
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी रुकने के बीच देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की किल्लत को लेकर सोशल मीडिया पर तेजी से फैली अफवाहों के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा बयान दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सप्लाई पूरी तरह नियंत्रण में, स्टॉक पर्याप्त
मंत्रालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि देश के एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप खुले हैं और लगातार ईंधन उपलब्ध करा रहे हैं। कहीं भी राशनिंग लागू नहीं है और न ही किसी पंप को सप्लाई सीमित करने का कोई निर्देश दिया गया है। सभी पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों पर पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
सरकार ने उन खबरों को पूरी तरह गलत बताया जिनमें दावा किया जा रहा था कि देश में सिर्फ 6 दिन का ईंधन स्टॉक बचा है। मंत्रालय के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में करीब 60 दिनों का वास्तविक स्टॉक मौजूद है, जबकि कुल भंडारण क्षमता 74 दिन की है। अगले 60 दिनों की कच्चे तेल की सप्लाई पहले से सुनिश्चित की जा चुकी है।
भारत की ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत स्थिति
सरकार ने जोर देकर कहा कि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पांचवां सबसे बड़ा पेट्रोलियम निर्यातक देश है। 150 से अधिक देशों को ईंधन सप्लाई करने वाला भारत अपनी घरेलू जरूरतों को आसानी से पूरा करने में सक्षम है। जहां कई देश महंगाई, राशनिंग और ऊर्जा संकट झेल रहे हैं, वहीं भारत में ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
हॉर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बावजूद भारत को 41 से अधिक देशों से कच्चा तेल मिल रहा है। देश की रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं, जिससे आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आ रही है।
एलपीजी उत्पादन में भारी बढ़ोतरी
एलपीजी के मामले में सरकार ने और भी ठोस कदम उठाए हैं। केंद्र के निर्देश के बाद रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जबकि पहले यह बढ़ोतरी 10 प्रतिशत बताई जा रही थी।
रोजाना 50 लाख से अधिक एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी की जा रही है, जबकि औसत मांग 55 लाख सिलेंडर प्रतिदिन है। ऑनलाइन बुकिंग 84% से बढ़कर अब 93% हो गई है, जिससे पैनिक बुकिंग में कमी आई है। अतिरिक्त सप्लाई भी रास्ते में है और आयात की जरूरत कम हुई है।
अफवाहें सुनियोजित साजिश
मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरें एक सुनियोजित अभियान का हिस्सा हैं, जिसका मकसद बेवजह घबराहट और दहशत फैलाना है। जरूरी चीजों को लेकर झूठी जानकारी फैलाना कानूनन अपराध है और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सावधान रहें। किसी भी तरह की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ आईपीसी धारा 505, आईटी एक्ट 2000 और संबंधित राज्य कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।









