कीमतों में तुरंत बड़ी गिरावट की उम्मीद कम है। कारण साफ हैं- तेल कंपनियां पहले से ही ऊंचे कच्चे तेल के दामों से जूझ रही हैं। निजी कंपनी नायरा एनर्जी ने घोषणा से ठीक एक दिन पहले ही कीमतें बढ़ा दी थीं, जो इस ट्रेंड को दर्शाता है। यदि पूरा लाभ ग्राहकों तक पहुंचा, तो दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये से घटकर 84-85 रुपये और डीजल 87.67 से 77-80 रुपये प्रति लीटर हो सकता है। लेकिन राज्य वैट टैक्स स्थिर रहने से कुल कमी केंद्र की ड्यूटी के बराबर ही सीमित रहेगी।
| ईंधन | पुरानी ड्यूटी | नई ड्यूटी | संभावित कमी |
|---|---|---|---|
| पेट्रोल | ₹13/लीटर | ₹3/लीटर | ₹10 |
| डीजल | ₹10/लीटर | NIL | ₹10 |
अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव
यह कटौती किसानों, ट्रांसपोर्टरों और मध्यम वर्ग को फायदा पहुंचा सकती है, खासकर महंगाई पर अंकुश लगाने में। ट्रांसपोर्ट लागत घटने से खाद्य व अन्य वस्तुओं के दाम नियंत्रित हो सकते हैं। लेकिन यदि क्रूड प्राइस और ऊंचे रहे, तो कंपनियां लाभ को अपने घाटे की भरपाई में इस्तेमाल कर सकती हैं। विपक्ष ने इसे ‘चुनावी स्टंट’ करार दिया, जबकि सरकार इसे ‘जन-केंद्रित नीति’ बता रही है। कुल मिलाकर, यह फैसला शॉर्ट टर्म राहत है, लेकिन लॉन्ग टर्म में ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस जरूरी।









